जम्मू-कश्मीर: पीएसए की वैधता और इसे खत्म करने संबंधी जनहित याचिका दायर, कोर्ट ने दिया ये आदेश
याचिका में कहा गया कि पीएसए लगाने का अधिकार सिर्फ प्रदेश सरकार को है। न कि डिवकाम और डीसी को। लिहाजा इसे निरस्त किया जाए।
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हाईकोर्ट में डिवकाम और डीसी की ओर से लगाए जाने वाले पीएसए की वैधता और इसे खत्म करने संबंधी जनहित याचिका दायर की गई है। इस पर हाईकोर्ट ने एडवोकेट जनरल को एक महीने के भीतर सरकार का पक्ष रखने का समय दिया है।
याचिका में कहा गया है कि पीएसए लगाना अवैध है, क्योंकि यह भारत के संविधान के 44वें संशोधन का उल्लंघन है। जिसे केंद्र प्रभाव में लाया था। मंगलवार को चीफ जस्टिस पंकज मित्थल और जस्टिस विनोद चटर्जी कौल वाली खंडपीठ ने इस याचिका पर सुनवाई की। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद एक महीने के भीतर सरकार से अपना पक्ष रखने को कहा।
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चरस के साथ पकड़े गए दो आरोपियों की जमानत अर्जी को हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया। मंगलवार को जस्टिस संजीव कुमार ने मामले में सुनवाई की। अब्दुल मजीद और मो कासिम निवासी मुंबई 28 अप्रैल 2019 को रामबन में 10 किलो चरस के साथ पकड़े गए थे। ये लोग दिल्ली नंबर की सेंट्रो कार में श्रीनगर से आते वक्त पुलिस नाके पर पकड़े गए थे।
मामले में सुनवाई करते हुए जज ने कहा कि नशा समाज को खोखला कर रहा है। जिसका समाज के युवाओं पर गहरा असर पड़ रहा है। लिहाजा इसमें जमानत देने से ऐसा करने वालों को बढ़ावा मिलेगा। इसलिए आरोपियों को अभी जमानत नहीं दी जाएगी।