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प्रशासन पर लगाया जगन्नाथ मंदिर का जबरन अधिग्रहण करने का आरोप
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सांवा में मामले की जानकारी देते पुजारी समेत अन्य लोग। संवाद
- फोटो : SAMBA
सांबा। प्रशासन पर बुद्धवानी स्थित श्री जगन्नाथ मंदिर का जबरन अधिग्रहण करने का आरोप लगाते हुए पुजारी और स्थानीय लोगों ने इसका विरोध किया है। मंदिर के महंत परमानंद पूरी, पुजारी कमलेश पूरी, पार्षद नरेन्द्र सिंह, पूर्व पार्षद कृष्ण लाल, ओम प्रकाश सिंह, बरूण सिंह, भूषण कुमार, शाम लाल, बिट्टु कुमार ने इसको लेकर पत्रकार वार्ता की। उन्होंने आरोप लगाया कि सहायक आयुक्त राजस्व (एसीआर) ने कुछ लोगों की सहायता से श्री जगन्नाथ जी मंदिर की भूमि पर अवैध रूप से कब्जा लिया है। इसके बारे में स्थानीय लोगों, मंदिर के महंतों और पार्षद को कोई जानकारी नहीं दी गई है।
उन्होंने कहा कि इस बारे में उपराज्यपाल को पत्र लिखा गया है। एक शिष्टमंडल ने भी उपायुक्त अनुराधा गुप्ता से मुलाकात कर पूरी जानकारी उन्हें दी है। उपायुक्त ने कुछ दिनों का समय लेकर इस मामले को शीघ्र हल करने का आश्वासन दिया है। वार्ता के दौरान पदाधिकारियों ने कहा कि 2008 में उपायुक्त के सरकारी आर्डर के तहत मंदिर की संपूर्ण भूमि 28 कनाल 13 मरला जो श्री जगन्नाथ जी महाराज (मंदिर) के नाम पर है। उसका परमानंदपुरी को महंत नियुक्त किया गया था।
अब कुछ दिन पहले मंदिर में बिना नोटिस दिए एक पुजारी भी कर्मचारी के तौर पर रख लिया। उसके बाद महंत परमानंद पूरी को मंदिर छोड़ कर जाने को कहा गया। प्रेस वार्ता में यह बताया गया कि जिला प्रशासन के राजस्व अधिकारी कुछ लोगों के साथ मिलकर जमीनों की रजिस्ट्री की बजाय 19 (ई) की डिग्री कर सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचा रहा है। मंदिर की भूमि के ऊपर लाखों रुपया खर्च हो रहा है जो किसी भी विभाग की तरफ से नहीं कुछ लोगों की तरफ से लगाया जा रहा है। परमानंद पूरी ने कहा कि इस मामले की पूरी जांच की जाए।
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उन्होंने कहा कि इस बारे में उपराज्यपाल को पत्र लिखा गया है। एक शिष्टमंडल ने भी उपायुक्त अनुराधा गुप्ता से मुलाकात कर पूरी जानकारी उन्हें दी है। उपायुक्त ने कुछ दिनों का समय लेकर इस मामले को शीघ्र हल करने का आश्वासन दिया है। वार्ता के दौरान पदाधिकारियों ने कहा कि 2008 में उपायुक्त के सरकारी आर्डर के तहत मंदिर की संपूर्ण भूमि 28 कनाल 13 मरला जो श्री जगन्नाथ जी महाराज (मंदिर) के नाम पर है। उसका परमानंदपुरी को महंत नियुक्त किया गया था।
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अब कुछ दिन पहले मंदिर में बिना नोटिस दिए एक पुजारी भी कर्मचारी के तौर पर रख लिया। उसके बाद महंत परमानंद पूरी को मंदिर छोड़ कर जाने को कहा गया। प्रेस वार्ता में यह बताया गया कि जिला प्रशासन के राजस्व अधिकारी कुछ लोगों के साथ मिलकर जमीनों की रजिस्ट्री की बजाय 19 (ई) की डिग्री कर सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचा रहा है। मंदिर की भूमि के ऊपर लाखों रुपया खर्च हो रहा है जो किसी भी विभाग की तरफ से नहीं कुछ लोगों की तरफ से लगाया जा रहा है। परमानंद पूरी ने कहा कि इस मामले की पूरी जांच की जाए।
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