{"_id":"69fcf74e8c23bb75e4032a63","slug":"srinagar-no-fear-tourist-enjoy-dal-lake-talked-srinagar-news-c-10-jmu1062-906912-2026-05-08","type":"story","status":"publish","title_hn":"Srinagar News: घाटी में बेझिझक घूम रहे पर्यटक, छलक रही गर्व और आत्मविश्वास की झलक","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Srinagar News: घाटी में बेझिझक घूम रहे पर्यटक, छलक रही गर्व और आत्मविश्वास की झलक
विज्ञापन
श्रीनगर में डल झील में शिकारे की सैर करते सैलानी। संवाद
बोले-कश्मीर पूरी तरह सुरक्षित, लोगों की मेहमाननवाजी बेमिसाल, पिछली घटनाओं से आत्मविश्वास में कोई कमी नहीं
अमृतपाल सिंह बाली
श्रीनगर। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की वर्षगांठ के मौके पर विश्व प्रसिद्ध डल झील और अन्य पर्यटन स्थलों पर पर्यटक बेझिझक और बेखौफ घूमते दिखाई दिए। उन्होंने गर्व और आत्मविश्वास की भावना व्यक्त की। उन्होंने कहा, पर्यटकों ने बताया कि पिछले साल की घटनाओं से वे बिल्कुल भी नहीं डरे हैं। सुरक्षाबलों की त्वरित और प्रभावी प्रतिक्रिया ने कश्मीर आने के उनके इरादे को और मजबूत किया है।
इस बीच गुजरात से आए एक पर्यटकों के समूह से मुलाकात हुई तो उनका कहना था कि पहलगाम जैसी घटनाओं का हमारी सेना ने ऑपरेशन सिंदूर को अंजाम देकर पाकिस्तान को मुहतोड़ जवाब दिया था। हमें अपने जवानों पर पूरा भरोसा है जिसके चलते हमें घाटी आने से कोई रोक नहीं सकता। समूह के सदस्य अर्पण ने बताया कि पहलगाम जैसी घटना ने कुछ देर के लिए पर्यटन को प्रभावित किया था लेकिन घाटी में सुरक्षाबलों की तैनाती हमारे मनोबल को और बढ़ा देती है इसलिए ऐसी घटना के बाद भी हमें यहां आने से कोई नहीं रोक सका।
पर्यटक सुचारिता ने कहा कि जिस तरह से हालात को संभाला गया उस पर हमें गर्व महसूस होता है। हम बिना किसी डर के यहां आए हैं। उन्होंने आगे कहा कि कश्मीर सुरक्षित है और हम यहां आते रहेंगे।हम लोगों से भी अपील करते हैं कि यहां घूमने आएं क्योंकि न आने से वह (आतंकवादी) अपने मंसूबों में कामयाब होंगे क्योंकि वह चाहते हैं कि यहां अशांति का माहौल रहे और कोई यहां न आए।
विज्ञापन
बता दें कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ 7-8 मई, 2025 की रात को शुरू किया गया था। यह ऑपरेशन 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद शुरू किया गया था जिसमें 26 आम नागरिक जिनमें ज्यादातर पर्यटक थे मारे गए थे। इस ऑपरेशन के तहत नियंत्रण रेखा (एलओसी) और उसके पार स्थित कई आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया गया था।
मुंबई से आए रोहन ने कहा कि हमने यहां आने का प्लान बनाया और घूमने आ गए। शुरू में मन में कई सवाल उठे लेकिन ऑपरेशन सिंदूर के मुहतोड़ जवाब ने हमारे मनोबल को और मजबूत किया और हम यहां घूमने आ गए। हमारा मानना है कि ऐसी घटनाओं की वजह से लोगों को यात्रा करना नहीं छोड़ना चाहिए। यहां पूरी तरह से सुरक्षित माहौल है। सुंदर नजारे हैं और लोगों की मेहमाननवाजी बेमिसाल है।
कई पर्यटकों ने कहा कि वे कश्मीर में पर्यटन के लगातार जारी रहने को यहां के लोगों के लचीलेपन और हालात के सामान्य होने का प्रतीक मानते हैं। अगर कोई घटना होती भी है तो सुरक्षाबलों की प्रतिक्रिया बहुत मजबूत होती है। इसी बात से हमें आत्मविश्वास मिलता है। हमें लगता है कि हालात पूरी तरह से नियंत्रण में हैं। डल झील और अन्य लोकप्रिय पर्यटन स्थलों पर पर्यटक अपनी रोजमर्रा की गतिविधियों में व्यस्त नजर आ रहे हैं।
