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Sirmour News: नशीले पदार्थों का अवैध कारोबार युवाओं की बर्बादी, अपराधों को सख्ती से दबाना जरूरी
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चिट्टा तस्करी मामले में विशेष न्यायाधीश की टिप्पणी, उत्तराखंड के आरोपी की जमानत याचिका तीसरी बार खारिज
अदालत ने कहा-समाजहित सर्वोपरि, एनडीपीएस मामलों में बेल नियम, जेल अपवाद का सिद्धांत स्वतः नहीं होता लागू
दीपक मेहता
नाहन (सिरमौर)। जिले में चिट्टा (हेरोइन) तस्करी के एक मामले में अदालत ने सख्त टिप्पणी की कि नशीले पदार्थों का अवैध कारोबार युवाओं को बर्बादी की ओर ले जा रहा है। ऐसे अपराधों को सख्ती से दबाना जरूरी है। विशेष न्यायाधीश कपिल शर्मा ने देहरादून के विकासनगर निवासी मंसूर अली को जमानत देने से इन्कार कर दिया। अदालत ने कहा कि नशीले पदार्थों से जुड़े अपराध समाज के लिए गंभीर खतरा हैं और ऐसे मामलों में नरमी नहीं बरती जा सकती। आरोपी करीब एक साल से जेल में है और उसकी जमानत तीसरी बार अदालत से खारिज हुई है।
यह मामला 18 जनवरी 2025 को पुरुवाला थाना क्षेत्र में पंजीकृत है। अभियोजन पक्ष ने दलील दी कि आरोपी के कब्जे से 12.5 ग्राम चिट्टा बरामद हुआ था और वह पहले भी इसी तरह के मामलों में संलिप्त रहा है। ऐसे में उसे जमानत देना समाज के हित में नहीं होगा। इससे पहले भी आरोपी की जमानत याचिकाएं निचली अदालत और उच्च न्यायालय की ओर से खारिज की जा चुकी हैं।
न्यायालय ने यह भी माना कि आरोपी के खिलाफ प्रथम दृष्टया पर्याप्त साक्ष्य मौजूद हैं। यदि जमानत दी जाती है तो उसके दोबारा ऐसे अपराधों में शामिल होने की आशंका से इन्कार नहीं किया जा सकता। अदालत ने सुप्रीम कोर्ट और हिमाचल हाईकोर्ट के पूर्व निर्णयों का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि एनडीपीएस एक्ट के मामलों में बेल नियम, जेल अपवाद का सिद्धांत स्वतः लागू नहीं होता। इन सभी तथ्यों को ध्यान में रखते हुए अदालत ने आरोपी की जमानत याचिका को खारिज कर दिया। हालांकि अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि इस आदेश का असर मामले की अंतिम सुनवाई पर नहीं पड़ेगा।
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अदालत ने कहा-समाजहित सर्वोपरि, एनडीपीएस मामलों में बेल नियम, जेल अपवाद का सिद्धांत स्वतः नहीं होता लागू
दीपक मेहता
नाहन (सिरमौर)। जिले में चिट्टा (हेरोइन) तस्करी के एक मामले में अदालत ने सख्त टिप्पणी की कि नशीले पदार्थों का अवैध कारोबार युवाओं को बर्बादी की ओर ले जा रहा है। ऐसे अपराधों को सख्ती से दबाना जरूरी है। विशेष न्यायाधीश कपिल शर्मा ने देहरादून के विकासनगर निवासी मंसूर अली को जमानत देने से इन्कार कर दिया। अदालत ने कहा कि नशीले पदार्थों से जुड़े अपराध समाज के लिए गंभीर खतरा हैं और ऐसे मामलों में नरमी नहीं बरती जा सकती। आरोपी करीब एक साल से जेल में है और उसकी जमानत तीसरी बार अदालत से खारिज हुई है।
यह मामला 18 जनवरी 2025 को पुरुवाला थाना क्षेत्र में पंजीकृत है। अभियोजन पक्ष ने दलील दी कि आरोपी के कब्जे से 12.5 ग्राम चिट्टा बरामद हुआ था और वह पहले भी इसी तरह के मामलों में संलिप्त रहा है। ऐसे में उसे जमानत देना समाज के हित में नहीं होगा। इससे पहले भी आरोपी की जमानत याचिकाएं निचली अदालत और उच्च न्यायालय की ओर से खारिज की जा चुकी हैं।
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न्यायालय ने यह भी माना कि आरोपी के खिलाफ प्रथम दृष्टया पर्याप्त साक्ष्य मौजूद हैं। यदि जमानत दी जाती है तो उसके दोबारा ऐसे अपराधों में शामिल होने की आशंका से इन्कार नहीं किया जा सकता। अदालत ने सुप्रीम कोर्ट और हिमाचल हाईकोर्ट के पूर्व निर्णयों का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि एनडीपीएस एक्ट के मामलों में बेल नियम, जेल अपवाद का सिद्धांत स्वतः लागू नहीं होता। इन सभी तथ्यों को ध्यान में रखते हुए अदालत ने आरोपी की जमानत याचिका को खारिज कर दिया। हालांकि अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि इस आदेश का असर मामले की अंतिम सुनवाई पर नहीं पड़ेगा।
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