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बिगड़े मौसम से नाशपाती पर संकट के बादल
Updated Thu, 22 Mar 2018 07:16 PM IST
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बिगड़े मौसम से नाशपाती पर संकट के बादल
एकाएक ठंड से परागण प्रक्रिया होने लगी प्रभावित
बागवानों को बदले मौसम से सताने लगी चिंतित
उमर उजाला ब्यूरो
कुल्लू/खराहल। मौसम के बदलते मिजाज से करोड़ों के बागवानी उद्योग पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। सेब के बाद सबसे ज्यादा जिला कुल्लू में नाशपाती का उत्पादन होता है। इन दिनों नाशपाती के पौधों पर फूल खिलने का क्रम शुरू हो गया है। एकाएक ठंड होने से तापमान में गिरावट होने से परागण की प्रक्रिया प्रभावित हो रही है।
उतार-चढ़ाव वाले तापमान से पौधों पर परागण प्रक्रिया का कार्य बेहतर तरीके से नहीं हो पाने से फलों की सेटिंग पर नकारात्मक असर के आसार बन गए हैं। ऐसे में बागवान नाशपाती फसल के प्रति काफी चिंतित होने लगे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि अधिक ठंड मधुमक्खियों और मित्र कीटों को परागण प्रक्रिया के लिए अनुचित नहीं है। मौसम का मिजाज फ्लावरिंग के समय ठीक नहीं रहता है। इसका असर फलों की सेटिंग पर पड़ने की आशंका जाहिर की जा रही है। माहिरों का कहना है कि फलों की सेटिंग के समय तापमान 22 से 25 डिग्री सेल्सियस होना लाजिमी है। इससे कम तापमान में फूल का विकास नहीं हो पाता है। वीरवार को सुबह से ही ऊंची चाटियों पर बर्फबारी और निचले इलाकों में बारिश के चलते तापमान एकाएक लुढ़क गया है। घाटी के नाशपाती उत्पादक अमित, बुद्धि प्रकाश शर्मा, अनूप भंडारी, चमन ठाकुर, अशोक ठाकुर, चुनी लाल, झाबे राम, देवी सिंह, कर्म चंद, ज्ञान ठाकुर आदि का कहना है कि तापमान के उतार-चढ़ाव के चलते फूलों का परागण कार्य अच्छी तरह से नहीं हो रहा है। बागवान विभाग के उपनिदेशक डॉ. आरके शर्मा का कहना है कि एकाएक ठंड के कारण पोलिनेशन में बाधा उत्पन्न हो रही है। मौसम साफ होते ही बागवानों को मधुमक्खियों के बाक्स भी परागण के लिए बगीचों में रखने चाहिए, जिससे फलों की सेटिंग उम्दा हो सके।
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एकाएक ठंड से परागण प्रक्रिया होने लगी प्रभावित
बागवानों को बदले मौसम से सताने लगी चिंतित
उमर उजाला ब्यूरो
कुल्लू/खराहल। मौसम के बदलते मिजाज से करोड़ों के बागवानी उद्योग पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। सेब के बाद सबसे ज्यादा जिला कुल्लू में नाशपाती का उत्पादन होता है। इन दिनों नाशपाती के पौधों पर फूल खिलने का क्रम शुरू हो गया है। एकाएक ठंड होने से तापमान में गिरावट होने से परागण की प्रक्रिया प्रभावित हो रही है।
उतार-चढ़ाव वाले तापमान से पौधों पर परागण प्रक्रिया का कार्य बेहतर तरीके से नहीं हो पाने से फलों की सेटिंग पर नकारात्मक असर के आसार बन गए हैं। ऐसे में बागवान नाशपाती फसल के प्रति काफी चिंतित होने लगे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि अधिक ठंड मधुमक्खियों और मित्र कीटों को परागण प्रक्रिया के लिए अनुचित नहीं है। मौसम का मिजाज फ्लावरिंग के समय ठीक नहीं रहता है। इसका असर फलों की सेटिंग पर पड़ने की आशंका जाहिर की जा रही है। माहिरों का कहना है कि फलों की सेटिंग के समय तापमान 22 से 25 डिग्री सेल्सियस होना लाजिमी है। इससे कम तापमान में फूल का विकास नहीं हो पाता है। वीरवार को सुबह से ही ऊंची चाटियों पर बर्फबारी और निचले इलाकों में बारिश के चलते तापमान एकाएक लुढ़क गया है। घाटी के नाशपाती उत्पादक अमित, बुद्धि प्रकाश शर्मा, अनूप भंडारी, चमन ठाकुर, अशोक ठाकुर, चुनी लाल, झाबे राम, देवी सिंह, कर्म चंद, ज्ञान ठाकुर आदि का कहना है कि तापमान के उतार-चढ़ाव के चलते फूलों का परागण कार्य अच्छी तरह से नहीं हो रहा है। बागवान विभाग के उपनिदेशक डॉ. आरके शर्मा का कहना है कि एकाएक ठंड के कारण पोलिनेशन में बाधा उत्पन्न हो रही है। मौसम साफ होते ही बागवानों को मधुमक्खियों के बाक्स भी परागण के लिए बगीचों में रखने चाहिए, जिससे फलों की सेटिंग उम्दा हो सके।
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