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स्वतंत्रता आंदोलन में यशपाल का योगदान अतुलनीय रहा : उपायुक्त
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- बिलासपुर में राज्य स्तरीय यशपाल जयंती समारोह शुरू
- दी बिग्नर ने किया पूनिया की होली का मंचन
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। महान साहित्यकार यशपाल समाज में आर्थिक और सामाजिक समानता के पक्षधर थे। यह विचार उपायुक्त आबिद हुसैन सादिक ने राज्य स्तरीय यशपाल जयंती समारोह के शुभारंभ पर व्यक्त किए। दो दिवसीय इस समारोह का आयोजन भाषा संस्कृति विभाग की ओर से बहुउद्देशीय सांस्कृतिक भवन में किया जा रहा है।
उपायुक्त ने कहा कि साहित्य एवं स्वतंत्रता आंदोलन में यशपाल का योगदान अतुलनीय रहा। उन्होंने साहित्य के माध्यम से युवाओं को स्वतंत्रता आंदोलन के लिए प्रेरित किया। उन्होंने स्वयं भगत सिंह और अन्य महान स्वतंत्रता सेनानियों के सानिध्य में रहकर स्वतंत्रता आंदोलन को बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। इस मौके पर स्वतंत्रता सेनानी यशपाल की भतीजी गोगी सरोज पाल ने विशिष्ट अतिथि के रूप शिरकत की। वहीं, भाषा संस्कृत विभाग के संयुक्त निदेशक मनजीत शर्मा ने कहा कि भाषा और सांस्कृतिक संरक्षण के लिए विभाग तत्परता के साथ प्रयासरत है। उन्होंने साहित्यकार यशपाल के व्यक्तित्व और कृतित्व पर प्रकाश डाला। इस मौके पर स्वतंत्रता सेनानी यशपाल की भतीजी गोगी सरोज पाल, वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. सुशील कुमार और डॉ. हेमराज कौशिक को सम्मानित किया गया।
समारोह के पहले दिन शिमला की नाट्य संस्था दी बिग्नर ने यशपाल की कहानी पूनिया की होली का भावपूर्ण मंचन किया, जिसमें तत्कालीन समय में नारी के जीवन और समाज में उसकी स्थिति को दर्शाया गया है। कहानी का नाट्य रूपांतरण और निर्देशन कपिल शर्मा ने किया, जबकि पूनिया की भूमिका भावना वर्मा ने निभाई। महालक्ष्मी नृत्य दल ने मनमोहक केहलूरी नृत्य प्रस्तुत किया। कार्यक्रम के दूसरे सत्र में यशपाल का कहानी संसार पर डॉ. हेमराज कौशिक ने सारगर्भित पत्र प्रस्तुत किया। जिला भाषा अधिकारी रेवती सैनी ने आभार उद्बोधन में कार्यक्रम की सफलता के लिए सभी का आभार व्यक्त किया। इस मौके पर भाषा अधिकारी सरोजना नरवाल, संतोष कुमार, नेहरू युवा केंद्र के समन्वयक अतुल उपस्थित रहे।
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- दी बिग्नर ने किया पूनिया की होली का मंचन
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। महान साहित्यकार यशपाल समाज में आर्थिक और सामाजिक समानता के पक्षधर थे। यह विचार उपायुक्त आबिद हुसैन सादिक ने राज्य स्तरीय यशपाल जयंती समारोह के शुभारंभ पर व्यक्त किए। दो दिवसीय इस समारोह का आयोजन भाषा संस्कृति विभाग की ओर से बहुउद्देशीय सांस्कृतिक भवन में किया जा रहा है।
उपायुक्त ने कहा कि साहित्य एवं स्वतंत्रता आंदोलन में यशपाल का योगदान अतुलनीय रहा। उन्होंने साहित्य के माध्यम से युवाओं को स्वतंत्रता आंदोलन के लिए प्रेरित किया। उन्होंने स्वयं भगत सिंह और अन्य महान स्वतंत्रता सेनानियों के सानिध्य में रहकर स्वतंत्रता आंदोलन को बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। इस मौके पर स्वतंत्रता सेनानी यशपाल की भतीजी गोगी सरोज पाल ने विशिष्ट अतिथि के रूप शिरकत की। वहीं, भाषा संस्कृत विभाग के संयुक्त निदेशक मनजीत शर्मा ने कहा कि भाषा और सांस्कृतिक संरक्षण के लिए विभाग तत्परता के साथ प्रयासरत है। उन्होंने साहित्यकार यशपाल के व्यक्तित्व और कृतित्व पर प्रकाश डाला। इस मौके पर स्वतंत्रता सेनानी यशपाल की भतीजी गोगी सरोज पाल, वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. सुशील कुमार और डॉ. हेमराज कौशिक को सम्मानित किया गया।
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समारोह के पहले दिन शिमला की नाट्य संस्था दी बिग्नर ने यशपाल की कहानी पूनिया की होली का भावपूर्ण मंचन किया, जिसमें तत्कालीन समय में नारी के जीवन और समाज में उसकी स्थिति को दर्शाया गया है। कहानी का नाट्य रूपांतरण और निर्देशन कपिल शर्मा ने किया, जबकि पूनिया की भूमिका भावना वर्मा ने निभाई। महालक्ष्मी नृत्य दल ने मनमोहक केहलूरी नृत्य प्रस्तुत किया। कार्यक्रम के दूसरे सत्र में यशपाल का कहानी संसार पर डॉ. हेमराज कौशिक ने सारगर्भित पत्र प्रस्तुत किया। जिला भाषा अधिकारी रेवती सैनी ने आभार उद्बोधन में कार्यक्रम की सफलता के लिए सभी का आभार व्यक्त किया। इस मौके पर भाषा अधिकारी सरोजना नरवाल, संतोष कुमार, नेहरू युवा केंद्र के समन्वयक अतुल उपस्थित रहे।
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