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Jammu: जम्मू-कश्मीर समेत सभी पहाड़ी राज्य अब भूकंप की दृष्टि से अति संवेदनशील, जोन छह में शामिल किया गया

Sun, 30 Nov 2025 01:23 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू/देहरादून
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू/देहरादून Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Sun, 30 Nov 2025 01:23 AM IST
सार

भारतीय मानक ब्यूरो ने डिजाइन भूकंपीय जोखिम संरचनाओं के भूकंपरोधी डिजाइन के मानदंड रीति संहिता-2025 में नया भूकंपीय क्षेत्रीकरण मानचित्र जारी किया है।

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Jammu: Jammu and Kashmir now earthquake-sensitive and included in Zone 6
demo - फोटो : पीटीआई

विस्तार

जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड समेत सभी पहाड़ी राज्यों को भूकंप की दृष्टि से अति संवेदनशील जोन-छह में शामिल किया गया है। भारतीय मानक ब्यूरो ने डिजाइन भूकंपीय जोखिम संरचनाओं के भूकंपरोधी डिजाइन के मानदंड रीति संहिता-2025 में नया भूकंपीय क्षेत्रीकरण मानचित्र जारी किया है।

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इससे पहले राज्य के जिलों को जोन चार और पांच में विभाजित किया गया था। वैज्ञानिकों के अनुसार, इससे पूरे राज्य में निर्माण कार्यों के लिए लोगों को अधिक सजग होना होगा।
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जम्मू के भू-विशेषज्ञ और जियोलॉजी एल्युमनी एसोसिएशन से जुड़े डॉ. युद्धवीर के अनुसार हिमालय पर लगातार शोध होते हैं। अब नए नेटवर्क विकसित हुए हैं। डाटा हासिल करने और विश्लेषण के नए उपकरणों से विश्लेषण में सुधार आया है। ऐसे में नए पैरामीटर्स को शामिल कर अब नया मानचित्र जारी किया गया है। यह प्रक्रिया चलती रहती है। अभी तक प्रदेश के जिलों को चार और पांच जोन में विभाजित किया गया था।
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वाडिया हिमालय भू-विज्ञान संस्थान के निदेशक विनीत गहलोत ने बताया कि भारतीय मानक ब्यूरो भूकंपीय जोनिंग मानचित्र जारी करता है। इससे पहले वर्ष-2016 में इसे जारी किया गया था। अब करीब नाै वर्ष बाद जारी नए मानचित्र में सभी पहाड़ी राज्यों को समान रूप से जोन छह में शामिल किया गया है। इसका अर्थ यह हुआ कि भूकंप की दृष्टि से जो खतरा जम्मू-कश्मीर में है, वही उत्तराखंड में भी है। निदेशक गहलोत कहते हैं कि बड़े डैम, सड़क, इमारत आदि के निर्माण में इसका महत्वपूर्ण रोल होता है। अब पहाड़ी राज्यों के भीतर निर्माण कार्य में एकरूपता आएगी। इससे पहले जोन पांच में शामिल रुद्रप्रयाग, चमोली, बागेश्वर और पिथौरागढ़ भूकंप की दृष्टि से सबसे अधिक संवेदनशील जिले थे।


पृथ्वी की दृष्टि से हिमालय में कोई बहुत अंतर नहीं होता : बिष्ट
श्रीनगर गढ़वाल केंद्रीय विवि के भूगर्भ विभाग के विभागाध्यक्ष एमपीएस बिष्ट कहते हैं कि पृथ्वी की दृष्टि से हिमालय में कोई बहुत अंतर नहीं होता है। उनकी चट्टान, बाउंड्री, प्लेट आदि एक जैसी ही होती है। पहले जोनिंग हुई थी, उसमें राज्य को दो जोन में रखा गया था। अब एक ही जोन (छह) में रखा गया है। इसकी संवेदनशीलता बढ़ा दी गई है। ऐसे में हमें अधिक सजग होना होगा। उन्होंने बताया कि भूकंप की पूर्व घटना, तीव्रता समेत अन्य पहलुओं को शामिल करते हुए भूकंप की जोनिंग होती है।

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