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Hindi News ›   Jammu and Kashmir ›   Jammu News ›   politics in Kashmir intensified after National Conference raised the voice of Jammu's rights memorandum given to the Delimitation Commission

नेशनल कांफ्रेंस में खलबली: जम्मू के हक पर कश्मीर में सियासत, मामला शांत कराने के लिए आए आगे फारूक अब्दुल्ला

Sat, 17 Jul 2021 12:33 AM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू Published by: जम्मू और कश्मीर ब्यूरो Updated Sat, 17 Jul 2021 12:33 AM IST
सार

कश्मीर के एक पदाधिकारी ने बताया कि परिसीमन पर नेकां(नेशनल कांफ्रेंस) का स्टैंड बिलकुल साफ है और वह जनसंख्या को आधार बनाने का है। लेकिन जम्मू इकाई ने अलग राग छेड़ दिया है। इससे जनता में भ्रम की स्थिति उत्पन्न होगी।

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politics in Kashmir intensified after National Conference raised the voice of Jammu's rights memorandum given to the Delimitation Commission
फारूक अब्दुल्ला - फोटो : अमर उजाला, फाइल फोटो

विस्तार

परिसीमन आयोग को दिए गए ज्ञापन में नेकां(नेशनल कांफ्रेंस) की ओर से जम्मू के हक की आवाज उठाने पर कश्मीर में सियासत तेज हो गई है। नेशनल कांफ्रेंस की कश्मीर इकाई में खलबली मची है। पार्टी की बैठकों में इस पर नाराजगी जताई गई। विरोध की सुगबुगाहट तेज होने पर पार्टी अध्यक्ष डॉ. फारूक अब्दुल्ला को स्वयं आगे आना पड़ा। अब कश्मीर के नेताओं की ओर से जम्मू के हक संबंधी मांग को वापस लेने के लिए दबाव बनाया जा रहा है।

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दरअसल नेकां की जम्मू इकाई की ओर से पहले जम्मू डिक्लरेशन घोषित कर जम्मू के हित की आवाज उठाई गई। कश्मीर इकाई के नेताओं को जम्मू केंद्रित बात अखरने लगी। हाल ही में परिसीमन आयोग के दौरे के दौरान नेकां के प्रतिनिधिमंडल ने जम्मू को उसका वाजिब हक देने संबंधी ज्ञापन सौंपा। इसमें जनसंख्या के अलावा यहां की भौगोलिक चुनौतियों को भी ध्यान में रखने की बात कही गई। इस ज्ञापन ने कश्मीर में राजनीति गरमा दी है।
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पीपुल्स कांफ्रेंस की ओर से पार्टी को दोहरे मानदंड अपनाकर घेरने की कोशिश की गई तो नेशनल कांफ्रेंस की कश्मीर इकाई के नेताओं में बेचैनी बढ़ गई। अंदरूनी बैठकों में कहा गया कि जम्मू इकाई की इस मांग से पार्टी कमजोर होगी। घाटी में लोगों का पार्टी से भरोसा उठेगा। कश्मीर में उसे नुकसान उठाना पड़ सकता है। अन्य दलों की ओर से पार्टी को कश्मीर में निशाने पर लिया जाएगा।
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ऐसे में जनता का सामना करने में पार्टी को दिक्कतें आएंगी क्योंकि कश्मीर में पार्टी ने जनसंख्या के आधार पर परिसीमन कराने की बात रखी है। पार्टी के कुछ पदाधिकारियों ने जम्मू इकाई के नेताओं को फोन कर उससे मांग वापस लेने और पूरे प्रकरण पर स्पष्टीकरण देने को कहा। विरोध के स्वर तेज होने पर फारूक ने यह कहकर मामला शांत करने की कोशिश की कि जम्मू और कश्मीर दोनों के मुद्दे अलग हैं। इसलिए चिंता की कोई जरूरत नहीं है। लेकिन अब भी यह विरोध पूरी तरह थमा नहीं है।

जाने क्यों कश्मीर में है इतनी नाराजगी

जम्मू इकाई से जुड़े सूत्रों का कहना है कि उन्होंने केवल यहां के लोगों की आवाज उठाई है। उनका हक मांगा है। वह यहां शांति चाहते हैं। उन्होंने जम्मू-कश्मीर के समान विकास की बात कही है। भाजपा ने जितनी प्रमुखता से जम्मू की आवाज नहीं उठाई उतनी प्रमुखता से और खुलकर नेकां ने आवाज बुलंद की। धर्मनिरपेक्ष तरीके से सोचते हुए जम्मू इकाई ने पूरे प्रदेश के समन्वित विकास की बात की है। कहीं से भी पार्टी लाइन से इतर कोई बात नहीं हुई। इन सबके बावजूद कश्मीर में इतनी नाराजगी क्यों है। जम्मू इकाई ने ही पांच अगस्त 2019 के बाद जब सारी राजनीतिक गतिविधियां ठप पड़ी हुई थी तो यहां के कार्यकर्ताओं को जोड़े रखा। क्योंकि यहां और भी राजनीतिक विकल्प लोगों के पास है।

परिसीमन आयोग को दिया गया दस्तावेज सार्वजनिक है। जम्मू को उसका हक मिलना ही चाहिए। इससे वे पीछे नहीं हटेंगे। -देवेंद्र सिंह राणा, नेकां संभागीय अध्यक्ष

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