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#हिंदीहैंहम: बच्चों में हिंदी का डर दूर करने के लिए व्याकरण और उच्चारण पर देना होगा विशेष ध्यान
Mon, 31 Aug 2020 04:30 PM IST
प्रशांत कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
Published by: प्रशांत कुमार
Updated Mon, 31 Aug 2020 04:30 PM IST
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हिंदी हैं हम
- फोटो : Amar Ujala
शिक्षा जगत से जुड़े प्रबुद्ध लोगों ने हिंदी भाषा के प्रोत्साहन के लिए बच्चों में इसका डर निकालने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि इसके लिए बच्चो में हिंदी के व्याकरण और उच्चारण पर विशेष ध्यान देना होगा। सरकारी और निजी संस्थानों में अंग्रेजी भाषा के बढ़ते प्रचलन से भी युवा हिंदी से दूर होते जा रहे हैं। ऐसे में हिंदी को बढ़ावा देने के लिए सरकारी कामकाज में इसका इस्तेमाल बढ़ाने की जरूरत है।
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हिंदी विश्व की प्राचीन, समृद्ध भाषा होने के साथ हमारी राष्ट्र भाषा है। 14 सितंबर 1949 को हिंदी को राष्ट्र भाषा के रूप में स्वीकार किया गया। ऐसा नहीं है कि हिंदी का महत्व कम है। हिंदी सबसे ज्यादा बोली जानी वाली भाषा है। इसको लेकर हमारे मन में डर है, जिसे दूर करने की जरूरत है। वर्तमान समय में हर कोई अंग्रेजी सीखना चाहता है और हिंदी के उपयोग से बचता है। हिंदी भाषा को महत्व देने की शुरुआत हमें अपने घरों से करनी चाहिए। हिंदी का उपयोग सरकारी व गैर सरकारी संस्थाओं में करना होगा। -डॉ. दीपिका शर्मा, व्याख्याता, एमएएम कॉलेज, जम्मू
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हिंदी को लेकर बच्चों में घर और स्कूली स्तर से जिज्ञासा बढ़ाने की जरूरत है। वर्तमान समय में बच्चे और अभिभावक अंग्रेजी के प्रति अधिक रुझान रखते हैं। हमें स्कूली स्तर से बच्चों को तैयार करना होगा। स्कूलों में हिंदी विषय में वाद-विवाद, कहानी, संगोष्ठी आदि प्रतियोगिताएं करवानी होंगी। बच्चों में हिंदी के व्याकरण और उच्चारण पर विशेष ध्यान देना होगा। इसमें अभिभावकों को भी हिंदी के महत्व के प्रति जागरूक करने की जरूरत है। -कमलेश सिंह, पूर्व अध्यापक, सरकारी स्कूल कच्ची छावनी, जम्मू
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हिंदी हमारी राष्ट्र भाषा होने के बावजूद हम इसका महत्व युवा पीढ़ी को नहीं समझा पाए हैं। इस कारण हिंदी को अंग्रेजी की तुलना में कम महत्व दिया जाता है। बच्चों और युवा पीढ़ी को इसका महत्व और रोजगार सृजन को लेकर जागरूक करना होगा। आज देखा जाता है कि उच्च शिक्षा ग्रहण करने वाले छात्रों में हिंदी भाषा को लेकर जिज्ञासा होती है, लेकिन पर्याप्त जागरूकता के अभाव में वह इसे नहीं चुन पाते हैं। हम सबकी जिम्मेदारी है कि हम बच्चों को हिंदी भाषा के महत्व से अवगत करवाएं। -डॉ. सुनीता राजपूत, व्याख्याता जीडीसी कॉलेज, नगरोटा