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Kathua News: हीरानगर में बेखौफ ट्रांसफार्मर चोर गिरोह का आतंक
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हीरानगर। हीरानगर सब-डिवीजन में सक्रिय शातिर ट्रांसफार्मर चोर गिरोह ने पुलिस और बिजली विकास विभाग (पीडीडी) की नींद उड़ा दी है। ढल्ली पंचायत में हुई चोरी के महज 48 घंटे के भीतर मंगलवार देर रात चोरों ने हीरानगर मोड़ के मुख्य चौराहे के समीप लगे ट्रांसफार्मर को निशाना बनाकर सनसनी फैला दी।
जून माह से लेकर अब तक क्षेत्र में यह चौथी बड़ी वारदात है। विभाग के अनुसार लगातार हो रही इन वारदातों से सरकारी राजस्व को 6 लाख रुपये से अधिक का सीधा चूना लग चुका है, वहीं आम जनता को घंटों अघोषित बिजली कटौती झेलनी पड़ रही है।
विभागीय सूत्रों के अनुसार बुधवार रात करीब 12:30 से 1:00 बजे के बीच जब सड़कों पर सन्नाटा था, चोरों ने ट्रांसफार्मर को खंभे से नीचे उतारा। इसके बाद बड़ी ही सफाई से उसके नट-बोल्ट खोलकर भीतर मौजूद कीमती कॉपर (तांबे) की कॉयल, ट्रांसफार्मर ऑयल और अन्य सहायक पार्ट्स निकालकर ले गए। चोर मौके पर केवल लोहे का खाली खोल (कैबिनेट) छोड़कर फरार हो गए। जिस तेजी और सफाई से इस जटिल काम को अंजाम दिया गया, उससे स्पष्ट है कि गिरोह में विद्युत उपकरणों का तकनीकी जानकार या कोई ट्रेंड लाइनमैन शामिल है, जिसे हाई-वोल्टेज लाइनों और उपकरणों को डिस्मेंटल करने का पूरा अनुभव है।
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चार महीनों में सिलसिलेवार चार वारदातें
पीडीडी हीरानगर के सहायक अधिशासी अभियंता (एईई) राजेश कुमार अत्री ने बताया कि तहसील क्षेत्र में ट्रांसफार्मर चोरों का एक संगठित गिरोह काम कर रहा है। वार्ड नंबर-6 (हीरानगर) के ट्रांसफार्मर को जून महीने में चोरों ने निशाना बनाया। सल्लन के मुख्य मार्ग से सटे कृषि क्षेत्र में लगे ट्रांसफार्मर के आंतरिक कलपुर्जे चोरी हुए। दो दिन पूर्व ट्रांसफार्मर का कीमती तेल और कॉपर वाइंडिंग निकाली गई। अब हीरानगर मोड़ पर मंगलवार रात व्यस्त चौराहे के समीप वारदात को अंजाम देकर चुनौती दी गई। एईई राजेश कुमार अत्री ने स्पष्ट किया कि 63 या 100 केवीए के एक ट्रांसफार्मर के क्षतिग्रस्त होने या सामान चोरी होने पर विभाग को लगभग 1.5 लाख रुपये का सीधा नुकसान होता है। अब तक 4 ट्रांसफार्मर चोरी होने से 6 लाख रुपये से ज्यादा का नुकसान हो चुका है। इसके अलावा नए ट्रांसफार्मर की व्यवस्था करने, क्रेन और तकनीकी कर्मचारियों को तैनात करने और लाइन री-स्टोर करने में विभाग का अतिरिक्त बजट और समय बर्बाद हो रहा है।
रात्रि गश्त पर सवाल, कबाड़ी नेटवर्क पर भी संदेह
हीरानगर मोड़ जैसे व्यस्त इलाके में रात के समय ट्रांसफार्मर को खोलकर ले जाना पुलिस की रात्रि गश्त व्यवस्था पर सीधे तौर पर सवालिया निशान लगाता है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि पुलिस चेकिंग के अभाव में असामाजिक तत्व बेखौफ घूम रहे हैं। आशंका यह भी है कि चुराया गया तांबा और तेल स्थानीय या बाहरी कबाड़ियों को सस्ते दामों पर बेचा जा रहा है। पुलिस ने विभाग की तहरीर पर मामला दर्ज कर लिया है और हाईवे व आसपास की दुकानों पर लगे सीसीटीवी फुटेज खंगालने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
