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तनाव में युवा हार रहे जिंदगी की जंग
Updated Sat, 25 Nov 2017 11:10 PM IST
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सौरभ सूद
धर्मशाला। पढ़ाई का तनाव, कॅरिअर की चिंता, प्रेम में असफलता, मानसिक अवसाद या नशे का सेवन किशोरावस्था से लेकर यौवन की दहलीज पर पैर रखने वाले युवा जिंदगी की चुनौतियों के आगे हार कर मौत को गले लगाने से भी नहीं हिचकिचा रहे हैं।
जिला में बीते एक वर्ष में युवाओं की ओर से मौत को गले लगाने के दर्जनों मामले सामने आ चुके हैं। नवंबर माह में ऐसे दो वाकये सामने आए हैं। बीते सप्ताह देहरा में बाप ने अपने बेटे को पढ़ाई को लेकर फटकार लगाई तो उसने पुल से छलांग लगा जान गंवा दी तो शनिवार को मामा के घर रहने वाले बालक ने स्कूल न जाने पर मिली डांट से तैश में आकर फंदा लगा लिया। टांडा मेडिकल कॉलेज अस्पताल में मनोचिकित्सा विभाग के प्रमुख डॉ. मेजर सुखजीत सिंह कहते हैं कि आज के युग में अधिकतर युवा विभिन्न कारणों से डिप्रेशन में है। इससे निपटने का कोई उपाय नहीं सूझता या परिजनों का साथ नहीं मिलता तो वह अपनी जिंदगी तक खत्म करने का दुस्साहस कर बैठते हैं।
बाक्स--------
युवाओं में तनाव के कारण
डॉ. सुखजीत कहते हैं कि स्कूल में पढ़ाई में मन न लगने और परीक्षाओं में नाकामी के डर से कई बच्चे डिप्रेशन में चले जाते हैं। घबराहट और बेचैनी के कारण वे स्कूल जाने से कन्नी काटते हैं। ऐसे में परिजनों की डांट से उनका मनोबल और गिर जाता है और कमजोर सहनशक्ति के चलते वे गलत कदम उठा लेते हैं। असफल लव अफेयर, करियर में नाकामी और नशे की आदत के चलते भी युवा वर्ग का जिंदगी से मोह छूट जाता है। पर्सनेलिटी डिस्आर्डर के चलते कई युवा अपने घरवालों को आत्महत्या की धमकियां देने लग पड़ते हैं। डॉ. सुखजीत के अनुसार टांडा अस्पताल के मनोरोग विभाग में ऐसे कई मामले आते हैं जिनमें काउंसलिंग के बाद कई मरीज इससे उबर चुके हैं।
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बच्चों को फटकार नहीं, प्यार चाहिए
मनोचिकित्सा विशेषज्ञ डॉ. सुखजीत के अनुसार ऐसे मामलों में अभिभावक अपने बच्चों को डांट-फटकार नहीं बल्कि सहानुभूति और प्यार से समझाएं। घर का माहौल एकदम शांत बनाएं। यदि बच्चे को पढ़ाई में दिक्कत आ रही है तो उससे नियमित बातचीत करें। बच्चों पर नियमित तौर पर नजर रखें। यदि वह अकेला रहना चाहता है या ठीक ढंग से खाना सही खा रहा है तो तुरंत उससे बात कर इसका कारण जान कर हल करें।
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धर्मशाला। पढ़ाई का तनाव, कॅरिअर की चिंता, प्रेम में असफलता, मानसिक अवसाद या नशे का सेवन किशोरावस्था से लेकर यौवन की दहलीज पर पैर रखने वाले युवा जिंदगी की चुनौतियों के आगे हार कर मौत को गले लगाने से भी नहीं हिचकिचा रहे हैं।
जिला में बीते एक वर्ष में युवाओं की ओर से मौत को गले लगाने के दर्जनों मामले सामने आ चुके हैं। नवंबर माह में ऐसे दो वाकये सामने आए हैं। बीते सप्ताह देहरा में बाप ने अपने बेटे को पढ़ाई को लेकर फटकार लगाई तो उसने पुल से छलांग लगा जान गंवा दी तो शनिवार को मामा के घर रहने वाले बालक ने स्कूल न जाने पर मिली डांट से तैश में आकर फंदा लगा लिया। टांडा मेडिकल कॉलेज अस्पताल में मनोचिकित्सा विभाग के प्रमुख डॉ. मेजर सुखजीत सिंह कहते हैं कि आज के युग में अधिकतर युवा विभिन्न कारणों से डिप्रेशन में है। इससे निपटने का कोई उपाय नहीं सूझता या परिजनों का साथ नहीं मिलता तो वह अपनी जिंदगी तक खत्म करने का दुस्साहस कर बैठते हैं।
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युवाओं में तनाव के कारण
डॉ. सुखजीत कहते हैं कि स्कूल में पढ़ाई में मन न लगने और परीक्षाओं में नाकामी के डर से कई बच्चे डिप्रेशन में चले जाते हैं। घबराहट और बेचैनी के कारण वे स्कूल जाने से कन्नी काटते हैं। ऐसे में परिजनों की डांट से उनका मनोबल और गिर जाता है और कमजोर सहनशक्ति के चलते वे गलत कदम उठा लेते हैं। असफल लव अफेयर, करियर में नाकामी और नशे की आदत के चलते भी युवा वर्ग का जिंदगी से मोह छूट जाता है। पर्सनेलिटी डिस्आर्डर के चलते कई युवा अपने घरवालों को आत्महत्या की धमकियां देने लग पड़ते हैं। डॉ. सुखजीत के अनुसार टांडा अस्पताल के मनोरोग विभाग में ऐसे कई मामले आते हैं जिनमें काउंसलिंग के बाद कई मरीज इससे उबर चुके हैं।
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बच्चों को फटकार नहीं, प्यार चाहिए
मनोचिकित्सा विशेषज्ञ डॉ. सुखजीत के अनुसार ऐसे मामलों में अभिभावक अपने बच्चों को डांट-फटकार नहीं बल्कि सहानुभूति और प्यार से समझाएं। घर का माहौल एकदम शांत बनाएं। यदि बच्चे को पढ़ाई में दिक्कत आ रही है तो उससे नियमित बातचीत करें। बच्चों पर नियमित तौर पर नजर रखें। यदि वह अकेला रहना चाहता है या ठीक ढंग से खाना सही खा रहा है तो तुरंत उससे बात कर इसका कारण जान कर हल करें।