जम्मू-कश्मीर: शिक्षक ने मेहनत से बदल दी स्कूल की तस्वीर, बच्चों के प्रवेश के लिए माता-पिता करते हैं मिन्नत
राष्ट्रीय पुरस्कार के लिए 44 शिक्षकों की सूची में संजीव जम्मू-कश्मीर से इकलौते शिक्षक हैं।
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जम्मू-कश्मीर अक्सर आतंकियों की खबरों की वजह से सुर्खियों में रहता है। केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद यहां के हालात बदलने लगे हैं। इसका उदाहरण है रियासी जिले का एक सरकारी स्कूल। यहां पढ़ाने वाले शिक्षक पूरे प्रदेश के लिए एक मिसाल बन गए हैं। उनकी लगन और मेहनत देखकर लगता है कि अगर ईमानदारी से कार्य किया जाए तो कुछ भी असंभव नहीं।
रियासी जिले के उच्च पर्वतीय इलाके में इखनी प्राइमरी स्कूल है। दूरदराज इलाके में बदहाल इमारत में कुछ समय पहले तक यहां महज 13 बच्चे पढ़ने आते थे। कम छात्र संख्या होने के कारण यह स्कूल बंद होने की कगार पर था। अब यही स्कूल शिक्षा निदेशालय से लेकर राष्ट्रीय स्तर पर नजीर बन गया है। सड़क मार्ग से 20 किलोमीटर दूर इखनी प्राइमरी स्कूल में अब 67 विद्यार्थी पढ़ रहे हैं। यह बदलाव स्कूल के शिक्षक संजीव कुमार शर्मा ग्रामीणों के सहयोग से लाए हैं। संजीव को राष्ट्रीय पुरस्कार के लिए चुना गया है। राष्ट्रीय पुरस्कार के लिए 44 शिक्षकों की सूची में संजीव जम्मू-कश्मीर से इकलौते शिक्षक हैं।
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जर्जर इमारत चमक उठी, खेल-खेल में पढ़ाई का माहौल
इखनी प्राइमरी स्कूल की जर्जर इमारत चमक उठी है। पढ़ाई के साथ बच्चों में खेल की खास रुचि जागी है। स्कूल समेत पूरे गांव में खेल-खेल में पढ़ाई का माहौल बन गया है। कुंड खनियारी (पौनी) निवासी संजीव कुमार ने अपना शिक्षक बनने का सफर 2009 में शुरू किया था। इस दौरान उन्होंने हाई स्कूल कुंड खनियारी, मिडिल स्कूल लैड़ और गर्ल्स हाई स्कूल पौनी में सेवाएं दी हैं।
स्कूल के बदहाल होने का पता चला तो खुद तैनाती ली
शिक्षकों को शिक्षण का प्रशिक्षण देने वाले संजीव कुमार को दो वर्ष पूर्व इखनी स्कूल की बदहाली का पता चला। तब सड़क से इस स्कूल की दूरी 20 किलोमीटर थी, जहां सर्दियों में दो से तीन फुट बर्फ गिरती है। उन्होंने इस स्कूल में तैनाती की मांग की और स्कूल को पूरे क्षेत्र में बदलाव का केंद्र बनाने की ठानी।
स्कूल पहुंचने के लिए दो घंटे चलते हैं पैदल
संजीव ने बताया कि वर्तमान में स्कूल पहुंचने के लिए दो घंटे का पैदल रास्ता है, लेकिन आज गांव में जागरूकता का स्तर बहुत ऊंचा है। 13 से बच्चों की संख्या बढ़कर 67 हो गई है। स्कूल में किंडर गार्टन भी है, जहां हर साल तीन से पांच वर्ष आयु वर्ग के 12 से 15 बच्चों को प्लेवे पद्धति में सिखाया जाता है।
...जब पेशेवर पहलवान ने दिया बेटी खिलाओ का नारा
संजीव कुमार कुश्ती के राष्ट्र स्तरीय खिलाड़ी रहे हैं। उन्होंने इखनी स्कूल में ज्वाइन करते ही सबसे पहले गैंती और बेलता उठाकर खुद स्कूल परिसर में सुधार कार्य शुरू कर दिया। सरकार के बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ के साथ बेटी खिलाओ का नारा दिया। बेटियों को खेल से जोड़ने पर जोर दिया, जिसका शानदार रिस्पांस भी मिला। इखनी स्कूल में तैनाती से पूर्व भी संजीव सैकड़ों स्कूली छात्राओं को दंगल की खिलाड़ी बना चुके हैं। संजीव ने बताया कि पौनी जोन के 15 हजार बच्चों को खेल के प्रति जागरूक किया। 300 छात्राओं को दंगल की खिलाड़ी बनाया, जिनमें से 20 छात्राओं ने प्रदेश स्तर पर कुश्ती में भाग लेकर समाज की सोच बदली।
लद्दाख के मुहम्मद अली को भी राष्ट्रीय पुरस्कार
लद्दाख में कारगिल जिले के मुहम्मद अली को भी राष्ट्रीय पुरस्कार के लिए चुना गया है। अली गवर्नमेंट मिडिल स्कूल करिथ शरगोल कारगिल में प्रभारी हेड मास्टर हैं। उन्होंने स्कूल को शिक्षा का ऐसा केंद्र बनाया, जो पूरे प्रदेश में मिसाल है।