संघर्ष का 128वां दिन: कब सुनेगी सरकार... तबादले की मांग को लेकर गरजे जम्मू बेस्ड रिजर्व्ड केटेगरी इंप्लाइज
कश्मीर में कार्यरत आरक्षित वर्ग के कर्मचारियों का कहना है कि वे सरकार से उपयुक्त व्यापक स्थानांतरण नीति बनाने की मांग कर रहे हैं। उनकी स्पष्ट मांग है कि कश्मीर से बाहर उन्हें जम्मू संभाग में ट्रांसफर किया जाए।
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जम्मू संभाग में तबादले की मांग को लेकर कश्मीर में कार्यरत आरक्षित वर्ग के कर्मचारियों का संघर्ष जारी है। शहर के अंबेडकर चौक पर धरने पर बैठे कर्मचारियों ने गुरुवार को नारेबाजी करते हुए सरकार के खिलाफ रोष जताया। प्रदर्शनकारियों ने बताया कि उनका आंदोलन आज 128वें दिन में प्रवेश कर गया है, लेकिन सरकार ने अब तक उनकी मांग को पूरा नहीं किया है।
कर्मचारियों का कहना है कि घाटी में एक के बाद एक हुई टारगेट किलिंग ने ऐसे हालात बनाए कि वे कश्मीर छोड़ जम्मू आने पर मजबूर हुए हैं। कश्मीर में वे खुद को और उनके परिजनों के जीवन को सुरक्षित नहीं महसूस करते है। इसलिए वे सरकार से उपयुक्त व्यापक स्थानांतरण नीति बनाने की मांग कर रहे हैं। उनकी स्पष्ट मांग है कि कश्मीर से बाहर उन्हें जम्मू संभाग में ट्रांसफर किया जाए।
प्रदर्शन में शामिल कर्मचारी बिमला ने बताया कि उन्हें तो ऐसा लगता है कि सरकार कर्मचारियों की मांग को लेकर गंभीर ही नहीं है। वे भीषण गर्मी के मौसम में अपनी मांग को लेकर धरने पर बैठे थे। इसके बाद मानसून भी बीत गया और अब सर्दी का मौसम दस्तक दे रहा है। सरकार ने उनकी मांग के लिए कमेटी गठित करने की बात तो कही थी। लेकिन उस कमेटी ने क्या रिपोर्ट दी, क्या काम किया, इसकी उन्हें कोई जानकारी नहीं मिली है। उन्हें मिला है तो बस आश्वासन।
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कर्मचारियों ने कहा कि उनके बच्चे भी उनके साथ कश्मीर में ही पढ़ते हैं लेकिन इन बदले हालातों में उनके बच्चों का भविष्य भी प्रभावित हो रहा है। काफी असमंजस की स्थिति है। उनका आगे चलकर का क्या होगा, इसकी भी उन्हें चिंता है। वे न तो बच्चों को कश्मीर के स्कूलों से निकाल कर यहां शिफ्टा करा पा रहे हैं और न ही घाटी में पढ़ने के लिए कह पा रहे हैं। करीब चार महीनों से बच्चे घर से ही पढ़ाई करने को मजबूर हैं। कई बच्चे तो उनके साथ ही धरना स्थल पर आते हैं और कई बच्चे अभी घरों में ही रह रहे हैं। उनकी सरकार से मांग है कि जल्द से जल्द उनके लिए उपयुक्त व्यापक स्थानांतरण नीति बनाई जाए।
कई कर्मचारियों का वेतन रुका
एक अन्य कर्मचारी ने बताया कि कश्मीर के हालात में हम वहां काम नहीं कर सकते हैं। लक्षित हत्याएं जारी हैं। अभी गृह मंत्री अमित शाह के दौरे के दौरान भी एक बैंक मैनेजर को निशाना बनाने की कोशिश की गई, लेकिन वह किसी तरह जान बचाने में सफल रहे। हर बार तो कोई जान नहीं बचा पाएगा। ऐसे हालातों में वहां काम करना बहुत मुश्किल है। उन्होंने कहा कि शिक्षिका रजनी बाला, राहुल भट, विजय कुमार की हत्याएं इसका प्रमाण हैं। सरकार ने कमेटी का तो गठन किया है, लेकिन अभी तक कमेटी ने कोई पहल नहीं की है। कर्मचारियों ने कहा कि कुछ डीडीओ ने कर्मचारियों का वेतन रोक रखा है। सरकार से अपील है की सभी कर्मचारियों का वेतन जारी किया जाना चाहिए।
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कश्मीर संभाग में विभिन्न विभागों में तीन हजार के करीब आरक्षित वर्ग के कर्मचारी लगभग पंद्रह साल से अपनी सेवाएं दे रहे हैं। घाटी में टारगेट किलिंग से बदले हालातों के बाद कर्मचारी जम्मू लौट आए और जम्मू बेस्ड रिजर्व्ड कैटेगरी इंप्लाइज एसोसिशन के बेनर तले अपनी मांग के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
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