फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Jammu and Kashmir ›   Jammu News ›   jammu kashmir news

Jammu News: घाटी में जुलाई माह में डूबने के 43 मामले, एक दर्जन से अधिक आत्महत्या के प्रयास के

विज्ञापन
jammu kashmir news
श्रीनगर। झेलम नदी में कूदकर आत्महत्या करने वाली एक महिला का वीडियो सोशल मीडिया पर हाल ही में वायरल हुआ था। पिछले कुछ दिनों से जल निकायों में कूदकर जान देने वाले लोगों के ऐसे ही कई वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर चिंताजनक रूप से सामने आए हैं। एसडीआरएफ के एक अधिकारी ने कहा, पिछले महीने घाटी में डूबने के 43 मामले दर्ज किए गए, जिनमें से एक दर्जन से अधिक आत्महत्या के प्रयास थे।
विज्ञापन

यहां तक कि राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) की रिपोर्ट के अनुसार, 2022 में भारत में होने वाली सभी आत्महत्याओं के मामलों में लगभग 30 प्रतिशत जम्मू-कश्मी से हैं। घाटी में आत्महत्या के मामलों में भारी वृद्धि देखी जा रही है, जबकि विशेषज्ञ और धार्मिक विद्वान मानसिक बीमारियों से पीड़ित व्यक्तियों की पहचान और परामर्श की मांग कर रहे हैं।
विज्ञापन

जीएमसी श्रीनगर के आईएमएचएएनएस (इंस्टीट्यूट ऑफ मेंटल हेल्थ एंड न्यूरोसाइंस) के मनोचिकित्सा विभाग में प्रोफेसर डॉ. यासिर अहमद राथर ने बताया कि आत्महत्या के 90 प्रतिशत मामलों में अंतर्निहित मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं होती हैं। अगर इस पर ध्यान दिया जाए तो व्यक्ति को इतना बड़ा कदम उठाने से रोका जा सकता है। उन्होंने कहा, ऐसे व्यक्ति ज्यादातर वित्तीय मुद्दों, घरेलू हिंसा, रिश्ते की विफलता या यहां तक कि शैक्षणिक दबाव सहित विभिन्न कारणों से गंभीर अवसाद से पीड़ित होते हैं। मानसिक बीमारी के कारण, व्यक्ति तनाव का सामना नहीं कर पाता है और वह जीवन समाप्त करने वाला कदम उठा लेता है।
विज्ञापन
विज्ञापन

डॉ. यासिर ने कहा कि समाज विशेषकर माता-पिता और धार्मिक विद्वान बढ़ती आत्महत्याओं से निपटने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। धार्मिक विद्वानों और नेताओं का लोगों पर अच्छा प्रभाव है। वे जागरूकता बढ़ा सकते हैं और धर्म की पृष्ठभूमि में ऐसे विषयों पर चर्चा कर सकते हैं। इसी तरह माता-पिता और शिक्षक भी बच्चों को समझा सकते हैं। कश्मीर के ग्रैंड मुफ्ती नासिर-उल-इस्लाम ने कहा कि पालन-पोषण के साथ-साथ जन जागरूकता बढ़ाना ऐसी बुराइयों को रोकने में फायदेमंद साबित हो सकता है। माता-पिता को यह जांचना होगा कि उनका बेटा या बेटी किसी मानसिक समस्या से तो नहीं जूझ रहे हैं। वे मिल-बैठकर इसका समाधान निकाल सकते हैं। माता-पिता को बच्चे के साथ घनिष्ठ संबंध विकसित करना होगा।

मुफ्ती नासिर उल इस्लाम ने कहा कि जन जागरूकता कश्मीर में आत्महत्या के मामलों को समान रूप से रोक सकती है। उन्होंने कहा, आत्महत्या के परिणामों के बारे में समाज में जागरूकता फैलाने की भी जरूरत है। ऐसे विषयों पर चर्चा होनी चाहिए ताकि हर व्यक्ति शिक्षित हो और ऐसा कदम उठाने से बचे।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed