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जम्मू कश्मीर: भूमिहीनों को जमीन देने के विरोधी 50 हजार निर्दोष लोगों की मौत के लिए जिम्मेदार- उपराज्यपाल

Tue, 22 Aug 2023 03:14 PM IST
kumar गुलशन कुमार अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू Published by: kumar गुलशन कुमार Updated Tue, 22 Aug 2023 03:14 PM IST
सार

उपराज्यपाल ने कहा कि 2011 की जनगणना के अनुसार इस योजना के तहत पात्र लोगों को जमीन देने का निर्णय लिया गया था। हालांकि, जब गरीब लोगों को जमीन और घर मिलते हैं, तो परेशानी कुछ लोगों की आम प्रतिक्रिया होती है।

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lg manoj sinha said Opposers of giving land to landless responsible for death of 50 thousands
एलजी मनोज सिन्हा - फोटो : संवाद

विस्तार

उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने कहा कि प्रशासन द्वारा प्रदेश में शुरू की गई भूमि-से-भूमिहीन नीति का विरोध करने वाले लोग ही तीन दशकों में 50 हजार निर्दोष लोगों की मौत के लिए जिम्मेदार हैं। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत जम्मू-कश्मीर के लिए लगभग दो लाख घर स्वीकृत किए गए हैं, लेकिन इनमें से कई लाभार्थियों के पास घर बनाने के लिए जमीन नहीं है। यह बातें उन्होंने सुशासन के साथ मेरी पंचायत पर तीन दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए कही। 

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इस दौरान केंद्रीय ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री गिरिराज सिंह भी ऑनलाइन माध्यम से सम्मेलन में शामिल हुए। इस अवसर पर एक एकीकृत एम-गवर्नेंस प्लेटफॉर्म मेरी पंचायत ऐप भी लांच किया गया। उपराज्यपाल ने कहा कि 2011 की जनगणना के अनुसार इस योजना के तहत पात्र लोगों को जमीन देने का निर्णय लिया गया था। हालांकि, जब गरीब लोगों को जमीन और घर मिलते हैं, तो परेशानी कुछ लोगों की आम प्रतिक्रिया होती है। उन्होंने कहा कि कुछ नेताओं ने बयान दिया है कि गैर स्थानीय लोगों को जमीन दी गई है। 
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एलजी ने कहा, 'मैं यहां आए पंचायत सदस्यों से बस इतना पूछना चाहता हूं कि मुझे एक भी गैर स्थानीय व्यक्ति का नाम बताएं, जिसे जमीन दी गई हो। जो लोग ऐसे बयान दे रहे हैं, उनकी वजह से 50 हजार निर्दोष लोग मारे गए हैं।'
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उपराज्यपाल ने चार वर्षों में जम्मू-कश्मीर में हुए परिवर्तनों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि लोग पूछते हैं कि क्या बदल गया है? सड़कों पर हिंसा पूरी तरह से खत्म हो गई है। किसी की तानाशाही के कारण दुकानें, स्कूल और कॉलेज बंद नहीं हैं। लोगों को विश्वास नहीं था कि दिन के अंत में वे अपने घर वापस आएंगे, यह थी यहां स्थिति। लेकिन आज रेस्तरां रात 10 बजे तक खुले हैं और हम युवाओं को डल झील के पास आनंद लेते हुए देख सकते हैं। ये बदलाव हैं।

पंचायतों को आर्थिक समृद्धि का केंद्र बनाने का प्रस्ताव

उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने कहा कि हम पंचायतों को आर्थिक गतिविधियों और समृद्धि का केंद्र बनाने का प्रयास कर रहे हैं। लोगों की जरूरतों के मुताबिक विकास परियोजनाएं ली जा रही हैं। मेरी पंचायत एप जैसी पहल ग्रामीण भारत को सशक्त बनाने के लिए सुशासन और डिजिटल भारत का नया रूप है। 

उपराज्यपाल ने देश भर से आए पंचायत प्रतिनिधियों, हितधारकों और डोमेन विशेषज्ञों का जम्मू कश्मीर में स्वागत किया। उन्होंने कहा कि तीन दिनों में सतत विकास लक्ष्यों के स्थानीयकरण के साथ अनुकरणीय रणनीतियों, अभिसरण कार्यों और सर्वोत्तम प्रथाओं पर विचार-विमर्श पंचायत स्तर पर शासन को अधिक प्रभावी और कुशल बना देगा। 

उन्होंने कहा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ग्राम उदय से भारत उदय का दृष्टिकोण दिया है और देश की नियति को बदलने के लिए ग्रामीण क्षेत्रों की असीमित क्षमता और संभावनाओं को साकार करना हमारा ईमानदार प्रयास होना चाहिए।


उपराज्यपाल के मार्गदर्शन में जम्मू-कश्मीर में हुई सुशासन की शुरुआत- पाटिल

केंद्रीय पंचायती राज राज्य मंत्री कपिल पाटिल ने कहा कि सिन्हा के मार्गदर्शन में जम्मू-कश्मीर में सुशासन की शुरुआत हुई है। देश के सभी राज्यों से जनप्रतिनिधि मौजूद हैं। प्रधानमंत्री हमेशा कहते हैं कि अगर एक गांव विकसित होता है, तो देश विकसित होता है।

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