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उज्ज में पानी हुआ कम, पर बाढ़ का खौफ अब भी बरकरार
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खेतों में अभी भरा है बाढ़ का पानी। - संवाद।
- फोटो : KATHUA
हीरानगर। उज्ज दरिया में वीरवार को आई बाढ़ से हुई तबाही के बाद भले ही दरिया में जलस्तर कम हो गया है, लेकिन इस तबाही का मंजर देखने वालों के दिलों से अभी भी इसका खौफ कम नहीं हुआ है। दरिया से सटे गांवों के लोग अभी भी सहमे हुए हैं। वीरवार को यह बाढ़ खंदवाल गांव के तीन घरों को अपने साथ बहा ले गई, अब गांव के अन्य लोगों में भी इसका डर बना हुआ है।
दरिया का रुख पूरी तरह से गांव की ओर मुड़ गया है, ऐसे में बहुत से घरों पर खतरा बना हुआ है। इस खतरे के डर से कुछ लोगों ने अपने घर का सामान निकाल कर दूसरे लोगों के घर रख दिया है। कुछ लोगों ने तो बच्चों को भी अपने रिश्तेदारों के यहां भेज दिया है। लोगों का कहना है कि प्रशासन के रवैये से ऐसा लगता है कि अब उन्हें अपनी जान खुद बचानी पड़ेगी। बता दें कि उज्ज दरिया में बाढ़ ने पांच दिनों में दो बार तांडव मचाया। जिससे घरों को नुकसान हुआ, कई कनाल भूमि बाढ़ में बह गई। लगी फसल को भी भारी नुकसान हुआ। इसके अलावा खेतों में लगी कई मोटरें भी पाइपों समेत बाढ़ में बह गयीं। हाल ही में पांच लाख की लागत से बनाए गए श्मशान घाट का शेड और चारदीवारी भी बाढ़ से ढह गई है।
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जिला उपायुक्त के न पहुंचने पर जताया रोष
कहा तीन साल से खट खटा रहे प्रशासन का दरवाजा, ग्रामीणों के बहने का इंतजार कर रहा प्रशासन
शुक्रवार को तहसीलदार और कुछ जिला अधिकारियों ने बाढ़ प्रभावित इलाके का दौरा किया। लेकिन जिला उपायुक्त का यहां न पहुंचने पर लोगों में भारी रोष देखने को मिला। लोगों ने कहा कि प्रशासन की लापरवाही से यह नुकसान हुआ है और गांव पर खतरा बना हुआ है। क्योंकि पिछले 3 वर्षों से यहां तटबंध बनाने की मांग कर रहे हैं लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। स्थानीय निवासी तरसेम लाल ने कहा कुछ दिन पहले जिला उपायुक्त से मिले थे और यहां तटबंध बनाने की मांग की, जिस पर उन्होंने साफ तौर पर कह दिया कि उनके पास पैसे नहीं है। वीरवार को बाढ़ ने गांव में भारी तबाही मचाई और तीन घरों को निगल लिया। लेकिन अफसोस की बात है कि यहां आम लोगों के हालात जानने के लिए जिला उपायुक्त ने समय नहीं निकला। नेक मोहम्मद ने कहा जिला उपायुक्त पानी तो नहीं रोक सकते थे लेकिन बाढ़ में प्रभावित हुए लोगों को राशन, टेंट जैसी सुविधा उपलब्ध करा सकते थे, जो उन्होंने नहीं करवाई। लोगों को अपने हाल पर छोड़ दिया गया, यह प्रशासन का गैर जिम्मेदाराना रवैया असहनीय है। ऐसा ही रवैया रहा तो मजबूरन लोगों को अपनी मांग को लेकर सड़कों पर आना पड़ेगा। सरपंच विनय शर्मा ने कहा हर साल बाढ़ में कई गांव प्रभावित होते हैं। इस साल दरिया का पूरा रुख इस गांव की ओर मुड़ गया, जिससे भारी तबाही हुई। जो स्थिति आज बनी है इस बारे में कई सालों से लोग प्रशासन को अवगत करा रहे हैं, लेकिन प्रशासन की ओर से इस पर कभी गंभीरता नहीं दिखाई दी गयी। आम लोगों को प्रशासन की लापरवाही का खामियाजा अपने घर जमीन खोकर भुगतना पड़ रहा है।
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ऐसे हालात में हिंदू-मुस्लिम बने एक दूसरे का सहारा
उज्ज दरिया में आई भीषण बाढ़ ने नहीं देखा कि हिंदू का घर है या मुसलमान की जमीन। जो सामने आया उसे बहा ले गई। जैसे बाढ़ ने किसी का धर्म नहीं देखा उसी तरह लोगों ने भी इससे निपटने के लिए कोई धर्म नहीं देखा। हिंदू-मुस्लिम एक दूसरे का सहारा बनकर इन परिस्थितियों से निकलने में कामयाब हुए।
गुज्जर समुदाय के मंगा दीन ने कहा कुछ महीने पहले ही पक्का मकान बनाया है। बाढ़ की वजह से इसके आगे से पूरी मिट्टी खिसक गई है और इसका बहने का डर बना हुआ है। घर का जो भी सामान है सारा समेटकर इसी गांव के एक हिंदू भाई के घर रखा हुआ है। सिर्फ इसी घर का सामान नहीं बल्कि हमारे समुदाय के अन्य लोगों का सामान भी गांव के हिंदुओं ने अपने घरों में रखवाया है। जिनका घर सामान इस बाढ़ में बह गया है, उसके रहने के लिए जगह और खाने के लिए राशन की सहायता भी इन्हीं भाइयों की ओर से की गई है। वहीं स्थानीय पंच देस राज ने कहा जब बाढ़ आई तो खेतों में लगी मोटरों को भी साथ बहाकर ले जाने लगी। ऐसे में गुज्जर समुदाय के लोगों ने जान जोखिम में डालकर हमारे साथ इन्हें बचाने का प्रयास किया। उनकी मदद से हम कुछ मोटरों को बचाने में सफल भी हुए।
