J&K News: देवेंद्र के निधन पर उमर ने जताया अफसोस, 'अगर बीमारी का पता चलता तो रिश्तों को सुधारने की कोशिश करता'
सत्र के दौरान मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने देवेंद्र सिंह राणा के निधन पर अफसोस जताते हुए कहा कि अगर उन्हें उनकी बीमारी का पता चलता तो वे रिश्तों को सुधारने की कोशिश करते।
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जम्मू और कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने दिवंगत देवेंद्र सिंह राणा के बारे में अपनी भावनाएं व्यक्त करते हुए कहा कि यदि उन्हें उनके बीमारी के बारे में पहले पता चलता, तो वे रिश्तों को सुधारने की कोशिश करते। उन्होंने कहा, अगर मुझे आज तक किसी भी शख्स के जाने का अफसोस रहा है, तो वह देवेंद्र का है। अगर मुझे उनकी बीमारी का पता चलता तो शायद मैं रिश्तों को सुधारने की कोशिश करता। शायद ऊपर वाले को यह मंजूर न था।
उमर अब्दुल्ला ने यह बयान अपने पुराने दोस्त देवेंद्र के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए दिया। देवेंद्र एक वरिष्ठ राजनैतिक सहयोगी और उमर के करीबी मित्र थे, जिनका हाल ही में निधन हो गया। उमर ने अपने शब्दों में दुख और अफसोस जताया और उनके योगदान को याद करते हुए उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की। यह बयान उमर अब्दुल्ला के लिए एक व्यक्तिगत क्षति को दर्शाता है, जो अपने रिश्तों और मित्रता की अहमियत को समझते हैं।
विधानसभा में श्रद्धांजलि के दौरान उमर अब्दुल्ला की आवाज भावुक हो गई, जब उन्होंने राणा के साथ अपने सफर को याद किया। उन्होंने कहा, जब मैं नेशनल कॉन्फ्रेंस का अध्यक्ष बना तो देवेंद्र मेरे मीडिया सलाहकार थे। 2009 में जब मैं मुख्यमंत्री बना तो उन्होंने एक बार फिर सलाहकार की भूमिका निभाई। उनके समर्पण में कभी कोई कमी नहीं आई।
मुख्यमंत्री की आंखों में आंसू थे, जब उन्होंने राणा के पार्टी के प्रति निष्ठा और उनकी कठिन मेहनत को याद किया कभी कोई शिकायत नहीं की चाहे मंत्रालय में फेरबदल हो या उन्हें संगठनात्मक कार्य सौंपा गया हो। उनकी निष्ठा नेशनल कॉन्फ्रेंस के प्रति रही और उनकी मेहनत सबको दिखी।
उमर अब्दुल्ला ने विपक्षी बीजेपी बेंच की ओर इशारा करते हुए कहा, आप सभी ने देखा है जहां भी उन्हें भेजा गया हिमाचल प्रदेश, पंजाब या गुजरात उन्होंने उत्कृष्टता हासिल की। उन्होंने राणा की साधारण शुरुआत को भी याद किया, वह एक छोटे से मारुति सर्विस स्टेशन से शुरू हुए थे जहां उन्हें अक्सर मैकेनिक की वर्दी में देखा जाता था, गाड़ियों को साफ करते हुए। यही था देवेंद्र का असली रूप मेहनती और विनम्र, जिसने उन्हें एक सफल व्यवसायी बना दिया, लेकिन वह हमेशा साधारण बने रहे।
मुख्यमंत्री की आवाज तब टूट गई, जो उनके गहरे दुःख को दर्शा रही थी। मेरे 25-26 वर्षों के राजनीतिक जीवन में कई लोग आए और गए, लेकिन देवेंद्र सिंह राणा का जाना मेरे दिल पर गहरा असर छोड़ गया है। उन्होंने यह भी कहा, आज मुझे अफसोस है कि मुझे यह नहीं पता चला कि वह कितने बीमार थे यदि मुझे पता चलता तो मैं हमारे रिश्तों को सुधारने की कोशिश करता। दुर्भाग्यवश, वह अवसर कभी नहीं आया, और अब हम यहां उनकी श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए एकत्रित हुए हैं।