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घड़े और कुम्हार के समान है गुरु और शिष्य का प्रेम : रेणेंद्र मुनि
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गुरु पूर्णिमा पर्व पर शिष्यों को आशीर्वाद देते महामंडलेश्वर स्वामी दयानंद भारती।संवाद
सचित्र-
घड़े और कुम्हार के समान है गुरु और शिष्य का प्रेम : रेणेंद्र मुनि
रेणुकाजी में श्रद्धा और उल्लास पूर्वक मनाई गई गुरु पूर्णिमा
आश्रमों में पहुंचकर गुरु के चरणों में नतमस्तक हुए श्रद्धालु
संवाद न्यूज एजेंसी
ददाहू (सिरमौर)। गुरु-शिष्य के अटूट मिलन का प्रतीक गुरु (व्यास) पूर्णिमा का पर्व सोमवार को रेणुकाजी तीर्थ और आसपास के क्षेत्रों में बड़ी श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया।
इस मौके पर भक्तों ने अपने गुरु चरणों में नतमस्तक होकर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया। साथ ही रेणुका झील में स्नान करके पुण्य भी कमाया।
निर्वाण आश्रम में इस पर्व को अलग अंदाज में मनाया गया। यहां आश्रम के संस्थापक दिवंगत श्री श्री1008 महात्मा सुंदरमुनि निर्वाण की प्रतिमा पर जलाभिषेक और पुष्प वर्षा कर इस पर्व का श्रीगणेश किया गया।
आश्रम के संचालक और महंत महात्मा रेणेंद्र मुनि ने गुरु पूर्णिमा पर्व की बधाई देते हुए कहा कि गुरु शिष्य के संबंधों की परंपरा सदियों पुरानी है। गुरु और शिष्य का प्रेम कुम्हार व घड़े के समान है। शिष्य को गुरु के बताए मार्ग पर चलते हुए उनका सदा आदर करना चाहिए।
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गायत्री आश्रम रेणुकाजी में महामंडलेश्वर स्वामी दयानंद भारती ने भी जीवन में गुरु के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि गुरु ही वह शक्ति है जो अपने शिष्यों को अंधकार से प्रकाश की ओर खींचती है।
इसके अतिरिक्त संन्यास आश्रम में स्वामी दीन दयाल पुरी, गुरुस्थान बायरी में दिनेश ताश और धारटीधार क्षेत्र स्थित पावन तपोस्थली दिग्योण में महात्मा बालानंद ब्रह्मचारी सहित अन्य गुरु स्थानों में भी गुरु पूर्णिमा पर्व पर भक्तों ने शीश नवाया। यहां गुरुओं ने अपने शिष्यों को उपदेश देकर उनका मार्गदर्शन किया।
इस मौके पर प्रवचनों, भक्ति गीत और संगीत के साथ-साथ विशाल भंडारों का आयोजन भी किया गया। संवाद
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घड़े और कुम्हार के समान है गुरु और शिष्य का प्रेम : रेणेंद्र मुनि
रेणुकाजी में श्रद्धा और उल्लास पूर्वक मनाई गई गुरु पूर्णिमा
आश्रमों में पहुंचकर गुरु के चरणों में नतमस्तक हुए श्रद्धालु
संवाद न्यूज एजेंसी
ददाहू (सिरमौर)। गुरु-शिष्य के अटूट मिलन का प्रतीक गुरु (व्यास) पूर्णिमा का पर्व सोमवार को रेणुकाजी तीर्थ और आसपास के क्षेत्रों में बड़ी श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया।
इस मौके पर भक्तों ने अपने गुरु चरणों में नतमस्तक होकर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया। साथ ही रेणुका झील में स्नान करके पुण्य भी कमाया।
निर्वाण आश्रम में इस पर्व को अलग अंदाज में मनाया गया। यहां आश्रम के संस्थापक दिवंगत श्री श्री1008 महात्मा सुंदरमुनि निर्वाण की प्रतिमा पर जलाभिषेक और पुष्प वर्षा कर इस पर्व का श्रीगणेश किया गया।
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आश्रम के संचालक और महंत महात्मा रेणेंद्र मुनि ने गुरु पूर्णिमा पर्व की बधाई देते हुए कहा कि गुरु शिष्य के संबंधों की परंपरा सदियों पुरानी है। गुरु और शिष्य का प्रेम कुम्हार व घड़े के समान है। शिष्य को गुरु के बताए मार्ग पर चलते हुए उनका सदा आदर करना चाहिए।
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गायत्री आश्रम रेणुकाजी में महामंडलेश्वर स्वामी दयानंद भारती ने भी जीवन में गुरु के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि गुरु ही वह शक्ति है जो अपने शिष्यों को अंधकार से प्रकाश की ओर खींचती है।
इसके अतिरिक्त संन्यास आश्रम में स्वामी दीन दयाल पुरी, गुरुस्थान बायरी में दिनेश ताश और धारटीधार क्षेत्र स्थित पावन तपोस्थली दिग्योण में महात्मा बालानंद ब्रह्मचारी सहित अन्य गुरु स्थानों में भी गुरु पूर्णिमा पर्व पर भक्तों ने शीश नवाया। यहां गुरुओं ने अपने शिष्यों को उपदेश देकर उनका मार्गदर्शन किया।
इस मौके पर प्रवचनों, भक्ति गीत और संगीत के साथ-साथ विशाल भंडारों का आयोजन भी किया गया। संवाद

गुरु पूर्णिमा पर्व पर शिष्यों को आशीर्वाद देते महामंडलेश्वर स्वामी दयानंद भारती।संवाद

गुरु पूर्णिमा पर्व पर शिष्यों को आशीर्वाद देते महामंडलेश्वर स्वामी दयानंद भारती।संवाद

गुरु पूर्णिमा पर्व पर शिष्यों को आशीर्वाद देते महामंडलेश्वर स्वामी दयानंद भारती।संवाद