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अन्य दोषियों को जल्द पकड़ कर सामने लाने की मांग
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उधमपुर/पंचैरी। मोंगरी तहसील के लद्दा गांव में करीब तीन सप्ताह पहले हुई हत्या के मामले में बचे हुए अन्य दोषियों को जल्द पकड़ने की मांग की गई है। इस संबंध में मृतक परिवार के सदस्य सोमवार को पुलिस स्टेशन पंचैरी पहुंचे, जहां सभी ने नए एसएचओ से मांग कि सही तरीके से जांच कर सच्चाई सबके सामने लाई जाए।
गौरतलब है कि दो जून की सुबह लद्दा गांव के जंगल से बोध राज का शव बरामद हुआ था। उसके शरीर पर तेजधार हथियार से किए गए वार के कई निशान थे। 30 मई की शाम को बोधराज मोंगरी से लद्दा में अपने पुराने घर पर खेती करने गया था। घर न लौटने पर परिवार के सदस्यों व गांववासियों ने उसकी तलाश शुरू की थी। दो जून की सुबह बोधराज का शव पुराने घर से कुछ दूरी पर जंगल से बरामद हुआ। शव मिलने के बाद पुलिस ने जांच के दौरान पाया था कि बोधराज की हत्या की गई है। पुलिस ने जब पुराने घर की जांच की तो वहां से खून के निशान भी पाए। जिसको देख कर पुलिस ने अंदाजा लगाया कि बोधराज की इसी स्थान पर हत्या की गई और फिर शव को जंगल में फेंक दिया गया।
पूर्व एसएचओ पंचैरी फारूक अहमद ने शुरुआती जांच करने के बाद शक के आधार पर बोधराज के पड़ोसी बलदेव चंद, शीशपाल चंद और दोनों की मां कौशल्या देवी को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया। इनके साथ दो अन्य लोग भी हिरासत में लिए गए थे। पूछताछ करने पर बलदेव चंद, शीशपाल चंद और कौशल्या देवी ने अपना जुर्म कबूल कर लिया था। तीनों ने पुलिस को बताया कि बोध राज के साथ लंबे समय से जमीन को लेकर विवाद चल रहा था। तीन माह पहले बोधराज ने दोनों भाइयों के साथ मारपीट की थी। 30 मई को मौका मिलने पर सबने उसकी हत्या कर दी।
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पूर्व एसएचओ ने हत्या का मामला सुलझाने का दावा तो कर दिया, लेकिन मृतक बोधराज के परिवार के सदस्य पुलिस की जांच से खुश नहीं हैं। बोधराज के भाइयों का कहना है कि हत्या करने में मां और दो बेटों के साथ कुछ और लोग भी शामिल हैं और पूर्व एसएचओ ने इसको लेकर सही तरह से जांच नहीं की है। बोधराज इतना ताकतवर था कि दो भाइयों के लिए अकेले हत्या करना संभव नहीं है। उनको पूरा यकीन है कि हत्या में कुछ और लोग शामिल हैं उनको बचाया गया है।
सोमवार को सभी नए एसएचओ विरेंद्र गुप्ता के सामने अपनी मांग रखने पहुंचे। उनकी मांग है कि सही तरह से जांच कर बचे हुए दोषियों को भी सामने लाकर सख्त कार्रवाई की जाए।
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गौरतलब है कि दो जून की सुबह लद्दा गांव के जंगल से बोध राज का शव बरामद हुआ था। उसके शरीर पर तेजधार हथियार से किए गए वार के कई निशान थे। 30 मई की शाम को बोधराज मोंगरी से लद्दा में अपने पुराने घर पर खेती करने गया था। घर न लौटने पर परिवार के सदस्यों व गांववासियों ने उसकी तलाश शुरू की थी। दो जून की सुबह बोधराज का शव पुराने घर से कुछ दूरी पर जंगल से बरामद हुआ। शव मिलने के बाद पुलिस ने जांच के दौरान पाया था कि बोधराज की हत्या की गई है। पुलिस ने जब पुराने घर की जांच की तो वहां से खून के निशान भी पाए। जिसको देख कर पुलिस ने अंदाजा लगाया कि बोधराज की इसी स्थान पर हत्या की गई और फिर शव को जंगल में फेंक दिया गया।
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पूर्व एसएचओ पंचैरी फारूक अहमद ने शुरुआती जांच करने के बाद शक के आधार पर बोधराज के पड़ोसी बलदेव चंद, शीशपाल चंद और दोनों की मां कौशल्या देवी को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया। इनके साथ दो अन्य लोग भी हिरासत में लिए गए थे। पूछताछ करने पर बलदेव चंद, शीशपाल चंद और कौशल्या देवी ने अपना जुर्म कबूल कर लिया था। तीनों ने पुलिस को बताया कि बोध राज के साथ लंबे समय से जमीन को लेकर विवाद चल रहा था। तीन माह पहले बोधराज ने दोनों भाइयों के साथ मारपीट की थी। 30 मई को मौका मिलने पर सबने उसकी हत्या कर दी।
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पूर्व एसएचओ ने हत्या का मामला सुलझाने का दावा तो कर दिया, लेकिन मृतक बोधराज के परिवार के सदस्य पुलिस की जांच से खुश नहीं हैं। बोधराज के भाइयों का कहना है कि हत्या करने में मां और दो बेटों के साथ कुछ और लोग भी शामिल हैं और पूर्व एसएचओ ने इसको लेकर सही तरह से जांच नहीं की है। बोधराज इतना ताकतवर था कि दो भाइयों के लिए अकेले हत्या करना संभव नहीं है। उनको पूरा यकीन है कि हत्या में कुछ और लोग शामिल हैं उनको बचाया गया है।
सोमवार को सभी नए एसएचओ विरेंद्र गुप्ता के सामने अपनी मांग रखने पहुंचे। उनकी मांग है कि सही तरह से जांच कर बचे हुए दोषियों को भी सामने लाकर सख्त कार्रवाई की जाए।