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Solan News: जिले के स्कूलों में मिशन व्हाइट अंब्रेला ने पकड़ी रफ्तार, 100 स्कूलों ने तैयार की ढींगरी मशरूम
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अर्की के कोटलू स्कूल में ढींगेरी मशरूम के साथ विद्यार्थी व अन्य। स्रोत : स्कूल प्रबंधन
प्रदेश के सिर्फ जिला सोलन के स्कूलों में ही तैयार की जा रही मशरूम, तीन माह में ही हासिल की उपलब्धि
मिड-डे मील में परोस रहे मशरूम, क्लस्टर स्कूलों में भी की जा रही आवंटित
संवाद न्यूज एजेंसी
सोलन। जिला सोलन के सरकारी स्कूलों में मिशन व्हाइट अंब्रेला के तहत मशरूम उत्पादन अभियान ने जबरदस्त रफ्तार पकड़ ली है। महज तीन महीने के भीतर जिले के करीब 100 स्कूलों ने अपने परिसर में ढींगरी मशरूम तैयार करने की अनूठी उपलब्धि हासिल की है। पूरे प्रदेश में सोलन एकमात्र ऐसा जिला बन गया है, जहां के स्कूलों में छात्र खुद मशरूम उगा रहे हैं। इस सफलता को देखते हुए अब शिक्षा विभाग प्रदेश के अन्य जिलों के स्कूलों में भी इसे लागू करने की तैयारियां कर रहा है। स्कूलों में उगाई जा रही इस मशरूम को न केवल संबंधित स्कूलों के मिड-डे मील भोजन में शामिल किया जा रहा है, बल्कि इसे आसपास के क्लस्टर स्कूलों में भी आवंटित किया जा रहा है, ताकि अधिक से अधिक बच्चों को इसका लाभ मिल सके। इसी अभियान के तहत राजकीय प्राथमिक और राजकीय उच्च विद्यालय चामत भड़ेच के विद्यार्थियों ने ऑयस्टर मशरूम की सफल खेती कर लगभग 2 किलोग्राम मशरूम की कटाई की। विशेष बात यह रही कि मशरूम उगाने की पूरी वैज्ञानिक प्रक्रिया में विद्यार्थियों ने स्वयं भाग लिया और अपनी कड़ी मेहनत से इस पौष्टिक फसल को तैयार किया।
शिक्षिका के मार्गदर्शन में बच्चों ने सीखे कृषि के गुर
इस पूरी गतिविधि का संचालन और कुशल मार्गदर्शन विद्यालय की जेबीटी अध्यापिका बिंदु महाजन की ओर किया गया। उन्होंने मशरूम उत्पादन की शुरुआत से लेकर कटाई तक के प्रत्येक चरण में विद्यार्थियों का निरंतर मार्गदर्शन किया। बच्चों ने मशरूम बैग तैयार करने, उनमें नमी बनाए रखने, उनकी उचित देखभाल करने से लेकर फसल तैयार होने तक के सभी कार्यों को बड़े उत्साह के साथ सीखा और किया।
मिड-डे मील का स्वाद बढ़ा, सेहत भी सुधरेगी
जिला एमडीएम अधिकारी राजकुमार पराशर ने बताया कि स्कूल इस गतिविधि का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को किताबी ज्ञान से इतर पोषण, आधुनिक कृषि, पर्यावरण संरक्षण और आत्मनिर्भरता के प्रति जागरूक बनाना है। जब बच्चों ने अपने हाथों से उगाई फसल को अपने भोजन में देखा, तो उनके चेहरे की खुशी और गर्व देखने लायक था। जिले के अधिकतर स्कूलों में विद्यार्थी और अध्यापक मिलकर मशरूम तैयार कर रहे हैं।
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मिड-डे मील में परोस रहे मशरूम, क्लस्टर स्कूलों में भी की जा रही आवंटित
संवाद न्यूज एजेंसी
सोलन। जिला सोलन के सरकारी स्कूलों में मिशन व्हाइट अंब्रेला के तहत मशरूम उत्पादन अभियान ने जबरदस्त रफ्तार पकड़ ली है। महज तीन महीने के भीतर जिले के करीब 100 स्कूलों ने अपने परिसर में ढींगरी मशरूम तैयार करने की अनूठी उपलब्धि हासिल की है। पूरे प्रदेश में सोलन एकमात्र ऐसा जिला बन गया है, जहां के स्कूलों में छात्र खुद मशरूम उगा रहे हैं। इस सफलता को देखते हुए अब शिक्षा विभाग प्रदेश के अन्य जिलों के स्कूलों में भी इसे लागू करने की तैयारियां कर रहा है। स्कूलों में उगाई जा रही इस मशरूम को न केवल संबंधित स्कूलों के मिड-डे मील भोजन में शामिल किया जा रहा है, बल्कि इसे आसपास के क्लस्टर स्कूलों में भी आवंटित किया जा रहा है, ताकि अधिक से अधिक बच्चों को इसका लाभ मिल सके। इसी अभियान के तहत राजकीय प्राथमिक और राजकीय उच्च विद्यालय चामत भड़ेच के विद्यार्थियों ने ऑयस्टर मशरूम की सफल खेती कर लगभग 2 किलोग्राम मशरूम की कटाई की। विशेष बात यह रही कि मशरूम उगाने की पूरी वैज्ञानिक प्रक्रिया में विद्यार्थियों ने स्वयं भाग लिया और अपनी कड़ी मेहनत से इस पौष्टिक फसल को तैयार किया।
शिक्षिका के मार्गदर्शन में बच्चों ने सीखे कृषि के गुर
इस पूरी गतिविधि का संचालन और कुशल मार्गदर्शन विद्यालय की जेबीटी अध्यापिका बिंदु महाजन की ओर किया गया। उन्होंने मशरूम उत्पादन की शुरुआत से लेकर कटाई तक के प्रत्येक चरण में विद्यार्थियों का निरंतर मार्गदर्शन किया। बच्चों ने मशरूम बैग तैयार करने, उनमें नमी बनाए रखने, उनकी उचित देखभाल करने से लेकर फसल तैयार होने तक के सभी कार्यों को बड़े उत्साह के साथ सीखा और किया।
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मिड-डे मील का स्वाद बढ़ा, सेहत भी सुधरेगी
जिला एमडीएम अधिकारी राजकुमार पराशर ने बताया कि स्कूल इस गतिविधि का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को किताबी ज्ञान से इतर पोषण, आधुनिक कृषि, पर्यावरण संरक्षण और आत्मनिर्भरता के प्रति जागरूक बनाना है। जब बच्चों ने अपने हाथों से उगाई फसल को अपने भोजन में देखा, तो उनके चेहरे की खुशी और गर्व देखने लायक था। जिले के अधिकतर स्कूलों में विद्यार्थी और अध्यापक मिलकर मशरूम तैयार कर रहे हैं।
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