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Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Hamirpur (Himachal) News ›   4,000 ounces of silkworm seed procured from Bangalore and Palampur; farmers to receive it from March

Hamirpur (Himachal) News: बंगलूरू और पालमपुर से 4,000 औंस रेशम बीज मंगवाया, मार्च से किसानों को मिलेगा

Thu, 19 Feb 2026 01:42 AM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Thu, 19 Feb 2026 01:42 AM IST
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जाहू (हमीरपुर)। प्रदेश में रेशम पालन व्यवसाय को मजबूती प्रदान करने के लिए किसानों की मांग के अनुसार 4000 औंस रेशम कीट बीज बंगलूरू तथा पालमपुर स्थित रेशम कीट बीज उत्पादन केंद्र से मंगवाया है।
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यह बीज गर्म क्षेत्रों में मार्च तथा ऊंचाई वाले ठंडे क्षेत्रों में अप्रैल माह से रेशम पालकों को उपलब्ध करवाया जाएगा। प्रदेश में रेशम पालन (सेरीकल्चर) को बढ़ावा देने के लिए हमीरपुर, बिलासपुर, मंडी, कांगड़ा, सिरमौर, ऊना और शिमला जिलों में लगभग 90 रेशम पालन एवं प्रशिक्षण केंद्र स्थापित किए गए हैं। इनके संचालन के लिए आठ डिवीजन बनाए गए हैं, जिनके अंतर्गत करीब 12 हजार किसान रेशम पालन कार्य से जुड़े हुए हैं।
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प्रदेश में लगभग 6,000 औंस रेशम बीज की आवश्यकता रहती है, लेकिन किसानों की वर्तमान मांग के अनुसार 4,000 औंस बीज मंगवाया गया है। इसमें 2,500 औंस बीज बंगलूरू तथा 1,500 औंस बीज पालमपुर से प्राप्त किया जाएगा। विभाग की ओर से विभिन्न क्षेत्रों के लिए बीज की मांग निर्धारित की गई है।
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किस क्षेत्र के लिए कितना बीज

सिरमौर जिला के धौलाकुआं के लिए 225 औंस, घुमारवीं के लिए 1200 औंस, मंडी के लिए 281 औंस, संधोल के लिए 500 औंस, नादौन के लिए 700 औंस, देहरा के लिए 450 औंस, पालमपुर क्षेत्र के लिए 200 औंस तथा शिमला के लिए 175 औंस बीज की मांग की गई है। अधिक ऊंचाई वाले ठंडे क्षेत्रों में शिमला के लिए 50 औंस तथा थुनाग और बालीचौकी के लिए 75-75 औंस बीज की मांग रखी गई है। फरवरी के अंत तक धौलाकुआं रेशम पालन एवं प्रशिक्षण केंद्र में रेशम बीज पहुंचने की संभावना है, जबकि अन्य क्षेत्रों में मार्च और अप्रैल माह के दौरान रेशम पालकों को वितरित किया जाएगा। किसानों को रेशम पालन के लिए क्लस्टर स्तर पर प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है।



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बंगलूरू और पालमपुर से बीज प्राप्त होने के बाद इसे रेशम पालन एवं प्रशिक्षण केंद्रों में सुरक्षित रखा जाएगा। लगभग 15 से 20 दिनों में रेशम कीट तैयार होने के बाद किसानों को पालन हेतु वितरित किया जाएगा। यह प्रक्रिया मार्च और अप्रैल महीनों में शुरू होगी।
-बलदेव चौहान, उप निदेशक, रेशम विभाग शिमला
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