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Bilaspur News: ई-कॉमर्स, फेरीवाले बन रहे स्थानीय व्यापार के लिए चुनौती
Sun, 02 Nov 2025 11:49 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
Updated Sun, 02 Nov 2025 11:49 PM IST
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घुमारवीं सम्मेलन में मौजूद व्यापारी। संवाद
व्यापारियों की समस्याओं को लेकर घुमारवीं में हुआ सम्मेलन
टैक्स, बिजली बिल, किराए का बोझ झेल रहे छोटे दुकानदार
व्यापारियों की आवाज सरकार तक पहुंचाने का लिया संकल्प
संवाद न्यूज एजेंसी
घुमारवीं (बिलासपुर)। घुमारवीं में व्यापारियों की समस्याओं को लेकर संवेदना संस्था की ओर से व्यापारी वर्ग सम्मेलन का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम स्थानीय निजी पैलेस में हुआ। सम्मेलन में घुमारवीं, कुठेरा, बरठीं, झंडूता, डंगार, भराड़ी, कंदरौर और भगेड़ क्षेत्रों के व्यापारियों ने बड़ी संख्या में भाग लिया।
अध्यक्षता संवेदना संस्था के अध्यक्ष विनोद सागर ने की। सम्मेलन में व्यापार मंडल हमीरपुर के अध्यक्ष सुमित ठाकुर मुख्य अतिथि और सचिव राजेंद्र सोनी मुख्य वक्ता रहे। सुमित ठाकुर ने कहा कि व्यापारियों की आवाज तभी प्रभावी होगी जब वे संगठित होकर मजबूत नेतृत्व तैयार करेंगे। उन्होंने कहा कि सदस्यता अभियान केवल पर्ची कटवाने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसका मकसद ऐसा नेतृत्व बनाना चाहिए जो व्यापारियों के हितों की आवाज बुलंद करे। मुख्य वक्ता राजेंद्र सोनी ने कहा कि स्थानीय व्यापारियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती ई-कॉमर्स और फेरीवाले हैं। ऑनलाइन बिक्री और बिना टैक्स के व्यापार ने दुकानदारों की आय पर सीधा असर डाला है। उन्होंने कहा कि छोटे दुकानदार टैक्स देने और किराया चुकाने के बावजूद मुश्किल में हैं, जबकि बाहरी विक्रेता बिना किसी कर का भुगतान के कारोबार कर रहे हैं।
संवेदना संस्था के प्रवक्ता विशाल नड्डा ने कहा कि बिना टैक्स कारोबार से जहां व्यापारी नुकसान झेल रहे हैं, वहीं सरकार के राजस्व को भी भारी हानि हो रही है। उन्होंने कहा कि स्थानीय व्यापार हमेशा सरकार के साथ खड़ा रहता है, परंतु उनके हितों की अनदेखी की जा रही है। वक्ताओं ने कहा कि आए दिन नए नियम और कर व्यवस्था छोटे व्यापारियों के लिए सिरदर्द बन गई है। टैक्स, बिजली बिल और किराए के बोझ से व्यापारी वर्ग जूझ रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार को चाहिए कि छोटे और मध्यम वर्ग के व्यापारियों के लिए राहत नीति बनाए। कहा कि व्यापारी हर परिस्थिति में सरकार के साथ खड़ा रहता है, लेकिन जब राहत देने की बात आती है तो उन्हें भुला दिया जाता है। व्यापारी वर्ग राज्य की आर्थिक रीढ़ है, इसलिए उनके हितों की रक्षा जरूरी है। कार्यक्रम में संस्था के अध्यक्ष विनोद सागर, उपाध्यक्ष शिव कुमार, सचिव सत्यम शर्मा, परिवेश चंदेल, लकी चंदेल सहित अनेक पदाधिकारी मौजूद रहे। सम्मेलन में व्यापारियों ने एकजुटता का संदेश दिया और सरकार से अपेक्षा जताई कि स्थानीय व्यापारियों के हितों को प्राथमिकता दी जाए।
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इनसेट
भविष्य की रणनीति तय करेगा सम्मेलन
