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Jammu News: अदालत ने झूठी गवाही पर कार्रवाई की मांग ठुकराई
Wed, 03 Dec 2025 02:07 AM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जम्मू
संवाद न्यूज एजेंसी, जम्मू
Updated Wed, 03 Dec 2025 02:07 AM IST
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लोक अभियोजन की अर्जी गैर-कानूनी करार
सांबा। जिला सांबा की प्रधान सत्र न्यायाधीश अदालत ने साल 2017 की एक गंभीर आपराधिक मामले से जुड़े दो गवाहों के खिलाफ झूठी गवाही की कार्यवाही शुरू करने संबंधी लोक अभियोजन पक्ष के आवेदन को खारिज कर दिया है।
मामले के अनुसार अभियोजन ने अदालत से आग्रह किया था कि प्राथमिकी संख्या में दर्ज हत्या के प्रयास और गंभीर चोट पहुंचाने से संबंधित आरोपों के दौरान दो महत्वपूर्ण गवाह ज्योति देवी और अरुण कुमार ट्रायल के समय अपने पूर्व कथनों से मुकर गए थे और पक्ष द्रोही होकर अभियोजन के विपरीत बयान दे बैठे। इसके आधार पर उनके विरुद्ध झूठी गवाही की कार्रवाई शुरू की जाए। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि दंड प्रक्रिया संहिता की संबंधित धारा के तहत किसी गवाह पर झूठी गवाही का संज्ञान तभी लिया जा सकता है जब अदालत अपने अंतिम निर्णय या आदेश में स्पष्ट रूप से यह टिप्पणी दर्ज करे। अदालत ने पाया कि अभियोजन की ओर से दाखिल अर्जी में ऐसी कोई टिप्पणी या पाया गया तथ्य प्रस्तुत नहीं किया गया है। इन परिस्थितियों में अदालत ने लोक अभियोजन की अर्जी को कानूनी रूप से अस्थिर बताया और कहा कि निर्धारित शर्तें पूरी न होने के चलते (परजरी) की कार्यवाही शुरू नहीं की जा सकती। इसी आधार पर न्यायालय ने माना कि प्रस्तुत आवेदन विधिसम्मत नहीं है और उसे अस्वीकार कर दिया।
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सांबा। जिला सांबा की प्रधान सत्र न्यायाधीश अदालत ने साल 2017 की एक गंभीर आपराधिक मामले से जुड़े दो गवाहों के खिलाफ झूठी गवाही की कार्यवाही शुरू करने संबंधी लोक अभियोजन पक्ष के आवेदन को खारिज कर दिया है।
मामले के अनुसार अभियोजन ने अदालत से आग्रह किया था कि प्राथमिकी संख्या में दर्ज हत्या के प्रयास और गंभीर चोट पहुंचाने से संबंधित आरोपों के दौरान दो महत्वपूर्ण गवाह ज्योति देवी और अरुण कुमार ट्रायल के समय अपने पूर्व कथनों से मुकर गए थे और पक्ष द्रोही होकर अभियोजन के विपरीत बयान दे बैठे। इसके आधार पर उनके विरुद्ध झूठी गवाही की कार्रवाई शुरू की जाए। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि दंड प्रक्रिया संहिता की संबंधित धारा के तहत किसी गवाह पर झूठी गवाही का संज्ञान तभी लिया जा सकता है जब अदालत अपने अंतिम निर्णय या आदेश में स्पष्ट रूप से यह टिप्पणी दर्ज करे। अदालत ने पाया कि अभियोजन की ओर से दाखिल अर्जी में ऐसी कोई टिप्पणी या पाया गया तथ्य प्रस्तुत नहीं किया गया है। इन परिस्थितियों में अदालत ने लोक अभियोजन की अर्जी को कानूनी रूप से अस्थिर बताया और कहा कि निर्धारित शर्तें पूरी न होने के चलते (परजरी) की कार्यवाही शुरू नहीं की जा सकती। इसी आधार पर न्यायालय ने माना कि प्रस्तुत आवेदन विधिसम्मत नहीं है और उसे अस्वीकार कर दिया।
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