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#हिंदीहैंहमः शिक्षाविद बोले- बच्चों में जगाना होगा हिंदी प्रेम, पढ़ाने के साथ लिखने में भी हो सुधार

Sun, 23 Aug 2020 03:43 PM IST
प्रशांत कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू Published by: प्रशांत कुमार Updated Sun, 23 Aug 2020 03:43 PM IST
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Hindi Hain Hum: Amar ujala Hindi Hai Hum campaign, According to academics, Hindi love will have to be aroused in children
हिंदी की महत्ता को लेकर शिक्षाविदों ने दी राय - फोटो : अमर उजाला

जम्मू-कश्मीर में हिंदी बोली तो जाती है, लेकिन लेखन और साहित्य में काम अन्य प्रदेशों की तुलना में बेहद कम हुआ है। व्याकरण से लेकर हिंदी लिखने और सही उच्चारण के साथ बोलने के मामले में भी सुधार लाने की जरूरत है। हिंदी अध्यापन में सेवाएं दे चुके शिक्षाविदों के अनुसार अब समय आ गया है, जब हिंदी को हर स्तर पर बढ़ावा देने पर ध्यान देना होगा।

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प्रदेश के स्कूलों में पढ़ाया जा रहा हिंदी विषय का पाठ्यक्रम बच्चों की रुचि के अनुरूप नहीं है। हिंदी की लयबद्ध कविताओं की कमी है। इस कारण बच्चे हिंदी को समझ नहीं पा रहे। हिंदी व्याकरण की दृष्टि से भी स्थिति चिंताजनक है। कुल मिलाकर बच्चों को बुनियादी स्तर से ही हिंदी की सही शिक्षा देने की जरूरत है। किसी भी भाषा को लोगों के सहयोग के बिना बढ़ाना संभव नहीं है। हालांकि जम्मू-कश्मीर सहित उत्तर भारत में हिंदी बढ़ावा देने में हिंदी फिल्मों, साहित्य और अखबारों ने अहम भूमिका निभाई है।- अशोक गुप्ता, जम्मू यूनिवर्सिटी के हिंदी विभाग से सेवानिवृत्त
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जम्मू संभाग में हिंदी का काफी प्रचार प्रसार हुआ है। इसमें हिंदी प्रचारक संस्थाओं ने महत्वपूर्ण योगदान दिया है। जम्मू-कश्मीर में हिंदी में लिखे साहित्य का स्थानीय भाषाओं में अनुवाद हुआ है, जिससे हिंदी का प्रचार प्रसार हुआ है। केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद हिंदी की ओर ध्यान बढ़ता नजर आ रहा है। इस पर तेजी से काम भी होना चाहिए। प्रदेश की स्थानीय भाषाओं को बढ़ावा देने के लिए आंदोलन हुआ, जिसका थोड़ा नुकसान हिंदी को उठाना पड़ा। इससे रेडियो, दूरदर्शन और स्कूलों में हिंदी की कुछ हद तक उपेक्षा की जाने लगी।-प्रो. राज कुमार, जम्मू यूनिवर्सिटी से सेवानिवृत्त
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जम्मू-कश्मीर हिंदी भाषी प्रदेश नहीं है। लेकिन इस श्रेणी में आने वाले दूसरे कई प्रदेशों ने इसके बाद भी हिंदी को बहुत महत्व दिया है। हिंदी साहित्य लेखन के साथ नाटकों का मंचन हो रहा है। शिक्षा के स्तर पर देखें तो हिंदी में पढ़ने वाले छात्रों की संख्या लगातार बढ़ रही है। जम्मू यूनिवर्सिटी के हिंदी विभाग में स्नातक में प्रवेश के लिए एक हजार से अधिक आवेदन आते हैं। हिंदी भाषा के छात्रों में व्याकरण की कमी है। इस पर काम करने की जरूरत है। व्याकरण की समस्या को हम स्कूली स्तर पर ठीक कर सकते हैं। इससे हिंदी के प्रति रुचि बढ़ेगी।-प्रो. नीलम सराफ, जम्मू यूनिवर्सिटी के हिंदी विभाग में कार्यरत

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