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Sirmour News: जिले के जर्जर स्कूल भवनों को मजबूत करने की तैयारी

Sun, 06 Sep 2026 11:55 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Sun, 06 Sep 2026 11:55 PM IST
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Preparations underway to strengthen the district's dilapidated school buildings.
आपदा की दृष्टि से संवेदनशील आरसीसी स्कूल भवनों की 10 तक मांगी रिपोर्ट
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उपनिदेशक ने ब्लॉक अधिकारियों को दिए निर्देश
पिलर, बीम और दीवारों की स्थिति के साथ तकनीकी दोष और जर्जरता का होगा आकलन
लोक निर्माण विभाग के पुराने निरीक्षण की रिपोर्ट भी मांगी, फील्ड में जाकर सत्यापन के निर्देश
जुटाए डेटा से तय होगा किस स्कूल भवन की पहले मरम्मत और रेट्रोफिटिंग होगी

पंकज तन्हा

नाहन (सिरमौर)। जिले के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों की सुरक्षा और उन्हें बेहतर माहौल देने के लिए शिक्षा विभाग ने पहल शुरू की है। जिले में भूकंप या अन्य प्राकृतिक आपदाओं की दृष्टि से संवेदनशील और जर्जर हो चुके आरसीसी स्कूल भवनों की सूरत बदलने की तैयारी है। विभाग ने इन भवनों की मरम्मत और ढांचागत सुदृढ़ीकरण (रेट्रोफिटिंग) के लिए मिशन मोड पर काम शुरू कर दिया है।
उपनिदेशक (गुणवत्ता शिक्षा) कार्यालय की ओर से जिले के सभी ब्लॉक प्रोजेक्ट अधिकारियों, ब्लॉक प्रारंभिक शिक्षा अधिकारियों और कनिष्ठ अभियंताओं को इस संबंध में दिशा-निर्देश जारी किए हैं। हिमाचल प्रदेश आपदा पुनर्प्राप्ति परियोजना के तहत तैयार की जाने वाली प्राथमिकता सूची के लिए विभाग ने 10 सितंबर तक पूरी रिपोर्ट तलब की है। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए इसे अत्यंत महत्वपूर्ण श्रेणी में रखा गया है।
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इसके तहत अधिकारियों को स्कूलों से भवनों से जुड़ी सटीक जानकारी जुटाकर सत्यापन करना होगा। इसमें स्कूल, भवन या उपलब्ध नागरिक सुविधा का नाम, स्कूल की सटीक लोकेशन, संबंधित तहसील, भवन का संचालन करने वाला नियंत्रक विभाग, निर्माण वर्ष और मंजिलों की संख्या शामिल है। इसके अलावा पिलर, बीम और दीवारों की स्थिति, तकनीकी दोष तथा जर्जरता के स्तर के आधार पर तय की जाने वाली प्राथमिकता रैंक की जानकारी भी देनी होगी।
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विभाग ने यह भी जानकारी मांगी है कि भवन का लोक निर्माण विभाग की ओर से पहले कोई निरीक्षण किया है या नहीं। यदि निरीक्षण रिपोर्ट उपलब्ध है तो उसका ब्योरा भी रिपोर्ट में शामिल करना होगा। विभाग ने स्पष्ट हिदायत दी है कि रिपोर्ट पूरी तरह सत्यापित, सटीक और त्रुटिहीन होनी चाहिए। इसके लिए अधिकारियों को स्वयं फील्ड में जाकर या संबंधित स्कूलों से समन्वय कर निर्धारित प्रारूप (एनेक्सचर-1) में डेटा जुटाने के निर्देश दिए गए हैं।

इसी डेटा के आधार पर तय किया जाएगा कि किन स्कूलों के भवनों की मरम्मत और रेट्रोफिटिंग प्राथमिकता के आधार पर की जानी है और किस स्कूल के लिए पहले बजट जारी होगा। संवाद
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