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महबूबा मुफ्ती: प्रशासनिक उपेक्षा कोरोना महामारी से ज्यादा खतरनाक, सरकार पर लगाया ये आरोप

Thu, 03 Jun 2021 12:27 PM IST
प्रशांत कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू Published by: प्रशांत कुमार Updated Thu, 03 Jun 2021 12:27 PM IST
सार

महबूबा मुफ्ती ने कहा कि एससी और एसटी लोगों के साथ न्याय नहीं किया जा रहा है। अनुच्छेद 370 को हटाते हुए जम्मू को यह कहा गया था कि उनके लिए विकास में सभी बाधाएं दूर हो गई हैं। लेकिन आज यहां जम्मू में लोगों को दवाइयां तक उपलब्ध नहीं हो पा रहीं।

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Mehbooba Mufti said that administrative neglect is more dangerous than corona epidemic
महबूबा मुफ्ती - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

पीडीपी की अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने कहा कि जन हित से जुड़े मुद्दों पर प्रशासनिक उपेक्षा कोरोना महामारी से ज्यादा खतरनाक है। पार्टी की जम्मू प्रांतीय इकाई के नेताओं के साथ वर्चुअल बैठक में महबूबा ने कहा जम्मू-कश्मीर में कोरोना महामारी से बड़ी संख्या में लोगों की मौत होने व संक्रमित मरीजों के मामले लगातार आने से साफ है कि सरकार व प्रशासन की महामारी से निपटने के लिए तैयारी अधूरी थी। 

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उन्होंने कहा कि भाई-भतीजावाद से प्रशासन में लोगों की सुनवाई नहीं हो रही है। उन्होंने कहा कि जिला स्तर पर प्रशासन को जन कल्याण के लिए फैसले लेने का अधिकार भी नई दिल्ली ने नहीं दिया है। भाजपा की राजनीतिक आकांक्षाओं की पूर्ति करने के लिए प्रशासन काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि मुगल रोड और किश्तवाड़ सिंथन हाई-वे लंबे समय से यातायात के लिए बंद है। लेकिन नई दिल्ली में जो लोग सत्ता में हैं वह यह नहीं चाहते कि चिनाब घाटी व पीर पंजाल क्षेत्र के लोग कश्मीर से जुड़ें। इससे उनके राजनीतिक हितों को नुकसान पहुंचने का खतरा है। 
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इन दो अहम सड़कों के बंद रहने से व्यापारी वर्ग को बड़ा नुकसान हो रहा है। इसके अलावा इन क्षेत्रों के लोग बेहतर उपचार के लिए कश्मीर नहीं पहुंच पा रहे। किश्तवाड़ और रामबन में एक साल पहले अस्पताल में स्थापित किए गए वेंटिलेटर भी काम नहीं कर रहे हैं।
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महबूबा ने कहा-सरकार हर बार सुरक्षा का बहाना बनाकर मुझे रोक रही

महबूबा मुफ्ती ने एक बार फिर प्रदेश सरकार पर उनकी मूवमेंट पर रोक लगाने का आरोप लगाया। महबूबा मुफ्ती ने बुधवार को जारी एक वीडियो संदेश में कहा कि आज एक बार फिर से सरकार ने कोविड और सुरक्षा का बहाना कर मुझे कुलगाम के नूराबाद जाने से रोक दिया। नूराबाद वह जगह है जहां हाल ही में एक नौजवान ने अपने पिता की बेबसी कोदेख कर खुदकुशी कर ली। इस युवक का पिता एक स्कूल टीचर था जिसने आतंक का रास्ता छोड़कर अमन का रास्ता अपना लिया था। पिछले ढाई साल से इसका वेतन इसलिए बंद था कि कभी किसी जमाने में वह आतंकी हुआ करता था। पिता की बेबसी को देख उसे कोई और रास्ता नहीं सूझा और इस युवक ने उसका बोज काम करने के उद्देश्य से खुदकुशी कर ली।

महबूबा ने कहा कि यह केवल इस टीचर की बात नहीं है, कश्मीर में ऐसे कई लोग होंगे जो किसी जमाने में आतंकी रहे होंगे और उन्होंने हिंसा का रास्ता त्याग कर अमन का रास्ता अपनाया होगा। महबूबा ने कहा कि कई लोगों ने इज्जत की जिंदगी गुजारने का फैसला किया है लेकिन बदकिस्मती से आज की सरकार उनके पीछे पड़ी हुई है। कई लोगों का वेतन बंद रखा गया है, उनपर सर्विलांस रखा गया है।

उन्होंने कहा कि उन्हें यह बात समझ नहीं आ रही कि एक ओर सरकार युवाओं से आतंकवाद को त्याग कर मुख्यधारा में शामिल होने को कहती है। और दूसरी ओर उन लोगों को तंग किया जा रहा है जिन्होंने इस रास्ते को त्याग कर अमन की जिन्दगी जीने का फैसला किया हुआ है। महबूबा ने कहा जब एलजी दौरा करते हैं तब तो सुरक्षा के इंतजाम किए जाते हैं तो मेरे समय ही सुरक्षा का बहाना क्यों बनाया जाता है। कहा कि खुद सरकार ऐसे परिवार के पास नहीं जाती, लेकिन जब मैं उनके आंसू पोछने के लिए जाना चाहती हूं तो मुझे रोका जाता है।   

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