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दरिया का रुख पूरी तरह से गांव की ओर मुड़ गया है, ऐसे में बहुत से घरों पर खतरा बना हुआ है। इस खतरे के डर से कुछ लोगों ने अपने घर का सामान निकाल कर दूसरे लोगों के घर रख दिया है। कुछ लोगों ने तो बच्चों को भी अपने रिश्तेदारों के यहां भेज दिया है। लोगों का कहना है कि प्रशासन के रवैये से ऐसा लगता है कि अब उन्हें अपनी जान खुद बचानी पड़ेगी। बता दें कि उज्ज दरिया में बाढ़ ने पांच दिनों में दो बार तांडव मचाया। जिससे घरों को नुकसान हुआ, कई कनाल भूमि बाढ़ में बह गई। लगी फसल को भी भारी नुकसान हुआ। इसके अलावा खेतों में लगी कई मोटरें भी पाइपों समेत बाढ़ में बह गयीं। हाल ही में पांच लाख की लागत से बनाए गए श्मशान घाट का शेड और चारदीवारी भी बाढ़ से ढह गई है।
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जिला उपायुक्त के न पहुंचने पर जताया रोष
कहा तीन साल से खट खटा रहे प्रशासन का दरवाजा, ग्रामीणों के बहने का इंतजार कर रहा प्रशासन
शुक्रवार को तहसीलदार और कुछ जिला अधिकारियों ने बाढ़ प्रभावित इलाके का दौरा किया। लेकिन जिला उपायुक्त का यहां न पहुंचने पर लोगों में भारी रोष देखने को मिला। लोगों ने कहा कि प्रशासन की लापरवाही से यह नुकसान हुआ है और गांव पर खतरा बना हुआ है। क्योंकि पिछले 3 वर्षों से यहां तटबंध बनाने की मांग कर रहे हैं लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। स्थानीय निवासी तरसेम लाल ने कहा कुछ दिन पहले जिला उपायुक्त से मिले थे और यहां तटबंध बनाने की मांग की, जिस पर उन्होंने साफ तौर पर कह दिया कि उनके पास पैसे नहीं है। वीरवार को बाढ़ ने गांव में भारी तबाही मचाई और तीन घरों को निगल लिया। लेकिन अफसोस की बात है कि यहां आम लोगों के हालात जानने के लिए जिला उपायुक्त ने समय नहीं निकला। नेक मोहम्मद ने कहा जिला उपायुक्त पानी तो नहीं रोक सकते थे लेकिन बाढ़ में प्रभावित हुए लोगों को राशन, टेंट जैसी सुविधा उपलब्ध करा सकते थे, जो उन्होंने नहीं करवाई। लोगों को अपने हाल पर छोड़ दिया गया, यह प्रशासन का गैर जिम्मेदाराना रवैया असहनीय है। ऐसा ही रवैया रहा तो मजबूरन लोगों को अपनी मांग को लेकर सड़कों पर आना पड़ेगा। सरपंच विनय शर्मा ने कहा हर साल बाढ़ में कई गांव प्रभावित होते हैं। इस साल दरिया का पूरा रुख इस गांव की ओर मुड़ गया, जिससे भारी तबाही हुई। जो स्थिति आज बनी है इस बारे में कई सालों से लोग प्रशासन को अवगत करा रहे हैं, लेकिन प्रशासन की ओर से इस पर कभी गंभीरता नहीं दिखाई दी गयी। आम लोगों को प्रशासन की लापरवाही का खामियाजा अपने घर जमीन खोकर भुगतना पड़ रहा है।
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ऐसे हालात में हिंदू-मुस्लिम बने एक दूसरे का सहारा
उज्ज दरिया में आई भीषण बाढ़ ने नहीं देखा कि हिंदू का घर है या मुसलमान की जमीन। जो सामने आया उसे बहा ले गई। जैसे बाढ़ ने किसी का धर्म नहीं देखा उसी तरह लोगों ने भी इससे निपटने के लिए कोई धर्म नहीं देखा। हिंदू-मुस्लिम एक दूसरे का सहारा बनकर इन परिस्थितियों से निकलने में कामयाब हुए।
गुज्जर समुदाय के मंगा दीन ने कहा कुछ महीने पहले ही पक्का मकान बनाया है। बाढ़ की वजह से इसके आगे से पूरी मिट्टी खिसक गई है और इसका बहने का डर बना हुआ है। घर का जो भी सामान है सारा समेटकर इसी गांव के एक हिंदू भाई के घर रखा हुआ है। सिर्फ इसी घर का सामान नहीं बल्कि हमारे समुदाय के अन्य लोगों का सामान भी गांव के हिंदुओं ने अपने घरों में रखवाया है। जिनका घर सामान इस बाढ़ में बह गया है, उसके रहने के लिए जगह और खाने के लिए राशन की सहायता भी इन्हीं भाइयों की ओर से की गई है। वहीं स्थानीय पंच देस राज ने कहा जब बाढ़ आई तो खेतों में लगी मोटरों को भी साथ बहाकर ले जाने लगी। ऐसे में गुज्जर समुदाय के लोगों ने जान जोखिम में डालकर हमारे साथ इन्हें बचाने का प्रयास किया। उनकी मदद से हम कुछ मोटरों को बचाने में सफल भी हुए।