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Bilaspur News: लोगों को सुनाई द्वापर युग का अंत होने की कथा
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-श्री पिपलेश्वर महादेव मंदिर में भागवत कथा आयोजित
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। नगर के डियारा सेक्टर में श्री पिपलेश्वर महादेव मंदिर में श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन बाबा नंदी सरस्वती महाराज के सानिध्य एवं जन सहयोग से किया गया।
कथावाचक पंडित सुरेश भारद्वाज ने कहा कि राजा परीक्षित ने जब कलयुग से अपने राज्य से निकल जाने को कहा तो कलयुग ने राजा से कहा कि अब तो द्वापर युग खत्म हो चुका है। अत: अब मुझे इस धरती पर रहने का अधिकार है। कृपया करके मुझे अपने राज्य में रहने के लिए स्थान दें ,क्योंकि यही नियति है। राजा परीक्षित ने बहुत सोच समझकर कलयुग को जुआ, मदिरापान, पर स्त्री गमन और हिंसा इन चार स्थानों में असत्य, मद, काम और क्रोध में रहने की छूट दी। इस पर कलयुग ने कहा कि महाराज आप जैसे धर्म प्रतिज्ञा और धर्मात्मा राजा के राज्य में यह चार स्थान तो हो ही नहीं सकते हैं, तो भला मैं कहां रहूंगा। कृपया करके मुझे इनके अतिरिक्त कोई और स्थान दें। पंडित जी ने कहा कि इस पर राजा परीक्षित ने कलयुग को चार स्थानों के अतिरिक्त स्वर्ण में निवास करने की अनुमति दे दी। बस यही पर राजा परीक्षित गलती कर गए उनकी गलती का फायदा उठाकर कलयुग राजा परीक्षित के स्वर्ण मुकुट में बैठ गया और इस प्रकार द्वापर युग का अंत हुआ। उन्होंने कहा कि कलयुग ने राजा परीक्षित से जुआ, मदिरा और सोने में रहने के लिए अनुमति मांगी थी। कलयुग की विनती को स्वीकार करते हुए राजा परीक्षित ने कलयुग को यह तीन स्थान दिए थे। पंडित जी ने कहा कि धूर्त को जहां भी रखो वह छल ही करता है। इसलिए सज्जन पुरुषों को ऐसे दुष्टों से सावधान रहना चाहिए। कथा का समापन 8 जून को होगा, जबकि नौ जून को दोपहर दो बजे से अटूट भंडारे का आयोजन भी किया जाएगा।
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संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। नगर के डियारा सेक्टर में श्री पिपलेश्वर महादेव मंदिर में श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन बाबा नंदी सरस्वती महाराज के सानिध्य एवं जन सहयोग से किया गया।
कथावाचक पंडित सुरेश भारद्वाज ने कहा कि राजा परीक्षित ने जब कलयुग से अपने राज्य से निकल जाने को कहा तो कलयुग ने राजा से कहा कि अब तो द्वापर युग खत्म हो चुका है। अत: अब मुझे इस धरती पर रहने का अधिकार है। कृपया करके मुझे अपने राज्य में रहने के लिए स्थान दें ,क्योंकि यही नियति है। राजा परीक्षित ने बहुत सोच समझकर कलयुग को जुआ, मदिरापान, पर स्त्री गमन और हिंसा इन चार स्थानों में असत्य, मद, काम और क्रोध में रहने की छूट दी। इस पर कलयुग ने कहा कि महाराज आप जैसे धर्म प्रतिज्ञा और धर्मात्मा राजा के राज्य में यह चार स्थान तो हो ही नहीं सकते हैं, तो भला मैं कहां रहूंगा। कृपया करके मुझे इनके अतिरिक्त कोई और स्थान दें। पंडित जी ने कहा कि इस पर राजा परीक्षित ने कलयुग को चार स्थानों के अतिरिक्त स्वर्ण में निवास करने की अनुमति दे दी। बस यही पर राजा परीक्षित गलती कर गए उनकी गलती का फायदा उठाकर कलयुग राजा परीक्षित के स्वर्ण मुकुट में बैठ गया और इस प्रकार द्वापर युग का अंत हुआ। उन्होंने कहा कि कलयुग ने राजा परीक्षित से जुआ, मदिरा और सोने में रहने के लिए अनुमति मांगी थी। कलयुग की विनती को स्वीकार करते हुए राजा परीक्षित ने कलयुग को यह तीन स्थान दिए थे। पंडित जी ने कहा कि धूर्त को जहां भी रखो वह छल ही करता है। इसलिए सज्जन पुरुषों को ऐसे दुष्टों से सावधान रहना चाहिए। कथा का समापन 8 जून को होगा, जबकि नौ जून को दोपहर दो बजे से अटूट भंडारे का आयोजन भी किया जाएगा।
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