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Solan News: कुनिहार क्षेत्र में लंपी वायरस का प्रकोप, 120 पशु संक्रमित
Thu, 17 Sep 2026 12:54 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सोलन
संवाद न्यूज एजेंसी, सोलन
Updated Thu, 17 Sep 2026 12:54 AM IST
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आठ पशुओं की हो चुकी है मौत, 94 का उपचार है जारी
3500 पशुओं का हो चुका है कुनिहार क्षेत्र में टीकाकरण
संवाद न्यूज एजेंसी
कुनिहार(सोलन)। कुनिहार क्षेत्र में लंपी स्किन डिजीज (एलएसडी) का प्रकोप बढ़ता जा रहा है। कुनिहार पशु चिकित्सालय के तहत आने वाले जाबल जमरोट, कोठी, कुनिहार, बनोह, जाडली और मान क्षेत्रों में अब तक 120 पशुओं में संक्रमण की पुष्टि हुई है। इनमें से आठ पशुओं की मौत हो चुकी है, जबकि 94 पशुओं का उपचार जारी है। वहीं 18 पशु उपचार के बाद स्वस्थ हो चुके हैं।
पशु चिकित्सालय कुनिहार के अनुसार क्षेत्र में लंपी वायरस का पहला मामला 19 अगस्त को सामने आया था। इसके बाद करीब एक माह के भीतर संक्रमण के मामले बढ़े हैं। आंकड़ों के अनुसार कुनिहार में 51, कोठी में 31, जाबल जमरोट में 22, बनोह में 10, जाडली में पांच और मान में एक पशु संक्रमित पाया गया है।
पशु चिकित्सालय कुनिहार के तहत करीब 3600 गाय और भैंस पंजीकृत हैं। विभाग के अनुसार इनमें से करीब 3500 पशुओं का लंपी रोग से बचाव के लिए टीकाकरण किया जा चुका है। जिन पशुओं में बीमारी के सक्रिय लक्षण हैं, उनमें फिलहाल टीकाकरण नहीं किया जा रहा है। विभाग की ओर से स्वस्थ पशुओं का टीकाकरण करवाने पर जोर दिया जा रहा है।
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पशु चिकित्सक डॉ. रीता कौशल ने बताया कि लंपी वायरस से संक्रमित पशुओं में तेज बुखार, शरीर पर दो से पांच सेंटीमीटर तक की कठोर गांठें, आंख और नाक से पानी आना, दूध उत्पादन में कमी, पैरों में सूजन तथा खुर के आसपास सूजन जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। ऐसे लक्षण नजर आने पर पशु को तुरंत अन्य पशुओं से अलग कर देना चाहिए और नजदीकी पशु चिकित्सालय से संपर्क करना चाहिए।
विभाग ने पशुपालकों को सलाह दी है कि संक्रमित पशु के खाने-पीने के बर्तन अलग रखें और पशुशाला में साफ-सफाई का विशेष ध्यान दें। नया पशु खरीदने पर उसे सीधे अन्य पशुओं के साथ न रखें। संभव हो तो उसे कम से कम 25 दिन तक अलग रखकर निगरानी करें। पशुशाला में प्रवेश से पहले जूतों की सफाई और उचित कीटाणुनाशक का प्रयोग करने की भी सलाह दी गई है।
यदि किसी संक्रमित पशु की मौत हो जाती है तो उसके बचे हुए चारे और अन्य संक्रमित सामग्री को दूसरे पशुओं के संपर्क में न आने दें। ऐसी सामग्री का सुरक्षित निपटान पशु चिकित्सक की सलाह के अनुसार किया जाए, ताकि संक्रमण को फैलने से रोका जा सके।
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3500 पशुओं का हो चुका है कुनिहार क्षेत्र में टीकाकरण
संवाद न्यूज एजेंसी
कुनिहार(सोलन)। कुनिहार क्षेत्र में लंपी स्किन डिजीज (एलएसडी) का प्रकोप बढ़ता जा रहा है। कुनिहार पशु चिकित्सालय के तहत आने वाले जाबल जमरोट, कोठी, कुनिहार, बनोह, जाडली और मान क्षेत्रों में अब तक 120 पशुओं में संक्रमण की पुष्टि हुई है। इनमें से आठ पशुओं की मौत हो चुकी है, जबकि 94 पशुओं का उपचार जारी है। वहीं 18 पशु उपचार के बाद स्वस्थ हो चुके हैं।
पशु चिकित्सालय कुनिहार के अनुसार क्षेत्र में लंपी वायरस का पहला मामला 19 अगस्त को सामने आया था। इसके बाद करीब एक माह के भीतर संक्रमण के मामले बढ़े हैं। आंकड़ों के अनुसार कुनिहार में 51, कोठी में 31, जाबल जमरोट में 22, बनोह में 10, जाडली में पांच और मान में एक पशु संक्रमित पाया गया है।
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पशु चिकित्सालय कुनिहार के तहत करीब 3600 गाय और भैंस पंजीकृत हैं। विभाग के अनुसार इनमें से करीब 3500 पशुओं का लंपी रोग से बचाव के लिए टीकाकरण किया जा चुका है। जिन पशुओं में बीमारी के सक्रिय लक्षण हैं, उनमें फिलहाल टीकाकरण नहीं किया जा रहा है। विभाग की ओर से स्वस्थ पशुओं का टीकाकरण करवाने पर जोर दिया जा रहा है।
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पशु चिकित्सक डॉ. रीता कौशल ने बताया कि लंपी वायरस से संक्रमित पशुओं में तेज बुखार, शरीर पर दो से पांच सेंटीमीटर तक की कठोर गांठें, आंख और नाक से पानी आना, दूध उत्पादन में कमी, पैरों में सूजन तथा खुर के आसपास सूजन जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। ऐसे लक्षण नजर आने पर पशु को तुरंत अन्य पशुओं से अलग कर देना चाहिए और नजदीकी पशु चिकित्सालय से संपर्क करना चाहिए।
विभाग ने पशुपालकों को सलाह दी है कि संक्रमित पशु के खाने-पीने के बर्तन अलग रखें और पशुशाला में साफ-सफाई का विशेष ध्यान दें। नया पशु खरीदने पर उसे सीधे अन्य पशुओं के साथ न रखें। संभव हो तो उसे कम से कम 25 दिन तक अलग रखकर निगरानी करें। पशुशाला में प्रवेश से पहले जूतों की सफाई और उचित कीटाणुनाशक का प्रयोग करने की भी सलाह दी गई है।
यदि किसी संक्रमित पशु की मौत हो जाती है तो उसके बचे हुए चारे और अन्य संक्रमित सामग्री को दूसरे पशुओं के संपर्क में न आने दें। ऐसी सामग्री का सुरक्षित निपटान पशु चिकित्सक की सलाह के अनुसार किया जाए, ताकि संक्रमण को फैलने से रोका जा सके।