जम्मू-कश्मीर: स्वतंत्रता दिवस पर ड्रोन हमले के खतरे से निपटने के लिए रणनीति तैयार, तैनात की गईं क्यूआरटी टीमें
पुलिस की क्यूआरटी टीमों को कई जगहों पर तैनात कर दिया गया है। महत्वपूर्ण और संवेदनशील स्थानों पर एंटी ड्रोन सिस्टम स्थापित किए गए हैं।
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स्वतंत्रता दिवस पर जम्मू-कश्मीर में ड्रोन के खतरे से निपटना सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी चुनौती है। जिस तेजी से आतंकी संगठन ड्रोन का इनका इस्तेमाल कर रहे हैं, उससे आशंका है कि अगले 20 दिनों के दौरान ऐसे और भी प्रयास हो सकते हैं। लिहाजा इससे निपटने के लिए पुलिस ने एंटी ड्रोन रणनीति बनाई है।
एडीजीपी मुकेश सिंह का कहना है कि इससे निपटने के लिए कड़े बंदोबस्त किए गए हैं। किस तरह की तैयारी की गई है, फिलहाल इसकी जानकारी नहीं दे सकते, लेकिन महत्वपूर्ण और संवेदनशील स्थानों पर एंटी ड्रोन सिस्टम तैनात किया गया है। पुलिस ने अन्य सुरक्षा एजेंसियों के साथ मिलकर तैयारी की है। मुकेश सिंह का कहना है कि 15 अगस्त को लेकर तैयारी चल रही है। सुरक्षा बढ़ाई जा रही है। ड्रोन के संभावित हमलों को रोकने की पूरी तैयारी है। जैश की साजिश की खबर मिली है। जो इनपुट मिले हैं, उन पर काम चल रहा है। आतंकी स्वतंत्रता दिवस पर किसी साजिश को अंजाम देने की फिराक में हैं। जैश और लश्कर दोनों मिलकर ऐसा करना चाहते हैं। हमारे पास इस तरह के इनपुट हैं।
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एनआईए की टीम ने भी ली मामले की जानकारी
अखनूर में मार गिराए गए ड्रोन और इससे मिली आईईडी मामले की जानकारी एनआईए ने भी ली है। एनआईए इससे पहले ड्रोन के दो मामलों की जांच कर रही है। इसमें वायुसेना स्टेशन पर हमला मुख्य रूप से शामिल है। एनआईए को सबूत मिले थे कि वायुसेना स्टेशन पर हुआ हमला पाकिस्तान में बनाई गई साजिश के तहत आतंकी संगठन लश्कर ने किया। इसमें चीन के ड्रोन का इस्तेमाल किया गया। ड्रोन तवी नदी से आए और वापस चले गए।
अखनूर में जो ड्रोन मिला है, वो भी वायुसेना स्टेशन पर हमले में इस्तेमाल ड्रोन की तरह ही है। ऐसे में एनआईए ने इस मामले की जानकारी प्राप्त की है, ताकि हमले की जांच में कुछ तथ्य जुटाए जाएं। सूत्रों का कहना है कि ड्रोन के पार्ट देखकर 24 घंटे के भीतर पता लगाया जा सकता है कि इसने कहां से और कितनी उड़ान भरी होगी।