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प्रदेश के सबसे बड़े और पहले भेड़ फार्म की स्थिति बनी दयनीय

Wed, 21 Feb 2018 07:48 PM IST
Updated Wed, 21 Feb 2018 07:48 PM IST
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ग्राउंड रिपोर्ट
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दीवारें, खिड़कियां टूटी-फूटीं, भवनों में लगाई तिरपाल
ज्यूरी में प्रदेश के सबसे पुराने करोड़ों से बने भेड़ प्रजनन केंद्र में कर्मचारी सुरक्षित नहीं
3500 बीघा क्षेत्रफल में फैला है भेड़ फार्म
मोहन मेहता
ज्यूरी (रामपुर बुशहर)।
केंद्र और प्रदेश सरकारों के पशु पालन को बढ़ावा देने के बड़े-बड़े दावों की सूबे के पहले और सबसे बड़े ज्यूरी भेड़ फार्म में हवा निकाल रही है। ज्यूरी में प्रदेश सरकार ने वर्ष 1964 में करीब 3500 बीघा क्षेत्रफल (700 एकड़) पर करोड़ों की लागत से भेड़ प्रजनन केंद्र खोल था। इसके लिए बनाए गए करीब एक दर्जन भवनों की सुध लेने वाला कोई नहीं है। कर्मचारियों की कमरों की हालत ऐसी है कि कभी भी हादसा हो सकता है। दीवारें टूटी फूटी हैं और भवन की मरम्मत न होने से तिरपाल लगा दी है। सर्दी और बारिश में रहना किसी मुसीबत से कम नहीं है। कई बार तो कर्मचारी रात को आराम से सो भी नहीं सकते हैं।
साठ के दशक में यहां बने पशु पालन विभाग के आलीशान रेस्टहाउस, आरओ निवास और स्टाफ के लिए बने रिहायशी भवनों की स्थिति आज इतनी बदतर बन कई है कि ये भवन कभी भी गिर सकते हैं। सरकार और पशु पालन विभाग की अनदेखी के चलते यहां कभी भी कोई हादसा पेश आ सकता है। वर्तमान समय में भेड़ फार्म के कर्मचारियों को जर्जर हालत वाले इन भवनों में रहने को मजबूर होना पड़ रहा है। भवन की दीवारों में जगह-जगह दरारें पड़ गई है, वहीं इनकी छत कभी भी कर्मचारियों के ऊपर गिर सकती है। इन भवनों की समय पर मरम्मत न होने से कहीं छत पर तिरपाल लगी है, तो कहीं पर दरवाजे, खिड़कियों के खस्ताहाल होने से जीव जंतु कमरे में दाखिल हो जाते हैं। ज्यूरी पंचायत को ओडीएफ पंचायत घोषित किया गया है। लेकिन पशु पालन विभाग के कर्मचारियों को विभाग ने शौचालय तक नहीं बनवाए हैं।
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केंद्र में विदेशी नस्ल की भेड़ों का होता है प्रजनन
इस भेड़ फार्म में उन्नत विदेशी नस्ल के रेम्बुले एफ. 1 और एफ. 2 की करीब 700 भेड़ें हैं। यहां पर इन भेड़ों का प्रजनन केंद्र बनाया गया है और हर वर्ष यहां से सैकड़ों मैमनों को दूसरे फार्मों में भेजा जाता है। इसके अलावा यहां भेड़ पालकों को नस्ल सुधारने के लिए भी मैमनों को बेचा जाता है।
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कर्मचारियों के लिए शौचालय नहीं
ज्यूरी भेड़ फार्म में भेड़ें चराने के लिए शेफर्ड के 19 पदों में से आठ पद खाली पड़े हैं। यहां पर तैनात शेफर्ड, फार्मासिस्ट और दूसरे स्टाफ को रहने के लिए पर्याप्त और सुरक्षित क्वार्टर तक नहीं है। यहां क्लास फोर के कर्मचारियों के लिए शौचालय तक ही सुविधा नहीं है।


पत्राचार से किया अधिकारियों को सूचित
भेड़ प्रजनन केंद्र ज्यूरी के सहायक निदेशक दीपक कुमार ने बताया कि सभी भवनों की मरम्मत के लिए पत्राचार से उच्चाधिकारियों को सूचित किया गया है। चौकीदार और बजट न होने से रेस्ट हाउस मेंटेन नहीं हो पाया है। सभी कर्मचारियों के क्वार्टर और दूसरे भवनों की मरम्मत के लिए भी बजट की मांग की गई है।
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