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Jammu News: ग्रेटर कैलाश हत्याकांड में छह गवाहों की जिरह स्थगित
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निचली अदालत के फैसले को हाई कोर्ट ने रद्द किया
आरोपियों ने दी थी आदेश को चुनौती
जम्मू। बहुचर्चित ग्रेटर कैलाश हत्याकांड में छह चश्मदीद गवाहों की जिरह को स्थगित कर दिया गया है। जिरह तब तक स्थगित रहेगी जब तक कि सभी की जांच नहीं हो जाती। हत्या के इस मामले में सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी सहित नौ आरोपी शामिल हैं। इन आरोपियों ने निचली अदालत द्वारा 15 अप्रैल 2025 को दिए गए आदेश को हाई कोर्ट में चुनौती दी थी। हाई कोर्ट ने इस आदेश में जिरह स्थगित करने की याचिका खारिज कर दी गई थी।
ग्रेटर कैलाश हत्याकांड जम्मू में एक बहुचर्चित मामला है। इसमें अवतार सिंह की हत्या हो गई थी। यह हत्या जमीन विवाद को लेकर हुई थी। इसमें कुछ लोगों ने अवतार सिंह पर कथित तौर पर एक प्लॉट पर जबरन कब्जा करने का विरोध करने के लिए हमला कर दिया था।
हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश राजेश सेखरी ने याचिकाकर्ताओं की तरफ से पेश हुए वकीलों की दलीलें सुनीं। साथ ही अभियुक्तों की याचिका स्वीकार करते हुए निचली अदालत द्वारा पारित आदेश को भी खारिज कर दिया। आदेश दिया कि याचिकाकर्ताओं की जिरह स्थगित करने के लिए दायर आवेदन स्वीकार किया जाता है। उनकी जिरह तब तक स्थगित रहेगी जब तक कि उन सभी की मुख्य जांच नहीं हो जाती।
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याचिका स्वीकार करते हुए न्यायमूर्ति राजेश सेखरी ने कहा कि यह सच है कि अभियोजन पक्ष के गवाहों से अपेक्षा की जाती है कि वे अपनी मुख्य जांच में धारा 161 या 164 सीआरपीसी के तहत जांच के दौरान दर्ज किए गए अपने बयानों के आधार पर गवाही दें।
वर्तमान मामले में याचिकाकर्ताओं द्वारा बताई गई परिस्थितियों ने धारा 254 बीएनएसएस की उपधारा 3 के अनुसार न्यायालय द्वारा विवेकाधिकार के प्रयोग को उचित ठहराया। आरोपियों ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 की धारा 528 के तहत भारत के संविधान के अनुच्छेद 227 के साथ उच्च न्यायालय के समक्ष एक याचिका दायर की है। जेएनएफ
यह है बीएनएसएस की धारा 254 (3)
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 254 (3) गवाहों की जिरह को स्थगित करने से संबंधित है। न्यायाधीश के पास यह विवेकाधिकार है कि वह किसी गवाह की जिरह को अन्य गवाहों की गवाही के बाद तक के लिए टाल सकता है। या किसी गवाह को आगे की जिरह के लिए वापस बुला सकता है।
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आरोपियों ने दी थी आदेश को चुनौती
जम्मू। बहुचर्चित ग्रेटर कैलाश हत्याकांड में छह चश्मदीद गवाहों की जिरह को स्थगित कर दिया गया है। जिरह तब तक स्थगित रहेगी जब तक कि सभी की जांच नहीं हो जाती। हत्या के इस मामले में सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी सहित नौ आरोपी शामिल हैं। इन आरोपियों ने निचली अदालत द्वारा 15 अप्रैल 2025 को दिए गए आदेश को हाई कोर्ट में चुनौती दी थी। हाई कोर्ट ने इस आदेश में जिरह स्थगित करने की याचिका खारिज कर दी गई थी।
ग्रेटर कैलाश हत्याकांड जम्मू में एक बहुचर्चित मामला है। इसमें अवतार सिंह की हत्या हो गई थी। यह हत्या जमीन विवाद को लेकर हुई थी। इसमें कुछ लोगों ने अवतार सिंह पर कथित तौर पर एक प्लॉट पर जबरन कब्जा करने का विरोध करने के लिए हमला कर दिया था।
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हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश राजेश सेखरी ने याचिकाकर्ताओं की तरफ से पेश हुए वकीलों की दलीलें सुनीं। साथ ही अभियुक्तों की याचिका स्वीकार करते हुए निचली अदालत द्वारा पारित आदेश को भी खारिज कर दिया। आदेश दिया कि याचिकाकर्ताओं की जिरह स्थगित करने के लिए दायर आवेदन स्वीकार किया जाता है। उनकी जिरह तब तक स्थगित रहेगी जब तक कि उन सभी की मुख्य जांच नहीं हो जाती।
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याचिका स्वीकार करते हुए न्यायमूर्ति राजेश सेखरी ने कहा कि यह सच है कि अभियोजन पक्ष के गवाहों से अपेक्षा की जाती है कि वे अपनी मुख्य जांच में धारा 161 या 164 सीआरपीसी के तहत जांच के दौरान दर्ज किए गए अपने बयानों के आधार पर गवाही दें।
वर्तमान मामले में याचिकाकर्ताओं द्वारा बताई गई परिस्थितियों ने धारा 254 बीएनएसएस की उपधारा 3 के अनुसार न्यायालय द्वारा विवेकाधिकार के प्रयोग को उचित ठहराया। आरोपियों ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 की धारा 528 के तहत भारत के संविधान के अनुच्छेद 227 के साथ उच्च न्यायालय के समक्ष एक याचिका दायर की है। जेएनएफ
यह है बीएनएसएस की धारा 254 (3)
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 254 (3) गवाहों की जिरह को स्थगित करने से संबंधित है। न्यायाधीश के पास यह विवेकाधिकार है कि वह किसी गवाह की जिरह को अन्य गवाहों की गवाही के बाद तक के लिए टाल सकता है। या किसी गवाह को आगे की जिरह के लिए वापस बुला सकता है।