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175 रुपये प्रति किलो बिक रहा लहसुन, किसान मालामाल
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राजगढ़ (सिरमौर)। जिले के लहसुन उत्पादक मालामाल हो गए हैं। लहसुन के दाम 175 रुपये प्रति किलो पार गए हैं। जिससे किसानों को अच्छा खासा मुनाफा हो रहा है। किसानों को इस वर्ष कोरोना संकट के कारण लहसुन के दाम कम मिलने की उम्मीद थी। लेकिन चीन से लहसुन का आयात नहीं होने से इसके दाम आसमान छू रहे हैं। यही नहीं लहसुन में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के औषधीय गुणों के साथ-साथ विदेशों में इसका निर्यात होने से भी इसके दाम बढ़े हैं।
प्रगतिशील किसान सुरेंद्र तोमर, भगतराम, विजयसिंह, राकेश कुमार, खजान सिंह व तपेंद्र ने बताया कि पहली बार लहसुन के दाम 170 -180 रुपये प्रति किलो तक पहुंचे हैं। जबकि इससे पूर्व कभी भी इसके दाम 150 के पार नहीं गए थे। किसानों ने कहा कि अभी काफी मात्रा में लहसुन लोगों ने रोक रखा है। किसान दो सौ रुपये तक की उम्मीद लगाए हुए हैं। किसानों का कहना है कि पहली बार उन्हें इतने अधिक दाम लहसुन के मिले हैं। सब्जी मंडी के अध्यक्ष नरेंद्र ठाकुर ने बताया कि लहसुन का आयात चीन से न होने के कारण दाम बढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि दक्षिण भारत के लोग पहले ही औषधीय गुण होने पर लहसुन का प्रयोग करते है। इस बार कोरोना के चलते इसकी मांग बढ़ी है। उन्होंने बताया कि भले ही आजकल थोक के दाम अधिक नहीं है, लेकिन फिर भी व्यापारी लोग अपने जोखिम पर महंगी खरीद कर रहे हैं। लहसुन में औषधीय गुणों के बारे में सेवानिवृत्त उप मंडलीय आयुर्वेदिक चिकित्साधिकारी डा नवल किशोर डोगरा ने बताया कि लहसुन एंटीवायरल है और कोरोना वायरस की रोकथाम में सहायक है। उन्होंने सलाह दी कि लहसुन को छोटा छोटा काटकर खाली पेट पानी के साथ बिना चबाये निगलना चाहिए। यदि लगातार 21 दिनों तक इसका प्रयोग किया जाए तो पसीने से भी इसकी गंध आ जाती है। ऐसे व्यक्ति की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ जाती है और कोरोना असर नहीं कर सकता है।
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प्रगतिशील किसान सुरेंद्र तोमर, भगतराम, विजयसिंह, राकेश कुमार, खजान सिंह व तपेंद्र ने बताया कि पहली बार लहसुन के दाम 170 -180 रुपये प्रति किलो तक पहुंचे हैं। जबकि इससे पूर्व कभी भी इसके दाम 150 के पार नहीं गए थे। किसानों ने कहा कि अभी काफी मात्रा में लहसुन लोगों ने रोक रखा है। किसान दो सौ रुपये तक की उम्मीद लगाए हुए हैं। किसानों का कहना है कि पहली बार उन्हें इतने अधिक दाम लहसुन के मिले हैं। सब्जी मंडी के अध्यक्ष नरेंद्र ठाकुर ने बताया कि लहसुन का आयात चीन से न होने के कारण दाम बढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि दक्षिण भारत के लोग पहले ही औषधीय गुण होने पर लहसुन का प्रयोग करते है। इस बार कोरोना के चलते इसकी मांग बढ़ी है। उन्होंने बताया कि भले ही आजकल थोक के दाम अधिक नहीं है, लेकिन फिर भी व्यापारी लोग अपने जोखिम पर महंगी खरीद कर रहे हैं। लहसुन में औषधीय गुणों के बारे में सेवानिवृत्त उप मंडलीय आयुर्वेदिक चिकित्साधिकारी डा नवल किशोर डोगरा ने बताया कि लहसुन एंटीवायरल है और कोरोना वायरस की रोकथाम में सहायक है। उन्होंने सलाह दी कि लहसुन को छोटा छोटा काटकर खाली पेट पानी के साथ बिना चबाये निगलना चाहिए। यदि लगातार 21 दिनों तक इसका प्रयोग किया जाए तो पसीने से भी इसकी गंध आ जाती है। ऐसे व्यक्ति की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ जाती है और कोरोना असर नहीं कर सकता है।
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