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Chamba News: मेडिकल कॉलेज में कुछ दिन नहीं होंगे डायलिसिस, मरीजों की बढ़ेंगी दिक्कतें
Sat, 13 Apr 2024 09:56 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
Updated Sat, 13 Apr 2024 09:56 PM IST
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मेडिकल कॉलेज में कुछ दिन नहीं होंगे डायलिसिस, मरीजों की बढ़ेंगी दिक्कतें
14 अप्रैल को कंपनी के साथ खत्म हो जाएगा एमओयू, नई कंपनी को मशीनरी लगाने में लगेगा कुछ समय
मेडिकल कॉलेज प्रबंधन ने सरकार को पत्र लिखकर जल्द व्यवस्था बनाने की उठाई है मांग
डायलिसिस न होने से मरीजों को शिमला, कांगड़ा या चंडीगढ़ क लगाने पड़ सकते हैं चक्कर
संवाद न्यूज एजेंसी
चंबा। मेडिकल कॉलेज चंबा में डायलिसिस करवाने वाले मरीजों को कुछ समय के लिए परेशान होना पड़ सकता है। डायलिसिस करने वाली कंपनी का मेडिकल कॉलेज के साथ 14 अप्रैल को एमओयू खत्म हो जाएगा।
अब दूसरी कंपनी हंस फाउंडेशन डायलिसिस को लेकर मशीनरी स्थापित करवाने के बाद मरीजों को सुविधा प्रदान करेगी। मेडिकल कॉलेज प्रबंधन डायलिसिस करवाने वाले मरीजों की सुविधा के लिए अपने स्तर पर हर प्रयास कर रहा है। प्रबंधन ने सरकार को पत्र लिख कर मरीजों की सुविधा के लिए जल्द व्यवस्था करने की गुहार लगाई है। इसमें अभी सफलता नहीं मिल पाई है। ऐसे में कुछ समय के लिए मरीजों को डायलिसिस के लिए मेडिकल कॉलेज के बजाय बाहरी जिलों, चंडीगढ़ या पठानकोट का रुख करना पड़ सकता है।
जिले में दो दर्जन से अधिक किडनी के मरीज हैं। ये मरीज मेडिकल कॉलेज में डायलिसिस करवाने आते हैं। जब गुर्दे सक्षम नहीं होते हैं तो डायलिसिस शरीर को आपके रक्त से अतिरिक्त तरल पदार्थ और अपशिष्ट उत्पादों को निकालने में मदद करता है। एमओयू खत्म होने के बाद कुछ समय के लिए डायलिसिस करवाने वाले जिले के मरीजों को कांगड़ा, शिमला या चंडीगढ़ जाना पड़ सकता है। एमओयू खत्म होने के बाद दूसरी कंपनी को कार्यभार संभालने समेत मशीनरी स्थापित करने में समय लगेगा। पुरानी मशीनरी को हटाने से लेकर नई मशीनरी स्थापित करने के लिए लगने वाले समय के दौरान मरीजों की दिक्कतें बढ़ने वाली हैं। वहीं, मेडिकल कॉलेज प्रबंधन ने मरीजों और उनके तीमारदारों से सहयोग की अपील की है।
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मेडिकल कॉलेज चंबा के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. बिपन ठाकुर ने बताया कि डायलिसिस करने वाली पुरानी कंपनी का एमओयू 14 अप्रैल को खत्म हो रहा है। नई कंपनी डायलिसिस का कार्य देखेगी। पुरानी कंपनी की ओर से मशीनरी को हटाने और नई मशीनरी को स्थापित करने में लगने वाले समय के दौरान डायलिसिस नहीं हो सकते हैं। सरकार को पत्र लिखकर मरीजों की सुविधा के लिए उचित व्यवस्था करने की गुहार लगाई गई है।
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14 अप्रैल को कंपनी के साथ खत्म हो जाएगा एमओयू, नई कंपनी को मशीनरी लगाने में लगेगा कुछ समय
मेडिकल कॉलेज प्रबंधन ने सरकार को पत्र लिखकर जल्द व्यवस्था बनाने की उठाई है मांग
डायलिसिस न होने से मरीजों को शिमला, कांगड़ा या चंडीगढ़ क लगाने पड़ सकते हैं चक्कर
संवाद न्यूज एजेंसी
चंबा। मेडिकल कॉलेज चंबा में डायलिसिस करवाने वाले मरीजों को कुछ समय के लिए परेशान होना पड़ सकता है। डायलिसिस करने वाली कंपनी का मेडिकल कॉलेज के साथ 14 अप्रैल को एमओयू खत्म हो जाएगा।
अब दूसरी कंपनी हंस फाउंडेशन डायलिसिस को लेकर मशीनरी स्थापित करवाने के बाद मरीजों को सुविधा प्रदान करेगी। मेडिकल कॉलेज प्रबंधन डायलिसिस करवाने वाले मरीजों की सुविधा के लिए अपने स्तर पर हर प्रयास कर रहा है। प्रबंधन ने सरकार को पत्र लिख कर मरीजों की सुविधा के लिए जल्द व्यवस्था करने की गुहार लगाई है। इसमें अभी सफलता नहीं मिल पाई है। ऐसे में कुछ समय के लिए मरीजों को डायलिसिस के लिए मेडिकल कॉलेज के बजाय बाहरी जिलों, चंडीगढ़ या पठानकोट का रुख करना पड़ सकता है।
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जिले में दो दर्जन से अधिक किडनी के मरीज हैं। ये मरीज मेडिकल कॉलेज में डायलिसिस करवाने आते हैं। जब गुर्दे सक्षम नहीं होते हैं तो डायलिसिस शरीर को आपके रक्त से अतिरिक्त तरल पदार्थ और अपशिष्ट उत्पादों को निकालने में मदद करता है। एमओयू खत्म होने के बाद कुछ समय के लिए डायलिसिस करवाने वाले जिले के मरीजों को कांगड़ा, शिमला या चंडीगढ़ जाना पड़ सकता है। एमओयू खत्म होने के बाद दूसरी कंपनी को कार्यभार संभालने समेत मशीनरी स्थापित करने में समय लगेगा। पुरानी मशीनरी को हटाने से लेकर नई मशीनरी स्थापित करने के लिए लगने वाले समय के दौरान मरीजों की दिक्कतें बढ़ने वाली हैं। वहीं, मेडिकल कॉलेज प्रबंधन ने मरीजों और उनके तीमारदारों से सहयोग की अपील की है।
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मेडिकल कॉलेज चंबा के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. बिपन ठाकुर ने बताया कि डायलिसिस करने वाली पुरानी कंपनी का एमओयू 14 अप्रैल को खत्म हो रहा है। नई कंपनी डायलिसिस का कार्य देखेगी। पुरानी कंपनी की ओर से मशीनरी को हटाने और नई मशीनरी को स्थापित करने में लगने वाले समय के दौरान डायलिसिस नहीं हो सकते हैं। सरकार को पत्र लिखकर मरीजों की सुविधा के लिए उचित व्यवस्था करने की गुहार लगाई गई है।