गौरतलब है कि पर्यटन क्षेत्र से जुड़े स्थानीय लोगों का कहना है कि पर्यटकों में इस तरह का भरोसा इस क्षेत्र की अर्थव्यवस्था के लिए बहुत जरूरी है। पर्यटकों ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि यहां शांति बनी रहेगी और कश्मीर देश भर से आने वाले पर्यटकों के लिए हमेशा खुला और सुलभ रहेगा। “हम तो बस यहाँ शांति चाहते हैं। और हम यहां बार-बार आते रहेंगे।
सेना-बीएसएफ ने जम्मू-कश्मीर में एलओसी व आईबी पर बनाए रखा हाई अलर्ट
जम्मू कश्मीर में सुरक्षा व्यवस्था उतनी ही सतर्क है जितनी पिछले साल के ऑपरेशन सिंदूर के दौरान थी। एक अधिकारी ने कहा कि भारत-पाकिस्तान के बीच मौजूदा तनाव और सैन्य अभियान की वर्षगांठ के मद्देनजर अलर्ट बनाए रखा गया है। निगरानी या सैनिकों की तत्परता में कोई ढील नहीं दी गई है। सैनिक एलओसी पर कड़ी चौकसी बनाए हुए हैं और किसी भी स्थिति का तुरंत जवाब देने के लिए तैयार हैं।
उत्तरी कश्मीर के प्रमुख सेक्टरों, जिनमें गुरेज, उड़ी, करनाह, मछिल और तंगधार शामिल हैं, के साथ-साथ जम्मू क्षेत्र के कई अग्रिम इलाकों में भी निगरानी बढ़ा दी गई है। जम्मू में आईबी के साथ-साथ, बीएसफ के जवान इलेक्ट्रॉनिक निगरानी प्रणालियों की मदद से चौबीसों घंटे गश्त कर रहे हैं। अधिकारियों ने बताया कि सुरक्षाबलों ने उन्नत और ज्यादातर स्वदेशी तकनीकों की तैनाती के जरिए सीमा प्रबंधन को काफी मजबूत किया है। संवेदनशील इलाकों में किसी भी हलचल का पता लगाने और उस पर नजर रखने के लिए अवेक्षण सॉफ्टवेयर से जुड़े एआई-आधारित स्मार्ट फेंसिंग सिस्टम का इस्तेमाल किया जा रहा है जबकि टैक्टिकल एडवांस्ड इंटीग्रेटेड वेपन सिस्टम स्वचालित निगरानी और खतरों का तेजी से आकलन करने में मदद करता है।
इसके अलावा रोबोटिक मल्टी-यूटिलिटी लेग्ड इक्विपमेंट (म्यूल) प्लेटफॉर्म मुश्किल इलाकों, खासकर ऊंचे पहाड़ी सेक्टरों में सैनिकों की मदद कर रहे हैं। अधिकारियों ने बताया कि एंटी-ड्रोन गन, जैमिंग सिस्टम और हाई-रिज़ॉल्यूशन कैमरे व नाइट-विजन क्षमताओं से लैस निगरानी ड्रोन लगातार 24x7 निगरानी सुनिश्चित कर रहे हैं।
विज्ञापन
अमृतपाल सिंह बाली
श्रीनगर। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की वर्षगांठ के मौके पर विश्व प्रसिद्ध डल झील और अन्य पर्यटन स्थलों पर पर्यटक बेझिझक और बेखौफ घूमते दिखाई दिए। उन्होंने गर्व और आत्मविश्वास की भावना व्यक्त की। उन्होंने कहा, पर्यटकों ने बताया कि पिछले साल की घटनाओं से वे बिल्कुल भी नहीं डरे हैं। सुरक्षाबलों की त्वरित और प्रभावी प्रतिक्रिया ने कश्मीर आने के उनके इरादे को और मजबूत किया है।
इस बीच गुजरात से आए एक पर्यटकों के समूह से मुलाकात हुई तो उनका कहना था कि पहलगाम जैसी घटनाओं का हमारी सेना ने ऑपरेशन सिंदूर को अंजाम देकर पाकिस्तान को मुहतोड़ जवाब दिया था। हमें अपने जवानों पर पूरा भरोसा है जिसके चलते हमें घाटी आने से कोई रोक नहीं सकता। समूह के सदस्य अर्पण ने बताया कि पहलगाम जैसी घटना ने कुछ देर के लिए पर्यटन को प्रभावित किया था लेकिन घाटी में सुरक्षाबलों की तैनाती हमारे मनोबल को और बढ़ा देती है इसलिए ऐसी घटना के बाद भी हमें यहां आने से कोई नहीं रोक सका।
विज्ञापन
पर्यटक सुचारिता ने कहा कि जिस तरह से हालात को संभाला गया उस पर हमें गर्व महसूस होता है। हम बिना किसी डर के यहां आए हैं। उन्होंने आगे कहा कि कश्मीर सुरक्षित है और हम यहां आते रहेंगे।हम लोगों से भी अपील करते हैं कि यहां घूमने आएं क्योंकि न आने से वह (आतंकवादी) अपने मंसूबों में कामयाब होंगे क्योंकि वह चाहते हैं कि यहां अशांति का माहौल रहे और कोई यहां न आए।
