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पानी को हम वाटर कहें या जल, अस्तित्व नहीं बदलेगा : दुनी चंद
Mon, 30 Dec 2024 05:40 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
Updated Mon, 30 Dec 2024 05:40 AM IST
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निरंकारी भवन मुगला में सत्संग सुनते अनुयायी। -संवाद
चंबा। संत निरंकारी सत्संग भवन मुगला में साप्ताहिक सत्संग हुआ। इसमें क्षेत्रीय प्रभारी महात्मा दुनी चंद ने संगत को प्रवचनों से निहाल किया। सत्संग में साहो, जडेरा, राख, जांगी, मैहला और मंगला समेत दूर-दराज के क्षेत्रों से आए संतों और महात्माओं ने सदगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज की शिक्षाओं को भजनों और विचारों के माध्यम से साझा किया।
महात्मा दुनी चंद ने अपने प्रवचनों में कहा कि अगर मनुष्य प्रेम, करुणा और दया के भाव अपने जीवन में स्थापित कर ले तो यह दुनिया जन्नत बन सकती है। उन्होंने समझाया कि परमात्मा एक है और उसे सीमाओं में बांधा नहीं जा सकता। चाहे पूजा मंदिर में हो, मस्जिद में इबादत, गुरुद्वारे में अरदास या चर्च में प्रार्थना, परमात्मा सभी जगह एक समान है। उन्होंने कहा कि पानी को चाहे हम वाटर कहें या जल, कोई फर्क नहीं पड़ता है, क्योंकि ऐसे करने से इसका अस्तित्व बदलने वाला नहीं है। पानी, पानी ही रहेगा।
उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति परमात्मा को जान लेता है, वह हर मनुष्य और समस्त मानवता में परमात्मा के दर्शन करता है। उसके जीवन में प्रेम, करुणा और दया स्वतः आ जाती हैं। सत्संग के समापन पर विशाल भंडारे का आयोजन किया गया। यह जानकारी मीडिया सहायक विनोद कुमार ने दी।
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महात्मा दुनी चंद ने अपने प्रवचनों में कहा कि अगर मनुष्य प्रेम, करुणा और दया के भाव अपने जीवन में स्थापित कर ले तो यह दुनिया जन्नत बन सकती है। उन्होंने समझाया कि परमात्मा एक है और उसे सीमाओं में बांधा नहीं जा सकता। चाहे पूजा मंदिर में हो, मस्जिद में इबादत, गुरुद्वारे में अरदास या चर्च में प्रार्थना, परमात्मा सभी जगह एक समान है। उन्होंने कहा कि पानी को चाहे हम वाटर कहें या जल, कोई फर्क नहीं पड़ता है, क्योंकि ऐसे करने से इसका अस्तित्व बदलने वाला नहीं है। पानी, पानी ही रहेगा।
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उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति परमात्मा को जान लेता है, वह हर मनुष्य और समस्त मानवता में परमात्मा के दर्शन करता है। उसके जीवन में प्रेम, करुणा और दया स्वतः आ जाती हैं। सत्संग के समापन पर विशाल भंडारे का आयोजन किया गया। यह जानकारी मीडिया सहायक विनोद कुमार ने दी।
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