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Hindi News ›   Jammu and Kashmir ›   Jammu News ›   J&K Election Women's power limited to advocacy of equality 10 elections in 52 years only 12 reached the ass

J&K Election: 52 साल में हुए 10 बार चुनाव, इतनी महिलाएं पहुंचीं विधानसभा; बराबरी की वकालत तक सीमित नारीशक्ति

Tue, 03 Sep 2024 01:56 PM IST
निकिता गुप्ता अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू Published by: निकिता गुप्ता Updated Tue, 03 Sep 2024 01:56 PM IST
सार

जम्मू-कश्मीर में 52 वर्षों में केवल 12 महिलाएं विधायक बनीं लेकिन फिर भी राजनीतिक दल महिलाओं को टिकट देने में कंजूसी बरतते रहे हैं।

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J&K Election Women's power limited to advocacy of equality 10 elections in 52 years only 12 reached the ass
महबूबा मुफ्ती - फोटो : एजेंसी

विस्तार

जम्मू-कश्मीर में राजनीतिक दल महिलाओं के बराबरी के अधिकार की बात तो करता  हैं। लेकिन चुनावी टिकट देने में उनकी कंजूसी अनदेखी नहीं की जा सकती। 1972 से लेकर 2014 तक हुए दस विधानसभा चुनावों में केवल 12 महिलाएं ही विधायक बनने में सफल हो पाईं। इनमें भी महबूबा मुफ्ती ने तीन बार विधायक बनने के साथ ही मुख्यमंत्री का पद भी संभाला।

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सिर्फ 172 महिलाएं मैदान में
इन 52 वर्षों में सिर्फ 172 महिलाओं को चुनाव लड़ने का मौका मिला, जिसमें से 142 की जमानत जब्त हो चुकी है। 1972 में सबसे अधिक चार महिलाएं विधायक बनीं लेकिन हाल के चुनावों में महिला उम्मीदवारों की स्थिति काफी निराशाजनक रही है।
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महबूबा मुफ्ती का प्रभाव
महबूबा मुफ्ती, जिन्होंने 1996 में कांग्रेस के टिकट पर पहली बार चुनाव जीता और बाद में 2002 व 2008 में भी सफलता प्राप्त की, जम्मू-कश्मीर की पहली महिला मुख्यमंत्री भी बनीं। नेशनल कॉन्फ्रेंस की शमीम फिरदौस ने भी 2008 और 2014 में विधायक बनने का गौरव प्राप्त किया।
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राजनीति में महिलाओं की भागीदारी के मुद्दे
जम्मू विश्वविद्यालय की समाजशास्त्र विभाग की अध्यक्ष प्रो. विश्व रक्षा ने कहा कि समाज की संरचना में महिलाओं को घरेलू जिम्मेदारियों तक सीमित रखा जाता है। जिससे राजनीति में उनकी भागीदारी सीमित रहती है। महिलाओं के लिए 33 फीसदी आरक्षण और पार्टी में नेतृत्व वाली भूमिकाओं के अवसर मिलने से स्थिति में सुधार हो सकता है।

2024 में संभावनाएं
2024 के विधानसभा चुनाव में मुख्य पार्टियां महिलाओं को टिकट देने के वादे के साथ मैदान में हैं। भाजपा, नेकां, और पीडीपी जैसे प्रमुख दल महिला उम्मीदवारों को प्रोत्साहित करने की दिशा में कदम उठा रहे हैं।लेकिन वास्तविक बदलाव तब ही संभव होगा जब महिलाएं निर्णायक भूमिका में आएं।

1972 से अब तक जम्मू-कश्मीर में महिलाओं का चुनावी सफर
1972 में  चार महिलाएं विधायक चुनी गईं, जिनमें राजदुलारी हंडू और सरोजिनी योगाचार्य प्रमुख हैं।
1987 में यह रुझान जारी रहा और सजिदा बेगम और आशा ज़रीना जैसी विधायकों का चयन हुआ।
2002 में महबूबा मुफ़्ती और शांति देवी जैसी प्रमुख महिलाएं विधानसभा में पहुंचीं।

2024 में मुख्य पार्टियों के घोषित महिला चेहरे 
भाजपा- एक किश्तवाड़ से शगुन परिहार
नेकां- तीन : हव्वाकदल से शमीम फिरदौस, टीएच पोरा सकीना इत्तू, पाडर नागसेनी से पूजा ठाकुर
पीडीपी-दो : हजरतबल से आशिया निकास, विजबिहाड़ा से इल्तिजा मुफ्ती

राजनीतिक विशेषज्ञ जोर दे रहे हैं कि जम्मू-कश्मीर के सामाजिक-राजनीतिक संदर्भ में महिलाओं के नेतृत्व कौशल को विकसित करना बेहद जरूरी है। विधानसभा में महिलाओं के लगातार कम प्रतिनिधित्व से यह स्पष्ट होता है कि महिला नेताओं को सशक्त बनाने के लिए लक्षित पहलों की आवश्यकता है।

हालांकि चुनौतियां बड़ी हैं, जम्मू-कश्मीर की राजनीति में महिलाओं की कहानी एक तरह की दृढ़ता की है। लेकिन आंकड़े बताते हैं कि महिलाओं का विधानसभा में प्रतिनिधित्व केवल औपचारिकता से बढ़कर वास्तविक प्रभाव में तब्दील होने के लिए अभी भी काफी काम किया जाना बाकी है।

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