विज्ञापन
बता दें कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ 7-8 मई, 2025 की रात को शुरू किया गया था। यह ऑपरेशन 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद शुरू किया गया था जिसमें 26 आम नागरिक जिनमें ज्यादातर पर्यटक थे मारे गए थे। इस ऑपरेशन के तहत नियंत्रण रेखा (एलओसी) और उसके पार स्थित कई आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया गया था।
मुंबई से आए रोहन ने कहा कि हमने यहां आने का प्लान बनाया और घूमने आ गए। शुरू में मन में कई सवाल उठे लेकिन ऑपरेशन सिंदूर के मुहतोड़ जवाब ने हमारे मनोबल को और मजबूत किया और हम यहां घूमने आ गए। हमारा मानना है कि ऐसी घटनाओं की वजह से लोगों को यात्रा करना नहीं छोड़ना चाहिए। यहां पूरी तरह से सुरक्षित माहौल है। सुंदर नजारे हैं और लोगों की मेहमाननवाजी बेमिसाल है।
कई पर्यटकों ने कहा कि वे कश्मीर में पर्यटन के लगातार जारी रहने को यहां के लोगों के लचीलेपन और हालात के सामान्य होने का प्रतीक मानते हैं। अगर कोई घटना होती भी है तो सुरक्षाबलों की प्रतिक्रिया बहुत मजबूत होती है। इसी बात से हमें आत्मविश्वास मिलता है। हमें लगता है कि हालात पूरी तरह से नियंत्रण में हैं। डल झील और अन्य लोकप्रिय पर्यटन स्थलों पर पर्यटक अपनी रोजमर्रा की गतिविधियों में व्यस्त नजर आ रहे हैं।
गौरतलब है कि पर्यटन क्षेत्र से जुड़े स्थानीय लोगों का कहना है कि पर्यटकों में इस तरह का भरोसा इस क्षेत्र की अर्थव्यवस्था के लिए बहुत जरूरी है। पर्यटकों ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि यहां शांति बनी रहेगी और कश्मीर देश भर से आने वाले पर्यटकों के लिए हमेशा खुला और सुलभ रहेगा। “हम तो बस यहाँ शांति चाहते हैं। और हम यहां बार-बार आते रहेंगे।
सेना-बीएसएफ ने जम्मू-कश्मीर में एलओसी व आईबी पर बनाए रखा हाई अलर्ट
जम्मू कश्मीर में सुरक्षा व्यवस्था उतनी ही सतर्क है जितनी पिछले साल के ऑपरेशन सिंदूर के दौरान थी। एक अधिकारी ने कहा कि भारत-पाकिस्तान के बीच मौजूदा तनाव और सैन्य अभियान की वर्षगांठ के मद्देनजर अलर्ट बनाए रखा गया है। निगरानी या सैनिकों की तत्परता में कोई ढील नहीं दी गई है। सैनिक एलओसी पर कड़ी चौकसी बनाए हुए हैं और किसी भी स्थिति का तुरंत जवाब देने के लिए तैयार हैं।
उत्तरी कश्मीर के प्रमुख सेक्टरों, जिनमें गुरेज, उड़ी, करनाह, मछिल और तंगधार शामिल हैं, के साथ-साथ जम्मू क्षेत्र के कई अग्रिम इलाकों में भी निगरानी बढ़ा दी गई है। जम्मू में आईबी के साथ-साथ, बीएसफ के जवान इलेक्ट्रॉनिक निगरानी प्रणालियों की मदद से चौबीसों घंटे गश्त कर रहे हैं। अधिकारियों ने बताया कि सुरक्षाबलों ने उन्नत और ज्यादातर स्वदेशी तकनीकों की तैनाती के जरिए सीमा प्रबंधन को काफी मजबूत किया है। संवेदनशील इलाकों में किसी भी हलचल का पता लगाने और उस पर नजर रखने के लिए अवेक्षण सॉफ्टवेयर से जुड़े एआई-आधारित स्मार्ट फेंसिंग सिस्टम का इस्तेमाल किया जा रहा है जबकि टैक्टिकल एडवांस्ड इंटीग्रेटेड वेपन सिस्टम स्वचालित निगरानी और खतरों का तेजी से आकलन करने में मदद करता है।
इसके अलावा रोबोटिक मल्टी-यूटिलिटी लेग्ड इक्विपमेंट (म्यूल) प्लेटफॉर्म मुश्किल इलाकों, खासकर ऊंचे पहाड़ी सेक्टरों में सैनिकों की मदद कर रहे हैं। अधिकारियों ने बताया कि एंटी-ड्रोन गन, जैमिंग सिस्टम और हाई-रिज़ॉल्यूशन कैमरे व नाइट-विजन क्षमताओं से लैस निगरानी ड्रोन लगातार 24x7 निगरानी सुनिश्चित कर रहे हैं।