Jammu Kashmir: नई औद्योगिक नीति से 20 हजार युवाओं को मिला रोजगार, 2030 तक 4.5 लाख का लक्ष्य
जम्मू-कश्मीर की नई औद्योगिक नीति से अब तक 20 हजार से अधिक युवाओं को रोजगार और 7460 करोड़ रुपये का निवेश मिला है। हालांकि, जून 2025 में नीति पर रोक लगने से भविष्य में निवेश और रोजगार की संभावनाएं अधर में लटक गई हैं।
विस्तार
जम्मू-कश्मीर की महत्वाकांक्षी नई औद्योगिक नीति ने अब तक 20 हजार से अधिक युवाओं को रोजगार दिया है, लेकिन इसी साल जून में इस नीति पर अचानक लगे विराम ने हजारों की नौकरियों और हजारों करोड़ के निवेश के भविष्य पर एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। वर्ष 2030 तक साढ़े चार लाख लोगों को रोजगार देने के लक्ष्य वाली इस नीति को अब उद्योगपति और हितधारक फिर से शुरू करने की मांग कर रहे हैं।
नीति के तहत अब तक प्रदेश में 909 नई औद्योगिक इकाइयों का पंजीकरण हुआ है और 7460 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश आकर्षित हुआ है। हालांकि, जून में इसे रोके जाने से पहले के महीने में केवल 37 नई इकाइयां ही पंजीकृत हो सकीं, जो एक चिंताजनक रुझान दर्शाता है।प्रदेश में सबसे ज्यादा रोजगार 2024-25 में मिला। इस साल 6714 बेरोजगारों को उद्योग जगत में नौकरी का अवसर मिला।
जबकि मौजूदा वित्तीय वर्ष में 1285 लोगों को रोजगार से जोड़ा गया, जो सबसे कम आंकड़ा है। उद्योग विभाग के निदेशक अरुण मन्हास ने बताया कि प्रदेश में उद्योगपतियों को नई औद्योगिक नीति का लाभ मिला है। उद्योगपतियों को तय नियमों के अनुसार अवसर मिल रहा है। वहीं, उद्योग जगत से जुड़े लोग अब इस नीति का विस्तार चाहते हैं, ताकि नए उद्योगों को प्रदेश में आने के लिए प्रोत्साहित किया जा सके।
औद्योगिक नीति में कितना निवेश?
प्रदेश की नई औद्योगिक नीति में अब तक 7460.39 करोड़ रुपये का निवेश जम्मू-कश्मीर में आया है। नीति के तहत तय लक्ष्य का यह महज 37 फीसदी है। 2021 से 2030 तक के लिए बनाई गई इस औद्योगिक नीति में साढ़े चार लाख लोगों को रोजगार मिलने की संभावना थी, लेकिन अब तक यह आंकड़ा 20 हजार तक ही पहुंच पाया है, जो तय लक्ष्य का महज 4.5 फीसदी है। यही वजह है कि उद्योगपति इस नीति को आगे बढ़ाने की वकालत कर रहे हैं। बड़ी तादाद में उद्योग अभी पाइपलाइन में हैं, जिन्हें औद्योगिक नीति के तहत लाभ मिलने की संभावना है।
ये थीं नियम और शर्तें2021 की नई औद्योगिक नीति को अप्रैल माह से लागू किया गया था। इस नीति को 2030 तक जारी रखा जाना था। इसमें पहले चरण में उद्योगों का पंजीकरण आवश्यक था। नीति में शहरी क्षेत्रों में 30 प्रतिशत और ग्रामीण इलाकों में 50 प्रतिशत की दर से पूंजी निवेश पर प्रोत्साहन राशि दिए जाने का प्रावधान था। औद्योगिक समूहों के लिए छह हजार एकड़ भूमि का चयन किया गया। 40 वर्ष के लिए प्रारंभिक पट्टे पर आवंटित करने का प्रावधान है और इसे बाद में 99 साल के लिए बढ़ाया जा सकता है।
औद्योगिक नीति को बढ़ाया जाए
औद्योगिक नीति का विस्तार किया जाना चाहिए। इस नीति में मिल रही रियायतों की वजह से प्रदेश में नए उद्योग खुलने शुरू हुए थे, लेकिन अब नीति को बंद कर दिया गया है। इसका असर निवेश से लेकर रोजगार तक पर पड़ रहा है। छूट की वजह से जो नए उद्योग जम्मू-कश्मीर में अपना काम शुरू कर सकते थे, उन्होंने भी अब हाथ खींच लिए हैं। यही हाल रहा तो उद्योगपति नए उद्योग लगाने में सफल नहीं होंगे। नीति को बढ़ाया जाना चाहिए।- ललित महाजन, अध्यक्ष, बीबीआईए जम्मू
औद्योगिक नीति में राहत के अलावा, नए उद्योगपतियों को पुराने उद्योगों की अपेक्षा जीएसटी में भी राहत मिल रही थी। पुराने उद्योगों का जीएसटी रिटर्न एक से डेढ़ प्रतिशत है। औद्योगिक नीति की वजह से नए उद्योग लगाने में मदद मिलने की संभावना थी, लेकिन अब ऐसा नहीं है। औद्योगिक नीति को बीच में ही खत्म कर दिया गया है। इस नीति को तय लक्ष्य तक चलाना चाहिए था और उद्योगपतियों को राहत देने की आवश्यकता थी।- वीरेंद्र जैन, चेयरमैन, फेडरेशन ऑफ इंडस्ट्री एसोसिएशन
अभी चुनौतियां कायम हैं
जम्मू की उद्योग इकाइयाँ आज बंद होने के कगार पर हैं। सरकार का उद्योगों में निवेश का मतलब रोज़गार पैदा करना है। जम्मू-कश्मीर में उद्योग हमेशा प्रोत्साहन (इंसेंटिव्स) पर ही चलते हैं। आज पुराने उद्योगों को टर्नओवर इंसेंटिव का जो वादा किया गया था, वह सरकार पूरा नहीं कर रही है।
हमारी लागत महंगी होने के कारण हम बाहर के उद्योगों के साथ मुकाबला नहीं कर सकते। यहां आप एमएसएमई विभाग के कामकाज को देखें कि उन्होंने उद्योगों या चैंबर में कितने जागरूकता कार्यक्रम किए हैं। अभी चुनौतियां कायम हैं।- अनिल गुप्ता, सीनियर वाइस प्रेसिडेंट, जम्मू चैम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री