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Kathua News: आतंकियों से लोहा लेते बलिदान हुए मंगल सिंह को दी श्रद्धांजलि
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शहीद बेटे की प्रतिमा से लिपटकर होती मां। - संवाद।
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- वर्ष 2002 में पुंछ में जेके राइफल के जवान ने 23 वर्ष की आयु में दी थी शहादत
संवाद न्यूज एजेंसी
हीरानगर। वर्ष 2002 में पुंछ में आतंकियों से लोहा लेते हुए देश के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले कंडी क्षेत्र के गांव लडोली के मंगल सिंह के बलिदान दिवस मनाया गया। गांव में उनके नाम से बने स्मारक पर कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जेके राइफल के जवान मंगल सिंह ने मात्र 23 वर्ष की आयु में देश की अखंडता के लिए शहादत का जाम पिया।
कार्यक्रम में विधायक राजीव जसरोटिया विशेष तौर पर मौजूद रहे। उन्होंने बलिदानी मंगल सिंह की प्रतिमा पर पुष्पमाला चढ़ाकर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि शहीद मंगल सिंह ने देश के लिए अपने प्राणों की आहुति देकर वीरता और बलिदान का जो आदर्श प्रस्तुत किया वह आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत रहेगा। निस्वार्थ भाव से देश की सेवा करना और उसके लिए अपने प्राणों की आहुति देना, सभी के सौभाग्य में नहीं होता।
एक्स सर्विसमैन वेलफेयर एसोसिएशन कठुआ के अध्यक्ष ज्ञान सिंह पठानिया ने कहा कि मात्र 23 वर्ष की उम्र में मंगल सिंह ने देश के लिए बलिदान देकर यह साबित किया कि उनके लिए घर, परिवार या कुछ और सुख सुविधाएं पहले नहीं थीं बल्कि देश पहले था। उनका बलिदान आज भी युवा पीढ़ी को प्रेरित करता है। ऐसे बहादुर जवानों की बदौलत ही आज किसी में इतनी हिम्मत नहीं कि मां भारती की तरफ आंख उठा कर देख सके। इस मौके पर एसोसिएशन के उपाध्यक्ष बलबीर सिंह जसरोटिया, साहब सिंह, पूर्व सरपंच कुलदीप सिंह, पूर्व सरपंच योगेश सिंह, विधायक की पत्नी अरुणा जसरोटिया आदि मौजूद रहे।
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दर्द न छिपा पाई मां, फूट-फूट कर रोई
समारोह के दौरान जब बलिदानी बेटे को मां श्रद्धांजलि देने लगी तो वह अपना दर्द नहीं छिपा पाई और प्रतिमा से लिपटकर फूट-फूट कर रोने लगी। कार्यक्रम में शहीद मंगल सिंह के पिता धर्म सिंह और माता कांता देवी दोनों मौजूद रहे। जैसे ही वह स्मारक पर पहुंचे दोनों की आंखें नम हो गईं। मां ने शहीद बेटे की प्रतिमा को फूलमाला पहनाई तो वह अपने आप को रोक नहीं पाई और प्रतिमा से लिपटकर रोने लगी। उन्हें देखकर उपस्थित सभी लोगों की आंखें नम हो गईं। मां ने कहा, आज बेटा जिंदा होता तो सेवानिवृत्त होकर अपने घर-परिवार में होता लेकिन भगवान को कुछ और ही मंजूर था। वहीं, पिता ने कहा कि बेटा खोने का दुख तो है लेकिन गर्व भी है कि उसने देश के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया और हमें भी शहीद के माता-पिता कहलाने का सौभाग्य प्राप्त हुआ।
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संवाद न्यूज एजेंसी
हीरानगर। वर्ष 2002 में पुंछ में आतंकियों से लोहा लेते हुए देश के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले कंडी क्षेत्र के गांव लडोली के मंगल सिंह के बलिदान दिवस मनाया गया। गांव में उनके नाम से बने स्मारक पर कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जेके राइफल के जवान मंगल सिंह ने मात्र 23 वर्ष की आयु में देश की अखंडता के लिए शहादत का जाम पिया।
कार्यक्रम में विधायक राजीव जसरोटिया विशेष तौर पर मौजूद रहे। उन्होंने बलिदानी मंगल सिंह की प्रतिमा पर पुष्पमाला चढ़ाकर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि शहीद मंगल सिंह ने देश के लिए अपने प्राणों की आहुति देकर वीरता और बलिदान का जो आदर्श प्रस्तुत किया वह आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत रहेगा। निस्वार्थ भाव से देश की सेवा करना और उसके लिए अपने प्राणों की आहुति देना, सभी के सौभाग्य में नहीं होता।
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एक्स सर्विसमैन वेलफेयर एसोसिएशन कठुआ के अध्यक्ष ज्ञान सिंह पठानिया ने कहा कि मात्र 23 वर्ष की उम्र में मंगल सिंह ने देश के लिए बलिदान देकर यह साबित किया कि उनके लिए घर, परिवार या कुछ और सुख सुविधाएं पहले नहीं थीं बल्कि देश पहले था। उनका बलिदान आज भी युवा पीढ़ी को प्रेरित करता है। ऐसे बहादुर जवानों की बदौलत ही आज किसी में इतनी हिम्मत नहीं कि मां भारती की तरफ आंख उठा कर देख सके। इस मौके पर एसोसिएशन के उपाध्यक्ष बलबीर सिंह जसरोटिया, साहब सिंह, पूर्व सरपंच कुलदीप सिंह, पूर्व सरपंच योगेश सिंह, विधायक की पत्नी अरुणा जसरोटिया आदि मौजूद रहे।
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दर्द न छिपा पाई मां, फूट-फूट कर रोई
समारोह के दौरान जब बलिदानी बेटे को मां श्रद्धांजलि देने लगी तो वह अपना दर्द नहीं छिपा पाई और प्रतिमा से लिपटकर फूट-फूट कर रोने लगी। कार्यक्रम में शहीद मंगल सिंह के पिता धर्म सिंह और माता कांता देवी दोनों मौजूद रहे। जैसे ही वह स्मारक पर पहुंचे दोनों की आंखें नम हो गईं। मां ने शहीद बेटे की प्रतिमा को फूलमाला पहनाई तो वह अपने आप को रोक नहीं पाई और प्रतिमा से लिपटकर रोने लगी। उन्हें देखकर उपस्थित सभी लोगों की आंखें नम हो गईं। मां ने कहा, आज बेटा जिंदा होता तो सेवानिवृत्त होकर अपने घर-परिवार में होता लेकिन भगवान को कुछ और ही मंजूर था। वहीं, पिता ने कहा कि बेटा खोने का दुख तो है लेकिन गर्व भी है कि उसने देश के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया और हमें भी शहीद के माता-पिता कहलाने का सौभाग्य प्राप्त हुआ।