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हम डेड घंटे तक सड़क पर खून से लथपथ आशिक को गोद में लिए एम्बुलैंस का इंतजार करते रहे फिर पुंछ से टाटा सूमों मंगा कर अस्पताल पहुंच
Updated Wed, 25 Jul 2018 01:33 AM IST
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पुंछ। हम डेढ़ घंटे तक सड़क पर खून से लथपथ अपने भाई आशिक को गोद में लिए एंबुलेंस का इंतजार करते रहे, लेकिन न जाने गूंतारियां में हम लोगों के लिए तैनात एंबुलेंस कहां थी। परेशान होकर हमने पुंछ से टाटा सूमो मंगवाई और घायल भाई को जिला अस्पताल पहुंचाया। तब तक उसका काफी खून बह गया था।
यह कहना है पुंछ के शाहपुर सेक्टर के गांव काइयां निवासी मोहम्मद इस्माईल का, जिसका चचेरा भाई आठ वर्षीय मोहम्मद आशिक संदिग्ध विस्फोट में गंभीर रूप से घायल हो गया था। इस्माईल का कहना है कि इससे पहले भी हमारे क्षेत्र के पाक गोलाबारी में घायल होने वाले कई लोग वाहन न मिलने के कारण बीच रास्ते में खून अधिक बह जाने से खुदा को प्यारे हो चुके हैं, जिसके बाद लगातार संघर्ष के उपरांत करीब दो माह पहले क्षेत्रीय विधायक द्वारा शाहपुर सेक्टर के लिए एक एंबुलेंस भेंट की थी, जिस गांव गूंतरियां स्थित सांई मीरा बख्श की जियारत के पास तैनात किया गया था ताकि आपातकाल अथवा किसी के घायल होने पर उसे तत्काल एंबुलेंस से जिला अस्पताल पहुंचाया जा सके, लेकिन आज क्षेत्र में ओर कोई बड़ा हादसा भी पेश नहीं आया था तो वो एंबुलेंस कहां थी।
इस्माईल का कहना है कि हम डेढ़ घंटा सड़क पर घायल आशिक को गोद में लिए बैठे रहे कि शायद अब एंबुलेंस आ जाएगी परंतु जब नहीं आई। शाहपुर में जो एंबुलेंस तैनात है वो हमें नहीं मिली और न ही कोई दूसरा वाहन मिला तो हमने थक हार कर पुंछ में अपने जान पहचान की एक टाटा सूमो चालक को फोन किया और वह पुंछ से गूंतरियां पहुंचा और हमें घायल बच्चे के साथ अस्पताल में लाया। इस घटना से न सिर्फ पीड़ित परिवार बल्कि शाहपुर क्षेत्र के लोगों में रोष हैं।
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उधर स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि शाहुपर की एंबुलेंस किसी बीमार को लेकर पुंछ आई थी और इस घटना का पता चलते ही वह मरीज को छोड़ कर वापस लौट गया था तक तक यह लोग वहां से निकल आए थे। मामला जो भी हो जिले में नियंत्रण रेखा पर बसने वाले लोगों को आपातकाल में इसी प्रकार की परेशानियों का सामना करना पड़ता है। हालांकि जिले में स्वास्थ्य विभाग के अलावा एमएलए, एमएलसी भी स्वस्थ विभाग को एंबुलेंस दी है। गौरतलब है कि इससे पूर्व फरवरी में भी इसी क्षेत्र में एक दस वर्षीय बच्चे के पुराने मोर्टार में विस्फोट से घायल हो जाने पर बच्चे को अस्पताल पहुंचाने के लिए एंबुलेंस नहीं मिल पाई थी तो गांव के लोगों ने चंदा कर मेटाडोर से बच्चे को अस्पताल पहुंचाया था क्योंकि क्षेत्र में स्थित सबसे बड़े प्राथमिक चिकित्सा केंद्र बांडी चेचियां में जो एंबुलेंस तैनात थी उसका एक पहिया ही नहीं था। नियंत्रण रेखा के आसपास के क्षेत्रों में आज के इस आधुनिक युग में भी इस प्रकार की सुस्त व्यवस्थाएं लोगों की जान से खिलवाड़ करने की बात है।
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यह कहना है पुंछ के शाहपुर सेक्टर के गांव काइयां निवासी मोहम्मद इस्माईल का, जिसका चचेरा भाई आठ वर्षीय मोहम्मद आशिक संदिग्ध विस्फोट में गंभीर रूप से घायल हो गया था। इस्माईल का कहना है कि इससे पहले भी हमारे क्षेत्र के पाक गोलाबारी में घायल होने वाले कई लोग वाहन न मिलने के कारण बीच रास्ते में खून अधिक बह जाने से खुदा को प्यारे हो चुके हैं, जिसके बाद लगातार संघर्ष के उपरांत करीब दो माह पहले क्षेत्रीय विधायक द्वारा शाहपुर सेक्टर के लिए एक एंबुलेंस भेंट की थी, जिस गांव गूंतरियां स्थित सांई मीरा बख्श की जियारत के पास तैनात किया गया था ताकि आपातकाल अथवा किसी के घायल होने पर उसे तत्काल एंबुलेंस से जिला अस्पताल पहुंचाया जा सके, लेकिन आज क्षेत्र में ओर कोई बड़ा हादसा भी पेश नहीं आया था तो वो एंबुलेंस कहां थी।
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इस्माईल का कहना है कि हम डेढ़ घंटा सड़क पर घायल आशिक को गोद में लिए बैठे रहे कि शायद अब एंबुलेंस आ जाएगी परंतु जब नहीं आई। शाहपुर में जो एंबुलेंस तैनात है वो हमें नहीं मिली और न ही कोई दूसरा वाहन मिला तो हमने थक हार कर पुंछ में अपने जान पहचान की एक टाटा सूमो चालक को फोन किया और वह पुंछ से गूंतरियां पहुंचा और हमें घायल बच्चे के साथ अस्पताल में लाया। इस घटना से न सिर्फ पीड़ित परिवार बल्कि शाहपुर क्षेत्र के लोगों में रोष हैं।
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उधर स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि शाहुपर की एंबुलेंस किसी बीमार को लेकर पुंछ आई थी और इस घटना का पता चलते ही वह मरीज को छोड़ कर वापस लौट गया था तक तक यह लोग वहां से निकल आए थे। मामला जो भी हो जिले में नियंत्रण रेखा पर बसने वाले लोगों को आपातकाल में इसी प्रकार की परेशानियों का सामना करना पड़ता है। हालांकि जिले में स्वास्थ्य विभाग के अलावा एमएलए, एमएलसी भी स्वस्थ विभाग को एंबुलेंस दी है। गौरतलब है कि इससे पूर्व फरवरी में भी इसी क्षेत्र में एक दस वर्षीय बच्चे के पुराने मोर्टार में विस्फोट से घायल हो जाने पर बच्चे को अस्पताल पहुंचाने के लिए एंबुलेंस नहीं मिल पाई थी तो गांव के लोगों ने चंदा कर मेटाडोर से बच्चे को अस्पताल पहुंचाया था क्योंकि क्षेत्र में स्थित सबसे बड़े प्राथमिक चिकित्सा केंद्र बांडी चेचियां में जो एंबुलेंस तैनात थी उसका एक पहिया ही नहीं था। नियंत्रण रेखा के आसपास के क्षेत्रों में आज के इस आधुनिक युग में भी इस प्रकार की सुस्त व्यवस्थाएं लोगों की जान से खिलवाड़ करने की बात है।