वैशाख शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि गुरुवार को मां बगलामुखी की जयंती मनाई जा रही है। धर्म ग्रंथों के अनुसार मां बगलामुखी को पीतांबरा, बगला, ब्रह्मास्त्र विद्या के नामों से भी जाना जाता है। मां का पूजन करने से जीवन की सभी प्रकार की बाधाओं और पापों से मुक्ति मिलती है। मां की पूजा में पीले रंग की सामग्री होने से पूजा का शुभ लाभ मिलता है।
मां बगलामुखी जयंती: बाधाओं से मुक्ति के लिए इस मंत्र का जाप करें, पूरी होती है हर मनोकामना
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वैदिक मंत्रों से चौकी पर स्थापित समस्त देवी-देवताओं की पूजा करें। इसमें आह्वान, आसन, पाद्य, अर्घ्य, आचमन, स्नान, वस्त्र, सौभाग्य सूत्र, चंदन, रोली, हल्दी, सिंदूर, दुर्वा, बिलपत्र, पुष्प-हार, धूप-दीप, नैवेद्य, फल, दक्षिणा, आरती, प्रदक्षिणा, मंत्र पुष्पांजलि अर्पित करें। इसके बाद प्रसाद वितरित कर पूजन संपन्न करें। इस दिन माता सीता का भी जन्मोत्सव मनाया जाता है।
मां बगलामुखी को पीला रंग बहुत ही प्रिय होता है। इसी कारण से मां बगलामुखी को पीताम्बारा भी कहते हैं। मान्यता है कि मां बगलामुखी की साधना करने से तमाम तरह की परेशानियों और शत्रु से जुड़ी बाधाओं से मुक्ति मिलती है।
दस महाविद्याओं में आठवीं महाविद्या हैं मां बगलामुखी। इनकी कृपा से साधक का जीवन हर प्रकार की बाधाओं से मुक्त हो जाता है। सारे ब्रह्माण्ड की शक्ति मिलकर भी इनका मुकाबला नहीं कर सकती। माता बगलामुखी की पूजा करने से शत्रुओं की पराजय होती है और सभी तरह के वाद-विवाद में विजय प्राप्त होती है।
मां बगलामुखी की पूजा से लाभ शत्रुनाश, वाकसिद्धि, वाद-विवाद में विजय आदि के लिए मां बगलामुखी की साधना काफी शुभ एवं लाभ पहुंचाने वाली है। बगलामुखी मां की उपासना से हर प्रकार के तंत्र से निजात मिलती है।