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जून माह से लेकर अब तक क्षेत्र में यह चौथी बड़ी वारदात है। विभाग के अनुसार लगातार हो रही इन वारदातों से सरकारी राजस्व को 6 लाख रुपये से अधिक का सीधा चूना लग चुका है, वहीं आम जनता को घंटों अघोषित बिजली कटौती झेलनी पड़ रही है।
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विभागीय सूत्रों के अनुसार बुधवार रात करीब 12:30 से 1:00 बजे के बीच जब सड़कों पर सन्नाटा था, चोरों ने ट्रांसफार्मर को खंभे से नीचे उतारा। इसके बाद बड़ी ही सफाई से उसके नट-बोल्ट खोलकर भीतर मौजूद कीमती कॉपर (तांबे) की कॉयल, ट्रांसफार्मर ऑयल और अन्य सहायक पार्ट्स निकालकर ले गए। चोर मौके पर केवल लोहे का खाली खोल (कैबिनेट) छोड़कर फरार हो गए। जिस तेजी और सफाई से इस जटिल काम को अंजाम दिया गया, उससे स्पष्ट है कि गिरोह में विद्युत उपकरणों का तकनीकी जानकार या कोई ट्रेंड लाइनमैन शामिल है, जिसे हाई-वोल्टेज लाइनों और उपकरणों को डिस्मेंटल करने का पूरा अनुभव है।
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चार महीनों में सिलसिलेवार चार वारदातें
पीडीडी हीरानगर के सहायक अधिशासी अभियंता (एईई) राजेश कुमार अत्री ने बताया कि तहसील क्षेत्र में ट्रांसफार्मर चोरों का एक संगठित गिरोह काम कर रहा है। वार्ड नंबर-6 (हीरानगर) के ट्रांसफार्मर को जून महीने में चोरों ने निशाना बनाया। सल्लन के मुख्य मार्ग से सटे कृषि क्षेत्र में लगे ट्रांसफार्मर के आंतरिक कलपुर्जे चोरी हुए। दो दिन पूर्व ट्रांसफार्मर का कीमती तेल और कॉपर वाइंडिंग निकाली गई। अब हीरानगर मोड़ पर मंगलवार रात व्यस्त चौराहे के समीप वारदात को अंजाम देकर चुनौती दी गई। एईई राजेश कुमार अत्री ने स्पष्ट किया कि 63 या 100 केवीए के एक ट्रांसफार्मर के क्षतिग्रस्त होने या सामान चोरी होने पर विभाग को लगभग 1.5 लाख रुपये का सीधा नुकसान होता है। अब तक 4 ट्रांसफार्मर चोरी होने से 6 लाख रुपये से ज्यादा का नुकसान हो चुका है। इसके अलावा नए ट्रांसफार्मर की व्यवस्था करने, क्रेन और तकनीकी कर्मचारियों को तैनात करने और लाइन री-स्टोर करने में विभाग का अतिरिक्त बजट और समय बर्बाद हो रहा है।
रात्रि गश्त पर सवाल, कबाड़ी नेटवर्क पर भी संदेह
हीरानगर मोड़ जैसे व्यस्त इलाके में रात के समय ट्रांसफार्मर को खोलकर ले जाना पुलिस की रात्रि गश्त व्यवस्था पर सीधे तौर पर सवालिया निशान लगाता है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि पुलिस चेकिंग के अभाव में असामाजिक तत्व बेखौफ घूम रहे हैं। आशंका यह भी है कि चुराया गया तांबा और तेल स्थानीय या बाहरी कबाड़ियों को सस्ते दामों पर बेचा जा रहा है। पुलिस ने विभाग की तहरीर पर मामला दर्ज कर लिया है और हाईवे व आसपास की दुकानों पर लगे सीसीटीवी फुटेज खंगालने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।