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Bilaspur News: झंडूता विधानसभा को सामान्य बनाने के लिए उठी मांग
Wed, 19 Nov 2025 11:23 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
Updated Wed, 19 Nov 2025 11:23 PM IST
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36 पंचायतों के जनप्रतिनिधियों, व्यापार मंडलों का समर्थन
1948 से शुरू हुई व्यवस्था, 2007 में बदला सिर्फ नाम
संवाद न्यूज एजेंसी
बरठीं(बिलासपुर)। झंडूता विधानसभा क्षेत्र को सुरक्षित (एससी) श्रेणी से बाहर कर सामान्य घोषित करने की मांग ने जोर पकड़ लिया है। सर्वहितकारी मंच झंडूता ने कहा है कि यह विधानसभा अपने अस्तित्व में आने के दिन से ही लगातार सुरक्षित है, जबकि अब जनसंख्या संरचना और जनभावनाओं के अनुरूप इसे सामान्य बनाया जाना चाहिए।
सर्वहितकारी मंच झंडूता के अध्यक्ष देशराज तिवारी और महासचिव प्रशांत शर्मा ने प्रेसवार्ता में बताया कि क्षेत्र की 42 पंचायतों में से 36 पंचायतों ने विधानसभा को सामान्य घोषित करने के पक्ष में प्रस्ताव पारित किए हैं। इनके साथ जिला परिषद सदस्य, बीडीसी सदस्य और पंजीकृत व्यापार मंडलों ने भी इस प्रस्ताव का समर्थन किया है। 12 अक्तूबर 1948 को कोट कहलूर रियासत भारत संघ में शामिल हुई। इसके बाद बिलासपुर 1950 तक अलग प्रांत रहा और 1954 में हिमाचल प्रदेश में विलय हुआ। इसी दौरान जिले को बिलासपुर, घुमारवीं, कोट कहलूर और गेहड़वी नाम से चार विधानसभा क्षेत्र मिले। गेहड़वी विधानसभा को तत्काल सुरक्षित (एससी) घोषित किया गया था। 2007 में परिसीमन के दौरान इसका नाम बदलकर झंडूता कर दिया गया, लेकिन सीट की सुरक्षित स्थिति नहीं बदली। 17 दिसंबर 2024 को सर्वहितकारी मंच ने एसडीएम झंडूता के माध्यम से मुख्य चुनाव आयुक्त भारत, मुख्य निर्वाचन अधिकारी हिमाचल प्रदेश और जिला निर्वाचन अधिकारी बिलासपुर को ज्ञापन भेजा था। अधिकारियों ने अपने उत्तर में कहा है कि भारत सरकार जब भी परिसीमन आयोग का गठन करेगी, तब इस मुद्दे पर गंभीरता से विचार किया जाएगा।
मंच ने इस मुद्दे को आगे बढ़ाते हुए हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय में याचिका दायर की है। यह याचिका मुख्य न्यायाधीश जीएस संधावालिया और न्यायाधीश रंजन शर्मा की खंडपीठ में दाखिल हुई है। वर्तमान में इस पर सुनवाई चल रही है। सर्वहितकारी मंच ने कहा कि झंडूता विधानसभा को सामान्य सीट बनाए जाने की वर्षों पुरानी मांग अब न्यायिक स्तर पर पहुंच चुकी है, जिससे क्षेत्रवासियों में समाधान की उम्मीद बढ़ी है।
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1948 से शुरू हुई व्यवस्था, 2007 में बदला सिर्फ नाम
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बरठीं(बिलासपुर)। झंडूता विधानसभा क्षेत्र को सुरक्षित (एससी) श्रेणी से बाहर कर सामान्य घोषित करने की मांग ने जोर पकड़ लिया है। सर्वहितकारी मंच झंडूता ने कहा है कि यह विधानसभा अपने अस्तित्व में आने के दिन से ही लगातार सुरक्षित है, जबकि अब जनसंख्या संरचना और जनभावनाओं के अनुरूप इसे सामान्य बनाया जाना चाहिए।
सर्वहितकारी मंच झंडूता के अध्यक्ष देशराज तिवारी और महासचिव प्रशांत शर्मा ने प्रेसवार्ता में बताया कि क्षेत्र की 42 पंचायतों में से 36 पंचायतों ने विधानसभा को सामान्य घोषित करने के पक्ष में प्रस्ताव पारित किए हैं। इनके साथ जिला परिषद सदस्य, बीडीसी सदस्य और पंजीकृत व्यापार मंडलों ने भी इस प्रस्ताव का समर्थन किया है। 12 अक्तूबर 1948 को कोट कहलूर रियासत भारत संघ में शामिल हुई। इसके बाद बिलासपुर 1950 तक अलग प्रांत रहा और 1954 में हिमाचल प्रदेश में विलय हुआ। इसी दौरान जिले को बिलासपुर, घुमारवीं, कोट कहलूर और गेहड़वी नाम से चार विधानसभा क्षेत्र मिले। गेहड़वी विधानसभा को तत्काल सुरक्षित (एससी) घोषित किया गया था। 2007 में परिसीमन के दौरान इसका नाम बदलकर झंडूता कर दिया गया, लेकिन सीट की सुरक्षित स्थिति नहीं बदली। 17 दिसंबर 2024 को सर्वहितकारी मंच ने एसडीएम झंडूता के माध्यम से मुख्य चुनाव आयुक्त भारत, मुख्य निर्वाचन अधिकारी हिमाचल प्रदेश और जिला निर्वाचन अधिकारी बिलासपुर को ज्ञापन भेजा था। अधिकारियों ने अपने उत्तर में कहा है कि भारत सरकार जब भी परिसीमन आयोग का गठन करेगी, तब इस मुद्दे पर गंभीरता से विचार किया जाएगा।
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मंच ने इस मुद्दे को आगे बढ़ाते हुए हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय में याचिका दायर की है। यह याचिका मुख्य न्यायाधीश जीएस संधावालिया और न्यायाधीश रंजन शर्मा की खंडपीठ में दाखिल हुई है। वर्तमान में इस पर सुनवाई चल रही है। सर्वहितकारी मंच ने कहा कि झंडूता विधानसभा को सामान्य सीट बनाए जाने की वर्षों पुरानी मांग अब न्यायिक स्तर पर पहुंच चुकी है, जिससे क्षेत्रवासियों में समाधान की उम्मीद बढ़ी है।
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