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Mandi News: मंडी में आंगनबाड़ी वर्करों ने किया प्रदर्शन
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मंडी में मांगों को लेकर प्रदर्शन करते हुए आंगनबाड़ी वर्करज व हेल्पर यूनियन के सदस्य। संवाद
मंडी। सीटू से संबद्ध आंगनबाड़ी वर्कर्स एवं हेल्पर यूनियन के आह्वान पर वीरवार को मंडी में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया। सेरी मंच से बाल विकास परियोजना अधिकारी कार्यालय सदर मंडी तक रोष रैली निकाली गई और मुख्यमंत्री सुक्खू को मांगपत्र भेजा गया। प्रदर्शन में बीते 22 दिसंबर को पल्स पोलियो अभियान के दौरान ड्यूटी निभाते हुए टारना वृत्त में कार्यरत आंगनबाड़ी कार्यकर्ता हर्षा की गिरने से हुई मौत को लेकर न्याय, मुआवजा, सुरक्षा और विभागीय जवाबदेही की मांग उठाई गई।
सीटू जिला प्रधान भूपेंद्र सिंह, गोपेंद्र शर्मा, सुरेश सरवाल, आंगनबाड़ी यूनियन की सत्या देवी, दया देवी, कलावती, दुर्गा देवी, तारा देवी, रीमा देवी, डोला देवी और ज्योति देवी ने मांग की कि हर्षा के परिवार को 50 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाए। भविष्य में किसी भी आंगनबाड़ी कार्यकर्ता की ड्यूटी के दौरान मृत्यु होने पर एक समान मुआवजा नीति बनाई जाए।
यूनियन ने कहा कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं से स्वास्थ्य, चुनाव आयोग, राजस्व, शिक्षा, कल्याण सहित कई विभागों के कार्य करवाए जाते हैं, लेकिन दुर्घटना या मृत्यु की स्थिति में कोई भी विभाग जिम्मेदारी लेने को तैयार नहीं होता। हर्षा भी स्वास्थ्य विभाग के पल्स पोलियो अभियान की जिम्मेदारी निभा रही थीं। 15 दिन बीत जाने के बाद भी यह तय नहीं हो सका है कि जिम्मेदारी किस विभाग की है।
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प्रदर्शनकारियों ने बताया कि इससे पहले कुल्लू जिले और चंबा में भी ड्यूटी के दौरान आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की मौत हो चुकी है, लेकिन वहां भी मुआवजा नहीं दिया गया। यूनियन ने सरकार से सभी आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का दुर्घटना बीमा करने, जोखिम भत्ता देने और सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की। संवाद
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सीटू जिला प्रधान भूपेंद्र सिंह, गोपेंद्र शर्मा, सुरेश सरवाल, आंगनबाड़ी यूनियन की सत्या देवी, दया देवी, कलावती, दुर्गा देवी, तारा देवी, रीमा देवी, डोला देवी और ज्योति देवी ने मांग की कि हर्षा के परिवार को 50 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाए। भविष्य में किसी भी आंगनबाड़ी कार्यकर्ता की ड्यूटी के दौरान मृत्यु होने पर एक समान मुआवजा नीति बनाई जाए।
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यूनियन ने कहा कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं से स्वास्थ्य, चुनाव आयोग, राजस्व, शिक्षा, कल्याण सहित कई विभागों के कार्य करवाए जाते हैं, लेकिन दुर्घटना या मृत्यु की स्थिति में कोई भी विभाग जिम्मेदारी लेने को तैयार नहीं होता। हर्षा भी स्वास्थ्य विभाग के पल्स पोलियो अभियान की जिम्मेदारी निभा रही थीं। 15 दिन बीत जाने के बाद भी यह तय नहीं हो सका है कि जिम्मेदारी किस विभाग की है।
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प्रदर्शनकारियों ने बताया कि इससे पहले कुल्लू जिले और चंबा में भी ड्यूटी के दौरान आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की मौत हो चुकी है, लेकिन वहां भी मुआवजा नहीं दिया गया। यूनियन ने सरकार से सभी आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का दुर्घटना बीमा करने, जोखिम भत्ता देने और सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की। संवाद