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Kullu News: क्रस्ना लैब में टेस्ट नहीं होने से भटकते रहे मरीज
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कुल्लू के क्षेत्रीय अस्पताल में सुबह के समय जांच करवाने के लिए पंजीकरण करवाते मरीज।-संवाद
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कुल्लू। क्षेत्रीय अस्पताल में वीरवार को उपचार करवाने आए मरीजों और उनके तीमारदारों को दिक्कतों का सामना करना पड़ा है। तीमारदारों को मरीजों के टेस्ट करवाने के लिए पूरा दिन भटकना पड़ा है। वीरवार सुबह 8 बजे। स्थान : क्षेत्रीय अस्पताल कुल्लू। मरीज अस्पताल में पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मोड में स्थापित क्रस्ना लैब पहुंचे। टेस्ट करवाने के लिए पंजीकरण काउंटर पर पहुंचे, तो पता चला कि लैब में आधे टेस्ट होंगे, बाकि टेस्ट लिए उन्हें अस्पताल की सरकारी लैब में करवाने होंगे।
मरीज और तीमारदार सुबह 8 बजे कमरा नंबर 216 में स्थापित सरकारी लैब के पंजीकरण काउंटर और कुछ बिलिंग काउंटर पर पहुंचे। जो मरीज और तीमारदार बिलिंग काउंटर पर गए उनका बिल काटा गया और फिर सरकारी प्रयोगशाला में टेस्ट करवाने के लिए लाइनों में खड़े हुए। जो पहले सीधे सरकारी प्रयोगशाला गए, उन्हें 09:30 बजे प्रयोगशाला खुलने पर कर्मचारियों ने बताया कि पहले बिल काटना होगा। उसके बाद टेस्ट के लिए खून के नमूने लिए जाएंगे।
बिलिंग काउंटर में भी लंबी लाइन लगी हुई थी। जैसे-कैसे 10 से 11 बजे तक बिलिंग करवाई। इसके बाद दोबारा सरकारी प्रयोगशाला पहुंचे, तो प्रयोगशाला में लंबी लाइनें लग गई थीं। प्रयोगशाला में 11:30 बजे तक ही सैंपल लिए गए। इसके बाद मरीजों को मजबूरन निजी प्रयोगशालाओं का रुख करना पड़ा। अस्पताल में जिन मरीजों के टेस्ट हुए थे उन्हें रिपोर्ट अपराह्न 2 बजे से मिलनी थी, लेकिन कर्मचारी 2:30 बजे प्रयोगशाला पहुंचे। तब तक मरीज और उनके तीमारदार कर्मचारियों का इंतजार करते रहे। मरीजों और तीमारदारों को रिपोर्ट लेने में ही 3:30 बज गए। ऐसे में वे चिकित्सक को अपनी रिपोर्ट नहीं दिखा पाए और निराश होकर बिना उपचार लौटना पड़ा।
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तीमारदार सौरव गुप्ता, अशोक कुमार, नितिन ठाकुर, सुशील, मोेहित वर्मा, राजेश कुमार, मोनिका, बबीता, लता देवी, सोनिका, रितिका ने कहा कि क्रस्ना प्रयोगशाला में टेस्ट नहीं हुए तो वे सरकारी प्रयोगशाला में टेस्ट के लिए पहुंचे। वहां लाइनों में घंटों खड़े रहना पड़ा। जब रिपोर्ट लेने की बारी आई, तो प्रयोगशाला से कर्मचारी ही गायब रहे। कर्मचारी अपराह्न 2 के बजाय 2:30 बजे प्रयोगशाला में आए। रिपोर्ट में देरी के कारण चिकित्सक नहीं मिल पाए।
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अस्पताल में पीपीपी मोड में चल रही क्रस्ना प्रयोगशाला में नियमित टेस्ट नहीं हो पा रहे हैं। इसके लिए कंपनी के अधिकारियों से चर्चा की गई है। उन्होंने स्थिति में सुधार के लिए एक सप्ताह का समय मांगा है। सरकारी प्रयोगशाला में मरीजाें की संख्या बढ़ी है। इसके कारण रिपोर्ट तैयार करने में समय लगा है।
-डॉ. राधा शर्मा, चिकित्सा अधीक्षक
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मरीज और तीमारदार सुबह 8 बजे कमरा नंबर 216 में स्थापित सरकारी लैब के पंजीकरण काउंटर और कुछ बिलिंग काउंटर पर पहुंचे। जो मरीज और तीमारदार बिलिंग काउंटर पर गए उनका बिल काटा गया और फिर सरकारी प्रयोगशाला में टेस्ट करवाने के लिए लाइनों में खड़े हुए। जो पहले सीधे सरकारी प्रयोगशाला गए, उन्हें 09:30 बजे प्रयोगशाला खुलने पर कर्मचारियों ने बताया कि पहले बिल काटना होगा। उसके बाद टेस्ट के लिए खून के नमूने लिए जाएंगे।
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बिलिंग काउंटर में भी लंबी लाइन लगी हुई थी। जैसे-कैसे 10 से 11 बजे तक बिलिंग करवाई। इसके बाद दोबारा सरकारी प्रयोगशाला पहुंचे, तो प्रयोगशाला में लंबी लाइनें लग गई थीं। प्रयोगशाला में 11:30 बजे तक ही सैंपल लिए गए। इसके बाद मरीजों को मजबूरन निजी प्रयोगशालाओं का रुख करना पड़ा। अस्पताल में जिन मरीजों के टेस्ट हुए थे उन्हें रिपोर्ट अपराह्न 2 बजे से मिलनी थी, लेकिन कर्मचारी 2:30 बजे प्रयोगशाला पहुंचे। तब तक मरीज और उनके तीमारदार कर्मचारियों का इंतजार करते रहे। मरीजों और तीमारदारों को रिपोर्ट लेने में ही 3:30 बज गए। ऐसे में वे चिकित्सक को अपनी रिपोर्ट नहीं दिखा पाए और निराश होकर बिना उपचार लौटना पड़ा।
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तीमारदार सौरव गुप्ता, अशोक कुमार, नितिन ठाकुर, सुशील, मोेहित वर्मा, राजेश कुमार, मोनिका, बबीता, लता देवी, सोनिका, रितिका ने कहा कि क्रस्ना प्रयोगशाला में टेस्ट नहीं हुए तो वे सरकारी प्रयोगशाला में टेस्ट के लिए पहुंचे। वहां लाइनों में घंटों खड़े रहना पड़ा। जब रिपोर्ट लेने की बारी आई, तो प्रयोगशाला से कर्मचारी ही गायब रहे। कर्मचारी अपराह्न 2 के बजाय 2:30 बजे प्रयोगशाला में आए। रिपोर्ट में देरी के कारण चिकित्सक नहीं मिल पाए।
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अस्पताल में पीपीपी मोड में चल रही क्रस्ना प्रयोगशाला में नियमित टेस्ट नहीं हो पा रहे हैं। इसके लिए कंपनी के अधिकारियों से चर्चा की गई है। उन्होंने स्थिति में सुधार के लिए एक सप्ताह का समय मांगा है। सरकारी प्रयोगशाला में मरीजाें की संख्या बढ़ी है। इसके कारण रिपोर्ट तैयार करने में समय लगा है।
-डॉ. राधा शर्मा, चिकित्सा अधीक्षक
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