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Una News: अनुसूचित जाति कल्याण समिति ने आयोग के त्रुटिपूर्ण गठन पर की चर्चा
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बोले- अनुसूचित जाति कल्याण की तीन रिट पिटीशन लंबित
विधानसभा के भीतर जाति सूचक शब्द बोलने की भर्त्सना
संवाद न्यूज एजेंसी
ऊना। एचपी डॉक्टर बीआर आंबेडकर मिशन अनुसूचित जाति कल्याण समिति के राज्य अध्यक्ष इंजीनियर एमआर दड़ोच ने कहा कि समिति की ओर से हाई कोर्ट शिमला में अनुसूचित जाति कल्याण के तीन रिट पिटीशन लंबित हैं। एक लोअर हिमाचल की लोहार जाति को अनुसूचित जाति की सूची से बाहर किया जाए, क्योंकि वह ओबीसी में आती है। दूसरा तरखान जाति का भी इसी तरह का रिट पिटीशन है। तीसरा सरकारी नौकरियों में बैक डोर प्रवेश का मामला है। इन पिटीशन को जल्द लगवाने की प्रार्थना हाईकोर्ट से की जाएगी। यह सामाजिक मामला है और दलित समाज को बहुत बड़ा नुकसान सैकड़ो वर्षों से हो रहा है। यहां जारी प्रेस बयान में कहा कि हाल ही में अनुसूचित जाति आयोग के त्रुटिपूर्ण गठन पर भी गहन विचार किया गया। इसकी शुद्धि के लिए भी कानूनी कदम उठाया जा रहा है। पिछले अरसे में जितने भी ज्ञापन दिए गए उन पर चर्चा हुई। इसमें जातिगत जनगणना, सब प्लान, वन मित्र, मल्टीपर्पस वर्कर्स शामिल हैं। अनुसूचित जाति का आरक्षण केंद्र ने 2005 से 15 प्रतिशत से 25 प्रतिशत करने का नोटिफिकेशन किया था, जो आज तक लागू नहीं किया गया। सुप्रीम कोर्ट ने फैसला किया है कि 45 दिन के ऊपर अगर सरकारी नौकरी किसी भी तरह से दी जाती है, तो वहां अनुसूचित जाति रिजर्वेशन रोस्टर लागू होगा। इन मुद्दों पर भी आगामी उचित कार्रवाई के लिए विचार विमर्श किया गया। हाल ही में जो हिमाचल प्रदेश विधानसभा के अंदर जाति सूचक शब्द बोले गए, उसकी भी जोरदार भर्त्सना की गई।
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विधानसभा के भीतर जाति सूचक शब्द बोलने की भर्त्सना
संवाद न्यूज एजेंसी
ऊना। एचपी डॉक्टर बीआर आंबेडकर मिशन अनुसूचित जाति कल्याण समिति के राज्य अध्यक्ष इंजीनियर एमआर दड़ोच ने कहा कि समिति की ओर से हाई कोर्ट शिमला में अनुसूचित जाति कल्याण के तीन रिट पिटीशन लंबित हैं। एक लोअर हिमाचल की लोहार जाति को अनुसूचित जाति की सूची से बाहर किया जाए, क्योंकि वह ओबीसी में आती है। दूसरा तरखान जाति का भी इसी तरह का रिट पिटीशन है। तीसरा सरकारी नौकरियों में बैक डोर प्रवेश का मामला है। इन पिटीशन को जल्द लगवाने की प्रार्थना हाईकोर्ट से की जाएगी। यह सामाजिक मामला है और दलित समाज को बहुत बड़ा नुकसान सैकड़ो वर्षों से हो रहा है। यहां जारी प्रेस बयान में कहा कि हाल ही में अनुसूचित जाति आयोग के त्रुटिपूर्ण गठन पर भी गहन विचार किया गया। इसकी शुद्धि के लिए भी कानूनी कदम उठाया जा रहा है। पिछले अरसे में जितने भी ज्ञापन दिए गए उन पर चर्चा हुई। इसमें जातिगत जनगणना, सब प्लान, वन मित्र, मल्टीपर्पस वर्कर्स शामिल हैं। अनुसूचित जाति का आरक्षण केंद्र ने 2005 से 15 प्रतिशत से 25 प्रतिशत करने का नोटिफिकेशन किया था, जो आज तक लागू नहीं किया गया। सुप्रीम कोर्ट ने फैसला किया है कि 45 दिन के ऊपर अगर सरकारी नौकरी किसी भी तरह से दी जाती है, तो वहां अनुसूचित जाति रिजर्वेशन रोस्टर लागू होगा। इन मुद्दों पर भी आगामी उचित कार्रवाई के लिए विचार विमर्श किया गया। हाल ही में जो हिमाचल प्रदेश विधानसभा के अंदर जाति सूचक शब्द बोले गए, उसकी भी जोरदार भर्त्सना की गई।