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भाईचारा और आस्था आतंकवाद पर भारी: 'धमकी घर छोड़ने पर मजबूर न कर सकती', कश्मीरी पंडित बोले-माहौल पूरी तरह बदला
Tue, 15 Sep 2026 03:11 PM IST
Sharukh Khan
अजीम यूसुफ, अमर उजाला नेटवर्क, श्रीनगर
अजीम यूसुफ, अमर उजाला नेटवर्क, श्रीनगर
Published by: Sharukh Khan
Updated Tue, 15 Sep 2026 03:11 PM IST
सार
श्रीनगर के सिद्धि विनायक मंदिर में गणेशोत्सव पर श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। इस दौरान कश्मीरी पंडित ने कहा कि घाटी में माहौल पूरी तरह बदल गया है। आस्था और भाईचारा आतंकवाद पर भारी है। धमकी घर छोड़ने पर मजबूर नहीं कर सकती।
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नन्नाजी और संजय टिक्कू
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
श्रीनगर के हब्बा कदल स्थित गणपत्यार के सिद्धि विनायक मंदिर में गणेश चतुर्थी के पावन अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु उमड़े। श्रद्धालुओं का मानना है कि अब घाटी में भाईचारा और आस्था आतंकवाद पर भारी है।
इस मौके पर जम्मू से विशेष रूप से आए गणेश मंदिर प्रबंधक समिति के महासचिव बीएल रैना ने कहा, घाटी में माहौल पूरी तरह बदल चुका है। वह पिछले 30 वर्ष से लगातार यहां आ रहे हैं। पहले के मुकाबले कश्मीर के हालात में जमीन-आसमान का बदलाव आया है।
अब माहौल बेहद अनुकूल और शांतिपूर्ण है। मंदिर के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व को रेखांकित करते हुए उन्होंने पुरानी यादें साझा कीं। उन्होंने कहा कि यह मंदिर हमेशा से एक बड़ा सांस्कृतिक और धार्मिक केंद्र रहा है।
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इस मौके पर जम्मू से विशेष रूप से आए गणेश मंदिर प्रबंधक समिति के महासचिव बीएल रैना ने कहा, घाटी में माहौल पूरी तरह बदल चुका है। वह पिछले 30 वर्ष से लगातार यहां आ रहे हैं। पहले के मुकाबले कश्मीर के हालात में जमीन-आसमान का बदलाव आया है।
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अब माहौल बेहद अनुकूल और शांतिपूर्ण है। मंदिर के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व को रेखांकित करते हुए उन्होंने पुरानी यादें साझा कीं। उन्होंने कहा कि यह मंदिर हमेशा से एक बड़ा सांस्कृतिक और धार्मिक केंद्र रहा है।
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विस्थापन से पहले भी जब वे यहां परिक्रमा करने आते थे तो उनके स्थानीय मुस्लिम मित्र भी पूरी आत्मीयता से परिक्रमा में शामिल होते थे। हाल में मिले धमकी भरे पोस्टरों को लेकर पूछे गए सवाल पर उन्होंने स्पष्ट किया कि ऐसे पोस्टरों और माहौल खराब करने की साजिशों का श्रद्धालुओं के मनोबल पर कोई असर नहीं पड़ा है। स्थानीय लोग और श्रद्धालु इन धमकियों को पूरी तरह नजरअंदाज कर रहे हैं।
कश्मीरी पंडितों के नाम पर राजनीति बंद हो: संजय टिक्कू
कश्मीरी पंडित संघर्ष समिति के अध्यक्ष संजय टिक्कू ने कश्मीरी पंडितों को मिले धमकी भरे पत्रों पर चिंता जताते हुए कहा कि यह सब 1990 के दौर की याद दिलाता है। साथ ही कहा कि यदि सियासी दलों को सच में पंडितों से प्रेम है, तो जगती टाउनशिप (जम्मू) से वापस पैतृक घरों में बसाने का कदम क्यों नहीं उठाते।
कश्मीरी पंडित संघर्ष समिति के अध्यक्ष संजय टिक्कू ने कश्मीरी पंडितों को मिले धमकी भरे पत्रों पर चिंता जताते हुए कहा कि यह सब 1990 के दौर की याद दिलाता है। साथ ही कहा कि यदि सियासी दलों को सच में पंडितों से प्रेम है, तो जगती टाउनशिप (जम्मू) से वापस पैतृक घरों में बसाने का कदम क्यों नहीं उठाते।
घाटी में माहौल पूरी तरह अनुकूल धमकियों से नहीं डरेंगे: नन्नाजी
कश्मीरी पंडित नन्नाजी ने घाटी की सदियों पुरानी कश्मीरियत और साझी संस्कृति को रेखांकित करते हुए कहा कि कश्मीरी पंडित और कश्मीरी मुसलमान का रिश्ता अटूट है। कश्मीरी पंडितों को धमकियों और सोशल मीडिया पर संवेदनशील जानकारियां लीक होने के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि माहौल बिगाड़ने की साजिश करने वालों की गीदड़ भभकियों से समाज डरने वाला नहीं है। यह हमारी जमीन है। कोई हमें यहां से बेदखल नहीं कर सकता।
कश्मीरी पंडित नन्नाजी ने घाटी की सदियों पुरानी कश्मीरियत और साझी संस्कृति को रेखांकित करते हुए कहा कि कश्मीरी पंडित और कश्मीरी मुसलमान का रिश्ता अटूट है। कश्मीरी पंडितों को धमकियों और सोशल मीडिया पर संवेदनशील जानकारियां लीक होने के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि माहौल बिगाड़ने की साजिश करने वालों की गीदड़ भभकियों से समाज डरने वाला नहीं है। यह हमारी जमीन है। कोई हमें यहां से बेदखल नहीं कर सकता।
गणेशजी के आशीर्वाद से माहौल में लौटा अपनापन: श्रद्धालु
गणपत्यार मोहल्ले में जन्मी और पली एक कश्मीरी पंडित महिला श्रद्धालु भी जम्मू से सिद्धिविनायक मंदिर पहुंची। उन्होंने बचपन की यादें और मंदिर से जुड़ी धार्मिक मान्यताओं को साझा किया। महिला का जन्म और पालन-पोषण इसी मोहल्ले में हुआ। मंदिर के पास ही उनका स्कूल हुआ करता था, जहां उन्होंने प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त की। बचपन में बुजुर्गों से यही सीखा कि स्कूल जाने या कोई शुभ कार्य करने से पहले गणेश मंदिर में मत्था टेकना अनिवार्य है।
गणपत्यार मोहल्ले में जन्मी और पली एक कश्मीरी पंडित महिला श्रद्धालु भी जम्मू से सिद्धिविनायक मंदिर पहुंची। उन्होंने बचपन की यादें और मंदिर से जुड़ी धार्मिक मान्यताओं को साझा किया। महिला का जन्म और पालन-पोषण इसी मोहल्ले में हुआ। मंदिर के पास ही उनका स्कूल हुआ करता था, जहां उन्होंने प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त की। बचपन में बुजुर्गों से यही सीखा कि स्कूल जाने या कोई शुभ कार्य करने से पहले गणेश मंदिर में मत्था टेकना अनिवार्य है।