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Mandi News: दुकान खाली करवाने के मामले में एमसी को राहत, स्टे आर्डर रद्द
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मंडी। जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत ने नगर निगम मंडी की अपील को स्वीकार करते हुए निचली अदालत की ओर से व्यापारी तरुण टंडन के पक्ष में जारी अस्थायी रोक (स्टे ऑर्डर) को रद्द कर दिया है। यह मामला दुकान खाली करवाने से जुड़ा हुआ है।
तरुण टंडन वर्ष 1992 से अस्पताल रोड मंडी में स्थित एक दुकान चला रहे हैं। यह दुकान उन्हें नगर परिषद मंडी की ओर से नीलामी के माध्यम से किराये पर दी गई थी। शुरू में किराया करीब 1400 रुपये प्रतिमाह तय किया गया था, जिसे वर्ष 1999 में नगर परिषद ने एक प्रस्ताव के जरिए घटाकर 730 रुपये कर दिया।
बाद में शहरी विकास निदेशालय ने इस प्रस्ताव को रद्द कर दिया और पुराने किराए की मांग की गई। इस पर विवाद बढ़ गया। नगर निगम ने सड़क चौड़ीकरण योजना के तहत वर्ष 2018 में तरुण टंडन को दुकान खाली करने का नोटिस जारी किया। इसके विरोध में उन्होंने अदालत का दरवाजा खटखटाया और निचली अदालत से स्टे ले लिया।
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इस पर नगर निगम मंडी ने इस स्टे ऑर्डर के खिलाफ जिला अदालत में अपील दायर की। जिला अदालत ने नगर निगम की दलील को सही मानते हुए कहा कि चूंकि यह मामला सरकारी जमीन से जुड़ा है। मामला पहले से ही सक्षम अधिकारी और फिर डिवीजनल कमिश्नर के समक्ष अपील में लंबित है, तो सिविल अदालत का हस्तक्षेप कानूनन उचित नहीं है। अदालत ने निचली अदालत का स्टे ऑर्डर रद्द करते हुए कहा कि तरुण टंडन यदि चाहें तो अपील की प्रक्रिया में उच्च अधिकारी के सामने अपनी बात रख सकते हैं। न्यायालय ने साफ किया है कि यह निर्णय केवल स्टे से संबंधित है और वाद की अंतिम सुनवाई पर इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। दोनों पक्षों को अगली सुनवाई के लिए 8 अगस्त को निचली अदालत में उपस्थित होने के निर्देश दिए गए हैं। संवाद
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तरुण टंडन वर्ष 1992 से अस्पताल रोड मंडी में स्थित एक दुकान चला रहे हैं। यह दुकान उन्हें नगर परिषद मंडी की ओर से नीलामी के माध्यम से किराये पर दी गई थी। शुरू में किराया करीब 1400 रुपये प्रतिमाह तय किया गया था, जिसे वर्ष 1999 में नगर परिषद ने एक प्रस्ताव के जरिए घटाकर 730 रुपये कर दिया।
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बाद में शहरी विकास निदेशालय ने इस प्रस्ताव को रद्द कर दिया और पुराने किराए की मांग की गई। इस पर विवाद बढ़ गया। नगर निगम ने सड़क चौड़ीकरण योजना के तहत वर्ष 2018 में तरुण टंडन को दुकान खाली करने का नोटिस जारी किया। इसके विरोध में उन्होंने अदालत का दरवाजा खटखटाया और निचली अदालत से स्टे ले लिया।
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इस पर नगर निगम मंडी ने इस स्टे ऑर्डर के खिलाफ जिला अदालत में अपील दायर की। जिला अदालत ने नगर निगम की दलील को सही मानते हुए कहा कि चूंकि यह मामला सरकारी जमीन से जुड़ा है। मामला पहले से ही सक्षम अधिकारी और फिर डिवीजनल कमिश्नर के समक्ष अपील में लंबित है, तो सिविल अदालत का हस्तक्षेप कानूनन उचित नहीं है। अदालत ने निचली अदालत का स्टे ऑर्डर रद्द करते हुए कहा कि तरुण टंडन यदि चाहें तो अपील की प्रक्रिया में उच्च अधिकारी के सामने अपनी बात रख सकते हैं। न्यायालय ने साफ किया है कि यह निर्णय केवल स्टे से संबंधित है और वाद की अंतिम सुनवाई पर इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। दोनों पक्षों को अगली सुनवाई के लिए 8 अगस्त को निचली अदालत में उपस्थित होने के निर्देश दिए गए हैं। संवाद