संवेदना संस्था ने कहा कि यह सम्मेलन केवल चर्चा तक सीमित नहीं रहेगा। व्यापारियों की समस्याओं को सरकार तक पहुंचाने और उनके समाधान के लिए ठोस रणनीति तैयार की जाएगी। संस्था ने कहा कि अब व्यापारी वर्ग को एकजुट होकर अपने अधिकारों की लड़ाई खुद लड़नी होगी।
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टैक्स, बिजली बिल, किराए का बोझ झेल रहे छोटे दुकानदार
व्यापारियों की आवाज सरकार तक पहुंचाने का लिया संकल्प
संवाद न्यूज एजेंसी
घुमारवीं (बिलासपुर)। घुमारवीं में व्यापारियों की समस्याओं को लेकर संवेदना संस्था की ओर से व्यापारी वर्ग सम्मेलन का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम स्थानीय निजी पैलेस में हुआ। सम्मेलन में घुमारवीं, कुठेरा, बरठीं, झंडूता, डंगार, भराड़ी, कंदरौर और भगेड़ क्षेत्रों के व्यापारियों ने बड़ी संख्या में भाग लिया।
अध्यक्षता संवेदना संस्था के अध्यक्ष विनोद सागर ने की। सम्मेलन में व्यापार मंडल हमीरपुर के अध्यक्ष सुमित ठाकुर मुख्य अतिथि और सचिव राजेंद्र सोनी मुख्य वक्ता रहे। सुमित ठाकुर ने कहा कि व्यापारियों की आवाज तभी प्रभावी होगी जब वे संगठित होकर मजबूत नेतृत्व तैयार करेंगे। उन्होंने कहा कि सदस्यता अभियान केवल पर्ची कटवाने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसका मकसद ऐसा नेतृत्व बनाना चाहिए जो व्यापारियों के हितों की आवाज बुलंद करे। मुख्य वक्ता राजेंद्र सोनी ने कहा कि स्थानीय व्यापारियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती ई-कॉमर्स और फेरीवाले हैं। ऑनलाइन बिक्री और बिना टैक्स के व्यापार ने दुकानदारों की आय पर सीधा असर डाला है। उन्होंने कहा कि छोटे दुकानदार टैक्स देने और किराया चुकाने के बावजूद मुश्किल में हैं, जबकि बाहरी विक्रेता बिना किसी कर का भुगतान के कारोबार कर रहे हैं।
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संवेदना संस्था के प्रवक्ता विशाल नड्डा ने कहा कि बिना टैक्स कारोबार से जहां व्यापारी नुकसान झेल रहे हैं, वहीं सरकार के राजस्व को भी भारी हानि हो रही है। उन्होंने कहा कि स्थानीय व्यापार हमेशा सरकार के साथ खड़ा रहता है, परंतु उनके हितों की अनदेखी की जा रही है। वक्ताओं ने कहा कि आए दिन नए नियम और कर व्यवस्था छोटे व्यापारियों के लिए सिरदर्द बन गई है। टैक्स, बिजली बिल और किराए के बोझ से व्यापारी वर्ग जूझ रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार को चाहिए कि छोटे और मध्यम वर्ग के व्यापारियों के लिए राहत नीति बनाए। कहा कि व्यापारी हर परिस्थिति में सरकार के साथ खड़ा रहता है, लेकिन जब राहत देने की बात आती है तो उन्हें भुला दिया जाता है। व्यापारी वर्ग राज्य की आर्थिक रीढ़ है, इसलिए उनके हितों की रक्षा जरूरी है। कार्यक्रम में संस्था के अध्यक्ष विनोद सागर, उपाध्यक्ष शिव कुमार, सचिव सत्यम शर्मा, परिवेश चंदेल, लकी चंदेल सहित अनेक पदाधिकारी मौजूद रहे। सम्मेलन में व्यापारियों ने एकजुटता का संदेश दिया और सरकार से अपेक्षा जताई कि स्थानीय व्यापारियों के हितों को प्राथमिकता दी जाए।
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भविष्य की रणनीति तय करेगा सम्मेलन
संवेदना संस्था ने कहा कि यह सम्मेलन केवल चर्चा तक सीमित नहीं रहेगा। व्यापारियों की समस्याओं को सरकार तक पहुंचाने और उनके समाधान के लिए ठोस रणनीति तैयार की जाएगी। संस्था ने कहा कि अब व्यापारी वर्ग को एकजुट होकर अपने अधिकारों की लड़ाई खुद लड़नी होगी।