चुनौतीपूर्ण अभियान और उपलब्धि: कश्मीर ऑफ रोड क्लब बना काबल गली को पार करने वाला पहला सिविलियन क्लब
क्लब की 22 गाड़ियों में सवार 60 लोग 13671 फुट की ऊंचाई को पार कर द्रास तक पहुंचे। उत्तरी कश्मीर के गुरेज सेक्टर में सेना ने किया था, ‘जश्न ए आजादी’ जीत रैली का आयोजन।
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कश्मीर ऑफ रोड क्लब काबल गली को पार करने वाला पहला सिविलियन क्लब बन गया। सेना की अनुमति के बाद क्लब की 22 गाड़ियों में सवार 60 सदस्य 13671 फीट की ऊंचाई पर स्थित काबल गली को पार करते हुए द्रास तक पहुंचे। सेना की चिनार कोर ने ‘जश्न ए आजादी’ जीत रैली नाम से इस अभियान का आयोजन किया था, जिसे राजदान दर्रे से कारगिल जिले के द्रास सेक्टर तक के लिए फ्लैग ऑफ किया गया।
कश्मीर ऑफ रोड क्लब के संस्थापक अली साजिद ने कहा, आखिरकार हमने कर दिखाया। हम पिछले तीन वर्षों से इस विशेष अभियान पर काम कर रहे थे। जितनी उम्मीद थी, उससे कहीं बेहतर हुआ। हमारी पूरी टीम इस पूरे सर्किट को पूरा करने वाली पहली सिविलियन कॉन्वॉय बन गई है। कुल मिलाकर हमारे पास 22 वाहन 4 बाई 4 और 60 प्रतिभागी थे, जिनमें पुरुष, महिलाएं और बच्चे शामिल थे। इनमें सबसे छोटा सदस्य 2 साल का था जोकि अपने माता-पिता के साथ शामिल हुआ।
इस अनूठे अभियान को सेना ने कश्मीर ऑफ रोड के समूह के सदस्यों के लिए सुगम बनाया है। उनके द्वारा सीमांत जिले बांदीपोरा के गुरेज सेक्टर में एलओसी से सटी तुलेल घाटी से आगे बढ़ने के लिए विशेष अनुमति दी गई और इस दौरान उन्हें पूरा सपोर्ट दिया गया। इस अभियान के दौरान प्रतिभागियों ने गुरेज घाटी के दिलकश नजारों का लुत्फ उठाया। इस दौरान कई जगहों पर स्थानीय लोगों द्वारा रंगारंग कार्यक्रम भी पेश किए गए। इतना ही नहीं इस दौरान प्रतिभागियों ने वहां के गांवों और बस्तियों का भी अनुभव किया।
साजिद ने कहा- यह पूरा अभियान खासा चुनौतीपूर्ण और अन्य अभियानों से बहुत ही अलग था
साजिद ने कहा, यह पूरा अभियान खासा चुनौतीपूर्ण और अन्य अभियानों से बहुत ही अलग था। तुलेल घाटी से काबल गली की ओर जाने वाला पूरा रास्ता बजरी वाला था। सड़क बहुत ही संकरी, खड़ी और फिसलन भरी थी। यही कारण है कि यह वर्ष के अधिकांश समय भूस्खलन और खराब मौसम के कारण निरंतर बंद रहता है। एक प्रतिभागी सुलतान शाह ने कहा कि यह एक ऐसा अभियान था जिसके बारे में हम कभी सोच भी नहीं सकते।
यह केवल सेना की सहायता से कश्मीर ऑफ. रोड क्लब द्वारा संभव बनाया गया। अभी तक का सबसे लम्बा ऑफ. रोड अनुभव रहा, जिसमें हमने करीब 150 किलोमीटर का सफर तय किया। सुल्तान ने कहा कि इस दौरान कई कठिनाइयां भी आईं। एक बार तो उनकी गाड़ी का एक टायर हवा में झूलने लगा, लेकिन राहत की बात यह रही कि सही सलामत सभी प्रतिभागियों ने यह चुनौतीपूर्ण अभियान पूरा किया।
क्लब की पीआर डायरेक्टर फरहा जैदी ने कहा, वह बहुत रोमांचित हैं। हमारी पूरी टीम पर भरोसा दिखाने और इस सर्किट से गुजरने की अनुमति देने के लिए सेना का धन्यवाद करती हूं। उन्होंने पूरी यात्रा के दौरान हमारी सभी संभावित जरूरतों को पूरा किया। सर्किट बहुत चुनौतीपूर्ण था, लेकिन हमने पूरा किया।
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