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Una News: संयुक्त जमीन पर चहारदीवारी से रास्ता रोकने का दावा खारिज
Wed, 23 Sep 2026 12:16 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
Updated Wed, 23 Sep 2026 12:16 AM IST
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वादी रास्ते की स्थिति और अवरोध साबित नहीं कर सका
ऊना कोर्ट ने खारिज किया स्थायी निषेधाज्ञा का वाद
संवाद न्यूज एजेंसी
दुलैहड़ (ऊना)। उपरला बडेहर में संयुक्त जमीन पर चहारदीवारी खड़ी कर रास्ता रोकने और आगे निर्माण पर रोक लगाने की मांग को लेकर दायर वाद को ऊना की अदालत ने खारिज कर दिया। अदालत ने पाया कि वादी कथित रास्ते की स्पष्ट स्थिति और चारदीवारी से रास्ता बाधित होने का ठोस साक्ष्य पेश नहीं कर सका। अदालत ने कहा कि केवल सह-हिस्सेदार होने के आधार पर दूसरे सह-हिस्सेदार को संयुक्त संपत्ति में निर्माण करने से नहीं रोका जा सकता। इसके लिए यह साबित करना जरूरी है कि निर्माण से दूसरे सह-हिस्सेदार के अधिकारों को वास्तविक नुकसान या प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।
वादी ने दावा किया था कि वह, प्रतिवादी और अन्य लोग संयुक्त भूमि के सह-हिस्सेदार हैं। भूमि पर संबंधित पक्षों के मकान बने हुए हैं। आरोप था कि प्रतिवादी ने गांव की सड़क से लगती संयुक्त जमीन पर चहारदीवारी खड़ी कर दी, जिससे उसके मकान तक आने-जाने का रास्ता बाधित हो गया। उसने चहारदीवारी हटाने और आगे निर्माण पर रोक लगाने की मांग की थी। वादी ने यह भी कहा कि अदालत ने मुकदमे के दौरान यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया था, इसके बावजूद चहारदीवारी खड़ी कर संयुक्त जमीन के हिस्से पर कब्जा किया गया।
प्रतिवादियों ने आरोपों से इनकार करते हुए कहा था कि सभी सह-हिस्सेदार लंबे समय से आपसी व्यवस्था के तहत अलग-अलग हिस्सों में काबिज हैं। चहारदीवारी मकान की सुरक्षा के लिए बनाई जा रही थी और इससे कोई रास्ता बाधित नहीं हो रहा था।
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अदालत ने पाया कि वादी ने जिस रास्ते को अवरुद्ध किए जाने को दावे का मुख्य आधार बनाया, उसकी सटीक स्थिति, लंबाई-चौड़ाई या स्थान का स्पष्ट विवरण नहीं दिया। साइट प्लान में भी कथित रास्ता दर्शाया नहीं गया था। वादी जिरह के दौरान यह साबित नहीं कर सका कि चहारदीवारी से उसके अधिकारों को वास्तविक नुकसान पहुंच रहा है।
अदालत ने हाईकोर्ट के पूर्व फैसलों का हवाला देते हुए स्थायी निषेधाज्ञा और वैकल्पिक रूप से मांगी गई अनिवार्य निषेधाज्ञा की मांग भी खारिज कर दी। दोनों पक्षों को अपना-अपना खर्च वहन करने के आदेश दिए गए।
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ऊना कोर्ट ने खारिज किया स्थायी निषेधाज्ञा का वाद
संवाद न्यूज एजेंसी
दुलैहड़ (ऊना)। उपरला बडेहर में संयुक्त जमीन पर चहारदीवारी खड़ी कर रास्ता रोकने और आगे निर्माण पर रोक लगाने की मांग को लेकर दायर वाद को ऊना की अदालत ने खारिज कर दिया। अदालत ने पाया कि वादी कथित रास्ते की स्पष्ट स्थिति और चारदीवारी से रास्ता बाधित होने का ठोस साक्ष्य पेश नहीं कर सका। अदालत ने कहा कि केवल सह-हिस्सेदार होने के आधार पर दूसरे सह-हिस्सेदार को संयुक्त संपत्ति में निर्माण करने से नहीं रोका जा सकता। इसके लिए यह साबित करना जरूरी है कि निर्माण से दूसरे सह-हिस्सेदार के अधिकारों को वास्तविक नुकसान या प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।
वादी ने दावा किया था कि वह, प्रतिवादी और अन्य लोग संयुक्त भूमि के सह-हिस्सेदार हैं। भूमि पर संबंधित पक्षों के मकान बने हुए हैं। आरोप था कि प्रतिवादी ने गांव की सड़क से लगती संयुक्त जमीन पर चहारदीवारी खड़ी कर दी, जिससे उसके मकान तक आने-जाने का रास्ता बाधित हो गया। उसने चहारदीवारी हटाने और आगे निर्माण पर रोक लगाने की मांग की थी। वादी ने यह भी कहा कि अदालत ने मुकदमे के दौरान यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया था, इसके बावजूद चहारदीवारी खड़ी कर संयुक्त जमीन के हिस्से पर कब्जा किया गया।
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प्रतिवादियों ने आरोपों से इनकार करते हुए कहा था कि सभी सह-हिस्सेदार लंबे समय से आपसी व्यवस्था के तहत अलग-अलग हिस्सों में काबिज हैं। चहारदीवारी मकान की सुरक्षा के लिए बनाई जा रही थी और इससे कोई रास्ता बाधित नहीं हो रहा था।
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अदालत ने पाया कि वादी ने जिस रास्ते को अवरुद्ध किए जाने को दावे का मुख्य आधार बनाया, उसकी सटीक स्थिति, लंबाई-चौड़ाई या स्थान का स्पष्ट विवरण नहीं दिया। साइट प्लान में भी कथित रास्ता दर्शाया नहीं गया था। वादी जिरह के दौरान यह साबित नहीं कर सका कि चहारदीवारी से उसके अधिकारों को वास्तविक नुकसान पहुंच रहा है।
अदालत ने हाईकोर्ट के पूर्व फैसलों का हवाला देते हुए स्थायी निषेधाज्ञा और वैकल्पिक रूप से मांगी गई अनिवार्य निषेधाज्ञा की मांग भी खारिज कर दी। दोनों पक्षों को अपना-अपना खर्च वहन करने के आदेश दिए गए।