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'हिंदी हैं हम'...राष्ट्रीय गौरव के साथ विविधता में एकता का प्रतीक है हिंदी

Thu, 20 Aug 2020 09:57 AM IST
प्रशांत कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू Published by: प्रशांत कुमार Updated Thu, 20 Aug 2020 09:57 AM IST
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Amar ujala Hindi Hain Hum campaign, Hindi is symbol of unity in diversity with national pride
सामाजिक संगठनों के पदाधिकारी - फोटो : अमर उजाला

विविधताओं के बीच हिंदी न सिर्फ देश को एक सूत्र में पिरोती है, बल्कि समाज के हर वर्ग को समता का अहसास भी कराती है। बोलचाल में सबसे लोकप्रिय होने के नाते हिंदी को जम्मू-कश्मीर में भी आधिकारिक रूप से कामकाज की भाषा बनाना होगा। यह कहना है जम्मू के विभिन्न सामाजिक संगठनों के पदधिकारियों का। इन प्रबुद्ध लोगों ने एक स्वर में कहा- हिंदी को प्रोत्साहन देना समय की जरूरत है। ‘हिंदी हैं हम’ कहने में ही गर्व की अनुभूति होती है।

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अनुच्छेद 370 हटने के बाद भी यदि कोई बड़ा काम बाकी है, तो वो है हिंदी को जम्मू-कश्मीर में सरकारी कामकाज की भाषा बनाना। यहां हिंदी को तत्काल राज भाषा घोषित करना चाहिए। मौजूदा सरकारी तंत्र में नई पीढ़ी खुद को असहाय महसूस कर रही है। राष्ट्र की एक पहचान के लिए नई शिक्षा नीति में सभी से चर्चा कर हिंदी को व्यवहारिक राजभाषा बनाना चाहिए। देश की सभी भाषाएं हिंदी के साथ पली-बढ़ीं हैं, लिहाजा स्कूल-कॉलेजों से लेकर ग्रामीण इलाकों में हिंदी पर अभियान चलने चाहिए। अमर उजाला की पहल बेहद सराहनीय है। - गुलचैन सिंह चाढ़क, शिक्षाविद और अध्यक्ष, डोगरा सदर सभा
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पूरा देश हिंदी समझता, बोलता और लिखता है। जम्मू-कश्मीर में आधिकारिक रूप से इसके प्रोत्साहन में कमी समझ से परे है। सरकारी कामकाज को पूरी तरह से हिंदी में करने की जरूरत है। जिस दिन एक आम हिंदुस्तानी हिंदी में आवेदन कर सरकारी सेवाएं हासिल करेगा, उसी दिन पूरी व्यवस्था सही मायने में जनता के अनुकूल होगी और आम आदमी की उच्च शिक्षितों पर निर्भरता खत्म होगी। - रमेश गुप्ता, अध्यक्ष, महाजन सभा जम्मू सेंट्रल
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देश की बुनियाद हिंदी है। यह भाषा ही नहीं हमारी जीवन धारा है। हिंदी के साथ हम सहज महसूस करते हैं। फिर वार्तालाप से लेकर कामकाज में क्यों न इसे ही प्राथमिक माध्यम बनाया जाना चाहिए। हिंदी को बढ़ावा हमारी नई पीढ़ी के लिए भी बहुत जरूरी है। - करतार नाथ चोपड़ा, अध्यक्ष, चोपड़ा बिरादरी

उत्तर में लद्दाख से लेकर दक्षिण भारत तक हर छोटा बड़ा व्यक्ति हिंदी बोलता और समझता है। स्थानीय बोलियों और भाषाओं के बीच हिंदी सबकी सांझी है। जम्मू में घरों में डोगरी और हिंदी साथ-साथ इस्तेमाल होने वाली भाषाएं हैं। नई पीढ़ी के लिए हिंदी सबसे सहज है, ऐसे में हिंदी भाषा को बोलचाल और कामकाज की भाषा बनाना आम जन के लिए सुगम माहौल देने जैसा होगा। - अजीत खजुरिया, अध्यक्ष खजुरिया बिरादरी

राजस्व विभाग हो, पुलिस थाना या फिर अन्य विभाग, सरकारी कामकाज में इस्तेमाल होने वाली भाषा का ज्ञान न होने से जम्मू-कश्मीर की बड़ी आबादी खुद को अपाहिज महसूस करती है। जन-जन की भाषा हिंदी को सरकारी कामकाज की प्राथमिक भाषा बनाया जाना चाहिए। अन्य भाषाओं का ज्ञान भी अति आवश्यक है, लेकिन हिंदी सबसे पहले होनी चाहिए। - मंगल दास डोगरा, अध्यक्ष, गुरु रवि दास सभा


सरकारी कामकाज का मकसद जनता से है और आम जन के लिए हिंदी सबसे अनुकूल भाषा है। अनुच्छेद 370 के रहते डोगरी और हिंदी हाशिए पर थी। अब राजभाषा हिंदी को वैकल्पिक नहीं बल्कि अनिवार्य भाषा बनाने की जरूरत है। स्कूलों व अन्य संस्थानों में हिंदी को अनिवार्य विषय बनाने के अलावा राजभाषा को राजकाज की अनिवार्य भाषा भी बनाया जाना चाहिए। -गोपाल सनोत्रा, महासचिव, कश्यप राजपूत सभा
 

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