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डुग्गर त्योहार: जम्मू-कश्मीर में तमदेह पर्व पर लगाईं छबीलें, पितरों के नाम किया तर्पण
Tue, 15 Jun 2021 10:29 PM IST
करिश्मा चिब
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
Published by: करिश्मा चिब
Updated Tue, 15 Jun 2021 10:29 PM IST
सार
पारंपरिक रिति-रिवाज के साथ मनाया गया डुग्गर प्रदेश का पर्व।
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पानी की छबील
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
डुग्गर प्रदेश में विशेष महत्व रखने वाला तमदेह पर्व मंगलवार को पारंपरिक रीति-रिवाज के साथ मनाया गया। शहर के विभिन्न स्थानों पर लोगों ने ठंडे-मीठे पानी की छबीलें लगाकर राहगीरों की प्यास बुझाई। पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए फल, फूल और जल से भरे घड़े अर्पित कर तर्पण किया।
तमदेह पर शहरवासियों ने सुबह स्नान कर अपने घरों में पूजा-अर्चना कर पितरों के नाम खरीदे बर्तन व अन्य सामान दान किया और विवाहित बेटियों, कुल पुरोहित और ब्राह्मणों को भोजन करवाकर दान दिया। इसके बाद अपने क्षेत्रों में ठंडे-मीठे जल की छबीलें लगाईं। गंग्याल के आंबेडकर बाजार में स्थानीय लोगों ने छबील लगाई और रहगीरों को पानी पिलाया। कहा कि पूर्वजों की याद और सम्मान में यह पर्व मनाया जाता है। पुराने शहर, बन तालाब सहित अन्य इलाकों में भी छबीलें लगाईं गईं।
तमदेह पर्व आषाढ़ संक्रांति के दिन मनाया जाता है। मान्यता है कि इस दिन दान-पुण्य करने से पितृ दोष से मुक्ति मिलती है और यह दिन ऋतु परिवर्तन के रूप में भी मनाया जाता है। कोरोना महामारी के चलते ज्यादातर लोगों ने अपने घरों में ही पर्व मनाया। इस दिन पवित्र नदियों और सरोवरों में स्नान करने का महत्व है, लेकिन कोविड महामारी के कारण लोगों ने घर में ही पानी में गंगा जल मिलाकर स्नान कर दान-पुण्य किया।
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यह भी पढ़ें- जम्मू-कश्मीर: वैष्णो देवी के बाद जम्मू में वेंकटेश्वर मंदिर बनेगा धार्मिक पर्यटन का केंद्र, जम्मू के इन धार्मिक स्थलों पर भी होगा विकास
छन्नी रामा में छबील के साथ लगाया लंगर
जीवन संघर्ष ट्रस्ट की टीम ने छन्नी रामा में छबील के साथ न्यूट्री और ब्रेड का लंगर लगाया। मौके पर ट्रस्ट की अध्यक्ष रजनी शर्मा, महासचिव जीवन, मानवी शर्मा, संयोजक मुकेश गुप्ता, विनय गुप्ता, अमायरा, गीता, लक्ष्मी गुप्ता उपस्थित रहीं। रजनी ने बताया कि जीवन संघर्ष ट्रस्ट पूरे जम्मू-कश्मीर में दिव्यांगों की भलाई के लिए काम करता है। महामारी के दौरान भी ट्रस्ट की टीम जरूरतमंदों की मदद के लिए आगे आई है।
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तमदेह पर शहरवासियों ने सुबह स्नान कर अपने घरों में पूजा-अर्चना कर पितरों के नाम खरीदे बर्तन व अन्य सामान दान किया और विवाहित बेटियों, कुल पुरोहित और ब्राह्मणों को भोजन करवाकर दान दिया। इसके बाद अपने क्षेत्रों में ठंडे-मीठे जल की छबीलें लगाईं। गंग्याल के आंबेडकर बाजार में स्थानीय लोगों ने छबील लगाई और रहगीरों को पानी पिलाया। कहा कि पूर्वजों की याद और सम्मान में यह पर्व मनाया जाता है। पुराने शहर, बन तालाब सहित अन्य इलाकों में भी छबीलें लगाईं गईं।
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तमदेह पर्व आषाढ़ संक्रांति के दिन मनाया जाता है। मान्यता है कि इस दिन दान-पुण्य करने से पितृ दोष से मुक्ति मिलती है और यह दिन ऋतु परिवर्तन के रूप में भी मनाया जाता है। कोरोना महामारी के चलते ज्यादातर लोगों ने अपने घरों में ही पर्व मनाया। इस दिन पवित्र नदियों और सरोवरों में स्नान करने का महत्व है, लेकिन कोविड महामारी के कारण लोगों ने घर में ही पानी में गंगा जल मिलाकर स्नान कर दान-पुण्य किया।
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छन्नी रामा में छबील के साथ लगाया लंगर
जीवन संघर्ष ट्रस्ट की टीम ने छन्नी रामा में छबील के साथ न्यूट्री और ब्रेड का लंगर लगाया। मौके पर ट्रस्ट की अध्यक्ष रजनी शर्मा, महासचिव जीवन, मानवी शर्मा, संयोजक मुकेश गुप्ता, विनय गुप्ता, अमायरा, गीता, लक्ष्मी गुप्ता उपस्थित रहीं। रजनी ने बताया कि जीवन संघर्ष ट्रस्ट पूरे जम्मू-कश्मीर में दिव्यांगों की भलाई के लिए काम करता है। महामारी के दौरान भी ट्रस्ट की टीम जरूरतमंदों की मदद के लिए आगे आई है।