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Kathua News: दस साल से दर्द और टेढ़े घुटने से मरीज को मिली आजादी
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कठुआ। करीब दस वर्षों से घुटने के तेज दर्द, विकृति और चलने-फिरने में परेशानी झेल रहे मरीज के लिए राजकीय मेडिकल कॉलेज में सफल टोटल नी रिप्लेसमेंट सर्जरी उम्मीद की नई किरण बनकर सामने आई है। गंभीर रूप से विकृत घुटने के कारण मरीज को न केवल चलने में दिक्कत होती थी बल्कि वह सामान्य गतिविधियां जैसे नीचे बैठना और पालथी मारकर बैठना भी नहीं कर पाता था। यह जटिल सर्जरी आयुष्मान भारत योजना के तहत पूरी तरह निशुल्क की गई।
यह सर्जरी कॉलेज प्रधानाचार्य डॉ. सुरिंद्र कुमार अत्री के मार्गदर्शन और एसोसिएटेड अस्पताल के मेडिकल सुपरिंटेंडेंट डॉ. नीरज नागपाल की देखरेख में की गई। इसमें ऑर्थोपेडिक्स विभाग के एचओडी डॉ. ऋषभ गुप्ता के नेतृत्व में डॉ. गगनदीप सिंह, सीनियर रेजिडेंट्स डॉ. माधव, डॉ. वासु भारद्वाज और डॉ. नदीम की टीम ने ऑपरेशन को सफलतापूर्वक अंजाम दिया। बता दें कि मरीज पिछले करीब एक दशक से घुटने के दर्द और गंभीर विकृति से परेशान था। ऐसे जटिल मामले में चिकित्सकों ने टोटल नी रिप्लेसमेंट का विकल्प अपनाया। सर्जरी के दौरान यूएस एफडीए अप्रूव्ड हाई-फ्लेक्सन नी इंप्लांट का इस्तेमाल किया गया। चिकित्सकों के अनुसार इस प्रकार का इंप्लांट घुटने की बेहतर मूवमेंट और कार्यक्षमता में मदद करता है। सर्जरी के बाद मरीज की शुरुआती रिकवरी भी उत्साहजनक रही। चिकित्सकों के मुताबिक ऑपरेशन के अगले ही दिन मरीज बिना वॉकर या किसी अन्य बाहरी सहारे के खड़ा होकर चलने में सक्षम रहा। इसे सर्जिकल, एनेस्थीसिया, नर्सिंग और रिहैबिलिटेशन टीम के समन्वित प्रयास का परिणाम बताया गया। एनेस्थीसिया टीम में डॉ. संजय कलसोत्रा और डॉ. राजेश अंग्राल ने पेरीऑपरेटिव एनेस्थीसिया देखभाल और आवश्यक सहयोग प्रदान किया।
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बिना आर्थिक बोझ के मिली आधुनिक उपचार सुविधा
इस पूरी सर्जरी का खर्च आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत कवर किया गया, जिससे मरीज को आधुनिक ज्वाइंट रिप्लेसमेंट सर्जरी के लिए आर्थिक बोझ नहीं उठाना पड़ा। जीएसमी में हुई यह सर्जरी जिले और आसपास के क्षेत्रों के उन मरीजों के लिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है, जो गंभीर जोड़ों की बीमारी और चलने-फिरने से जुड़ी समस्याओं से जूझ रहे हैं। कॉलेज की ऑर्थोपेडिक्स टीम लगातार उन्नत और साक्ष्य-आधारित उपचार उपलब्ध कराने की दिशा में काम कर रही है।
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यह सर्जरी कॉलेज प्रधानाचार्य डॉ. सुरिंद्र कुमार अत्री के मार्गदर्शन और एसोसिएटेड अस्पताल के मेडिकल सुपरिंटेंडेंट डॉ. नीरज नागपाल की देखरेख में की गई। इसमें ऑर्थोपेडिक्स विभाग के एचओडी डॉ. ऋषभ गुप्ता के नेतृत्व में डॉ. गगनदीप सिंह, सीनियर रेजिडेंट्स डॉ. माधव, डॉ. वासु भारद्वाज और डॉ. नदीम की टीम ने ऑपरेशन को सफलतापूर्वक अंजाम दिया। बता दें कि मरीज पिछले करीब एक दशक से घुटने के दर्द और गंभीर विकृति से परेशान था। ऐसे जटिल मामले में चिकित्सकों ने टोटल नी रिप्लेसमेंट का विकल्प अपनाया। सर्जरी के दौरान यूएस एफडीए अप्रूव्ड हाई-फ्लेक्सन नी इंप्लांट का इस्तेमाल किया गया। चिकित्सकों के अनुसार इस प्रकार का इंप्लांट घुटने की बेहतर मूवमेंट और कार्यक्षमता में मदद करता है। सर्जरी के बाद मरीज की शुरुआती रिकवरी भी उत्साहजनक रही। चिकित्सकों के मुताबिक ऑपरेशन के अगले ही दिन मरीज बिना वॉकर या किसी अन्य बाहरी सहारे के खड़ा होकर चलने में सक्षम रहा। इसे सर्जिकल, एनेस्थीसिया, नर्सिंग और रिहैबिलिटेशन टीम के समन्वित प्रयास का परिणाम बताया गया। एनेस्थीसिया टीम में डॉ. संजय कलसोत्रा और डॉ. राजेश अंग्राल ने पेरीऑपरेटिव एनेस्थीसिया देखभाल और आवश्यक सहयोग प्रदान किया।
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बिना आर्थिक बोझ के मिली आधुनिक उपचार सुविधा
इस पूरी सर्जरी का खर्च आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत कवर किया गया, जिससे मरीज को आधुनिक ज्वाइंट रिप्लेसमेंट सर्जरी के लिए आर्थिक बोझ नहीं उठाना पड़ा। जीएसमी में हुई यह सर्जरी जिले और आसपास के क्षेत्रों के उन मरीजों के लिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है, जो गंभीर जोड़ों की बीमारी और चलने-फिरने से जुड़ी समस्याओं से जूझ रहे हैं। कॉलेज की ऑर्थोपेडिक्स टीम लगातार उन्नत और साक्ष्य-आधारित उपचार उपलब्ध कराने की दिशा में काम कर रही है।